WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

एसटीएफ द्वारा फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़ किया गया

एसटीएफ की कार्रवाई में फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़ हुआ जिसमें शामिल कई बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ तथा अवैध हथियारों का जखीरा पकड़ा गया।

By अजय त्यागी
1 min read
फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़

फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़

देहरादून, उत्तराखंड। उत्तराखंड में लगातार बरामद हो रहे अवैध हथियार अब सिर्फ पुलिस की कार्रवाई नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क की कहानी बयां करने लगी है। उत्तराखंड एसटीएफ की जांच में फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़ होने के साथ फर्जी लाइसेंस के जरिए करोड़ों की संपत्ति खड़ी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि उत्तराखंड सिर्फ ट्रांजिट रूट है या फिर अवैध हथियारों का नया बाजार बनता जा रहा है। दरअसल ये सवाल इसीलिए भी किया जा रहा है क्योंकि बीते छह महीने के अंदर उत्तराखंड पुलिस ने पच्चीस हथियार सप्लायरों को गिरफ्तार किया है जिसमें उनके पास से करीब चालीस अवैध शस्त्र और चार सौ तिरयासी कारतूस बरामद किए गए हैं। [1]

जानकारी के अनुसार एसटीएफ उत्तराखंड की अवैध हथियारों के नेटवर्क के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है। एसटीएफ ने पिछले छह महीने में पच्चीस हथियार सप्लायरों को गिरफ्तार कर उनके पास से चालीस अवैध शस्त्र और चार सौ तिरयासी कारतूस बरामद किए हैं। बरामद हथियारों में इक्कीस पिस्टल, दस तमंचे, पांच ऑटोमैटिक पंप एक्शन गन, दो राइफल और दो रिवाल्वर शामिल हैं। एसटीएफ ने साल 2026 के शुरू से ही राज्य में अवैध हथियार रखने और खरीद फरोख्त करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ विशेष अभियान चला रखा है। एसटीएफ की अलग-अलग टीमें इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई हैं जिसके बाद महत्वपूर्ण सफलताएं प्राप्त हुई हैं।

अवैध शस्त्र नेटवर्क

वही अवैध हथियारों का दूसरा और ज्यादा खतरनाक चेहरा फर्जी शस्त्र लाइसेंस हैं। एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ कि फर्जी लाइसेंस तैयार कर हथियारों की खरीद-फरोख्त का संगठित नेटवर्क वर्षों से सक्रिय था। एसटीएफ के मुताबिक इस गिरोह ने शस्त्र लाइसेंस रैकेट का संचालन करते हुए फर्जी लाइसेंस के जरिए करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाई है। जांच का दायरा अब उत्तराखंड से बाहर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब तक पहुंच चुका है।

एसटीएफ की मानें तो शुरुआती जांच में सामने आया है कि उत्तराखंड में दो तरह से अवैध हथियार पहुंच रहे हैं। एक बिना लाइसेंस की सीधी तस्करी और दूसरा फर्जी शस्त्र लाइसेंस के जरिए कानूनी हथियारों को अवैध तरीके से हासिल करना है। यही वजह है कि अब यह पूरा नेटवर्क कई राज्यों की जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया है जिसके बाद इस पर लगातार बड़ी कार्रवाई की जा रही है।

एसटीएफ कुमाऊं यूनिट

उत्तराखंड में अवैध हथियार सप्लाई करने वाले नेटवर्क को तोड़ने में कुमाऊं यूनिट अधिक सक्रिय नजर आ रही है। पिछले कुछ ही दिनों में एसटीएफ की कुमाऊं यूनिट ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए इसके मास्टरमाइंड सदानंद शर्मा निवासी शाहजहांपुर को भी गिरफ्तार किया था। आरोपी सदानंद के बैंक खाते में अवैध असलहों के फर्जी लाइसेंस के कारोबार से करीब एक करोड़ सत्तर लाख की धनराशि भी प्राप्त हुई थी।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि वर्तमान में अवैध हथियारों का रखना ट्रेंड बन गया है। इनका प्रयोग सोशल मीडिया में प्रदर्शन करना या फिर हर्ष फायरिंग में प्रयोग किया जाता है। यह ट्रेंड उत्तराखंड के साथ अन्य राज्यों में भी देखा जा रहा है। उत्तराखंड पुलिस के सामने चुनौती अवैध हथियारों का नया ट्रेंड है जिससे कानून व्यवस्था के समक्ष एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है।

नया हथियार ट्रेंड

दरअसल अब फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध हथियार खरीदे जा रहे हैं। हथियारों को खरीदने के लिए फर्जी ऑल इंडिया लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। इन मामलों में अन्य राज्यों से फर्जी लाइसेंस बनवा कर उत्तराखंड में ट्रांसफर कर रहे हैं और अवैध हथियारों को खरीद रहे हैं। इस संबंध में एसटीएफ द्वारा लगातार बड़ी कार्रवाई भी की जा रही है।

इस बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में पुलिस की विभिन्न टीमें लगातार दबिश दे रही हैं ताकि इस रैकेट को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। इस व्यापक फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद से पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और अन्य राज्यों की पुलिस से भी लगातार संपर्क साधा जा रहा है ताकि अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। हथियारों के अवैध कारोबार और फर्जी दस्तावेजों के निर्माण से हमेशा सतर्क रहें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
Source Source