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नदियों में बढ़ता प्रदूषण: जलीय जीवों पर मंडराया संकट

स्थानीय जलमार्गों में दूषित सीवेज का पानी सीधे मिलने और नदियों में बढ़ता प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने से हजारों बेजुबान जीवों की जान चली गई है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

चित्तौड़गढ़, राजस्थान। नदियों में बढ़ता प्रदूषण गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय रूप से चित्तौड़ की गंगा के नाम से विख्यात गंभीर नदी में सीवेज का गंदा पानी मिलने से हजारों मछलियों की मौत हो गई है। दो दिन पहले हुई तेज बारिश के बाद शहर के नालों का दूषित और बिना उपचारित किया हुआ पानी नदी के मुख्य प्रवाह में मिल गया था। इस दूषित पानी के कारण नदी का पूरा जल पूरी तरह से प्रदूषित हो गया और ऑक्सीजन की कमी से मछलियां मरने लगीं। मृत मछलियों को सबसे पहले गुरुवार शाम को महाराणा प्रताप सेतु के पास तैरते हुए देखा गया था जिनकी संख्या शुक्रवार तक काफी बढ़ गई। [1]

चित्तौड़ी आठम महोत्सव समिति के अध्यक्ष मुकेश नाहटा ने बताया कि बुधवार रात को हुई भारी बारिश के बाद शहर के गंदे नालों का पानी गंभीर नदी में बह गया। एक नाले के टूट जाने के कारण पूरे शहर का अनुपचारित सीवेज अब सीधे इस पवित्र नदी में गिर रहा है। इस प्रशासनिक लापरवाही ने नदी के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है जिससे जलीय जीवों का जीवन समाप्त हो रहा है। नाहटा ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से स्थिति बिगड़ने से पहले मृत मछलियों को हटाने और कचरे को रोकने के लिए तत्काल सफाई अभियान शुरू करने की मांग की है।

स्थानीय निवासियों की चिंता

इस भीषण पर्यावरणीय घटना के बाद नदी के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों में भारी डर व्याप्त हो गया है। लोगों को डर है कि यदि इस क्षेत्र को जल्द से जल्द साफ नहीं किया गया तो मलबे में तब्दील हो रही सड़ी हुई मछलियां गंभीर स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य की समस्याएं पैदा कर सकती हैं। नदी के आसपास के इलाकों में पहले ही बहुत तेज दुर्गंध फैलने लगी है जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारियों के फैलने और नदी के जल की गुणवत्ता और अधिक खराब होने की आशंका उत्पन्न हो गई है।

"नदी में सीवेज बहने के बाद यह भारी प्रदूषित हो गई है। टूटे नाले के कारण शहर का सीवेज सीधे गंभीर नदी में बह रहा है।" -मुकेश नाहटा, अध्यक्ष, चित्तौड़ी आठम महोत्सव समिति

मुकेश नाहटा ने क्षेत्र के सामाजिक संगठनों से भी अपील की है कि वे चित्तौड़ की गंगा को बचाने और इसकी सफाई के लिए आगे आएं। इस दुर्घटना ने पर्यावरण संरक्षण के दावों की पूरी तरह से पोल खोल दी है जिससे नागरिकों में गहरा रोष है। गंदे पानी का सीधे नदी में मिलना और नदियों में बढ़ता प्रदूषण स्थानीय परिस्थिति की तंत्र को पूरी तरह से नष्ट कर रहा है। यदि इसे तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया तो यह जलीय जीवन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी विनाशकारी साबित हो सकता है।

विभागीय प्रतिक्रिया

इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मत्स्य विभाग के अधिकारी मनीष पुरी ने कहा कि विभाग को मछलियों की मौत के बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि इस सामूहिक मौत का एक संभावित कारण नदियों में बढ़ता प्रदूषण ही नहीं नदी के ठहरे हुए पानी में अचानक ताजे बारिश के पानी के मिलने से उत्पन्न हुआ ऑक्सीजन संकट हो सकता है। अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि वास्तविकता का पता लगाने के लिए गंभीर नदी के पानी की गुणवत्ता का पूरी तरह से परीक्षण किया जाएगा।

"गंभीर नदी में पानी की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाएगा।" -मनीष पुरी, अधिकारी, मत्स्य विभाग

जलीय जीवों के इस तरह असमय मरने और नदियों में बढ़ता प्रदूषण रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। विभाग और नगर निकाय की इस सुस्ती से स्थानीय लोगों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं क्योंकि पानी में संदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में पानी की जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कदमों के बाद ही इस जल स्रोत को दोबारा स्वच्छ बनाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में कोई प्रभावी काम शुरू हो सकेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। जल प्रदूषण की स्थिति में स्थानीय नागरिकों को दूषित जल स्रोतों के उपयोग से बचना चाहिए और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र से संपर्क करना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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