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फर्जी दस्तावेज से बैंक में धोखाधड़ी कर पुलिस तंत्र को चौंकाया

तिरुवनंतपुरम में अपराधियों द्वारा फर्जी दस्तावेज से बैंक में धोखाधड़ी करने का एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला पुलिस के सामने आया है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

तिरुवनंतपुरम, केरल। देश में बढ़ते वित्तीय अपराधों के बीच अपराधियों ने अधिकारियों को गुमराह करके फ्रीज किए गए छह बैंक खातों को दोबारा चालू करवा लिया है। इस गंभीर अपराध को अंजाम देने के लिए शातिर अपराधियों ने अदालत और पुलिस विभाग के नाम पर तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज से बैंक में धोखाधड़ी की इस पूरी साजिश को रचा था। जैसे ही ये सभी प्रतिबंधित खाते दोबारा चालू हुए, ठगों ने उनमें जमा राशि को तत्काल प्रभाव से दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दिया। इस बड़े घालमेल का खुलासा होने के बाद स्थानीय पुलिस ने अपनी विस्तृत जांच शुरू कर दी है। [1]

इस हाईटेक आपराधिक मामले में तिरुवनंतपुरम शहर की साइबर पुलिस ने पच्चीस जून को वझुथाकाउड स्थित एक निजी बैंक के मुख्य प्रबंधक द्वारा दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत के बाद मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार पूर्व में विभिन्न आपराधिक मामलों के संबंध में साइबर पुलिस के लिखित अनुरोध पर ही इन बैंक खातों को पूरी तरह से फ्रीज किया गया था। लेकिन इस साल अप्रैल महीने में बैंक को एक ऐसा ईमेल प्राप्त हुआ, जो देखने में बिल्कुल तिरुवनंतपुरम शहर साइबर पुलिस की आधिकारिक ईमेल आईडी से मिलता-जुला था।

अपराध का तरीका

अधिकारियों ने बताया कि इस फर्जी दस्तावेज से बैंक में धोखाधड़ी के तहत भेजे गए ईमेल में साइबर पुलिस के लेटरहेड पर एक जाली पत्र, एक फर्जी कानूनी नोटिस और तिरुवनंतपुरम के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के जाली हस्ताक्षर और मुहर वाला एक मनगढ़ंत अदालती आदेश शामिल था। इस भ्रामक ईमेल में बैंक को साफ तौर पर यह निर्देश दिया गया था कि वे छह फ्रीज किए गए खातों को तुरंत अनफ्रीज करें। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के एक अन्य बैंक में रखे गए एक विशिष्ट खाते में छाछठ हजार चार सौ बावन रुपये की राशि स्थानांतरित करें।

पुलिस ने बताया कि बैंक को भ्रम में रखने के लिए उस फर्जी ईमेल आईडी से कई फॉलो अप ईमेल भी लगातार भेजे गए थे। इन संदेशों में बैंक अधिकारियों से कथित अदालती आदेश को बिना किसी देरी के तुरंत लागू करने का दबाव बनाया गया था। बैंक अधिकारियों को हाल ही में नियमित ऑडिट के दौरान यह पता चला कि ईमेल और उसके साथ संलग्न किए गए सभी दस्तावेज पूरी तरह से जाली थे। इसके बाद उन्होंने बिना वक्त गंवाए पुलिस को इसकी लिखित सूचना दी। पुलिस ने इस फर्जी दस्तावेज से बैंक में धोखाधड़ी पर विस्तृत विवरण मांगा है।

जांच और धाराएं

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने फर्जी संदेशों के जवाब में बैंक द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई के संबंध में प्रबंधन से पूरी विस्तृत जानकारी मांगी है। इसके साथ ही तकनीकी टीमों की मदद से उस बैंक खाते का पता लगाने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं जिसमें धोखाधड़ी की यह राशि ट्रांसफर की गई थी। पुलिस इस समय संबंधित खाताधारकों का पूरा विवरण जुटा रही है और इस पूरे रैकेट में शामिल सभी लोगों की भूमिकाओं की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अपराधियों की पहचान जल्द की जाएगी।

पुलिस ने इस फर्जी दस्तावेज से बैंक में धोखाधड़ी के मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इसके तहत मुख्य रूप से धोखाधड़ी, प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना, अदालती अभिलेखों की जालसाजी और नकली सामान बनाने के गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं। पुलिस अब ईमेल के आईपी एड्रेस और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए मुख्य आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है ताकि इस अंतरराज्यीय नेटवर्क का पूरी तरह पर्दाफाश हो सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में किसी भी संदिग्ध ईमेल, अदालती आदेश या प्रशासनिक निर्देश की प्रामाणिकता की पूरी तरह जांच करने के बाद ही बैंकों को कोई वित्तीय कदम उठाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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