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राजस्थान

प्रदूषित पानी पर चिंता: बांध का जल दूषित होने पर किसानों ने उठाई आवाज

ग्रामीण और किसान आजीविका संकट को लेकर बेहद परेशान हैं। मोरेल बांध में प्रदूषित पानी पर चिंता लगातार गहराती जा रही है जिससे लोग डरे हुए हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
मोरेल बांध में पंहुचा प्रदूषित पानी

मोरेल बांध में पंहुचा प्रदूषित पानी

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लालसोट, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। मोरेल बांध में जयपुर के अमानीशाह नाले से आने वाले प्रदूषित एवं कथित जहरीले पानी को लेकर क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है। उनका साफ कहना है कि बांध में दूषित पानी पहुंचने से कृषि, पर्यावरण और आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। किसानों ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है ताकि संकट दूर हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि मोरेल बांध में आने वाले पानी को पहले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से शुद्ध किया जाना चाहिए। इस गंभीर समय में हर तरफ प्रदूषित पानी पर चिंता व्यक्त की जा रही है।

इससे जहरीले रसायन, गंदगी और अन्य प्रदूषक तत्व बांध तक नहीं पहुंचेंगे जिससे जलीय तंत्र भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। उनका सुझाव है कि अमानीशाह नाले सहित प्रमुख नालों पर आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएं ताकि शुद्ध पानी ही आगे बढ़े। किसानों ने यह भी मांग की है कि बांध में मिलने वाले पानी के मार्गों पर नियमित औचक निरीक्षण किए जाएं और फैक्ट्रियों एवं औद्योगिक इकाइयों द्वारा रासायनिक युक्त अपशिष्ट सीधे नालों में छोड़े जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इस प्रदूषित पानी पर चिंता स्वाभाविक है।

मांग और समाधान

ग्रामीणों ने बताया कि इस मुद्दे को पूर्व में राजस्थान विधानसभा में भी प्रमुखता से उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उन्होंने जिला प्रशासन और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लिखित ज्ञापन देकर प्रभावी कार्रवाई करने की मांग करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही किसानों ने प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाने और एक किसान समिति गठित कर फसलों को होने वाले नुकसान, चर्म रोग सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में पंचायत एवं संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपने की भी बात कही है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो मोरेल बांध का जल और इससे जुड़े हजारों किसानों की आजीविका तथा आमजन का स्वास्थ्य गंभीर संकट में पड़ सकता है। पानी की लगातार बिगड़ती गुणवत्ता के कारण पूरी फसल चक्र व्यवस्था चरमरा सकती है जिससे भूमि बंजर होने का खतरा बढ़ जाता है। किसानों का मानना है कि केवल सरकारी स्तर पर कठोर नियम बनाकर ही फैक्ट्रियों के रासायनिक कचरे को बांध में मिलने से समय रहते रोका जाना संभव है। इस विकट समस्या को लेकर क्षेत्र के हर वर्ग में अब प्रदूषित पानी पर चिंता देखी जा सकती है।

प्रशासनिक स्तर पर प्रयास

किसानों ने इस समस्या को लेकर एकजुट होने का फैसला किया है क्योंकि प्रदूषित जल सीधे तौर पर उनकी आजीविका को नष्ट कर रहा है। विधानसभा में मामला उठने के बावजूद धरातल पर कोई बड़ी कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीण अब इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और विभिन्न स्तरों पर दबाव बनाने की रणनीति बना रहे हैं। किसानों द्वारा बनाई जाने वाली विशेष समिति इस पूरे जल संकट की निगरानी करेगी और समय-समय पर पंचायत को रिपोर्ट सौंपेगी।

आने वाले दिनों में यदि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस पर सख्त रुख नहीं अपनाया तो ग्रामीण जनआंदोलन का रास्ता भी चुन सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी इस पानी के उपयोग से होने वाले चर्म रोगों की गंभीरता को देखते हुए अलर्ट रहने की जरूरत है। क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि अमानीशाह नाले की पूरी सफाई हो और फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र टास्क फोर्स बनाई जाए जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर जुर्माना लगा सके। इस व्यवस्था की कमी से उत्पन्न प्रदूषित पानी पर चिंता जायज है।

भविष्य का संकट

मोरेल बांध के जल स्तर और उसकी शुद्धता पर ही इस पूरे क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था निर्भर करती है। यदि जहरीले रसायनों का प्रवाह इसी तरह अनवरत जारी रहा तो आने वाले समय में पीने के पानी का संकट भी खड़ा हो सकता है। पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई करना भविष्य में बेहद नामुमकिन हो जाएगा जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। किसान चाहते हैं कि सरकार त्वरित राहत कोष बनाकर इस समस्या के तकनीकी समाधान पर तुरंत काम शुरू करे।

इस क्षेत्र की भूमि को बचाने के लिए प्रदूषण बोर्ड को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और उद्योगों पर नजर रखनी होगी। ग्रामीणों की यह मांग पूरी तरह न्यायसंगत है क्योंकि स्वच्छ जल उनका मौलिक अधिकार है जिसे बनाए रखना प्रशासन का मुख्य दायित्व है। सभी ग्रामीण एकजुट होकर इस समस्या के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं ताकि इस सुंदर जलाशय को पूरी तरह नष्ट होने से बचाया जा सके। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मोरेल बांध में प्रदूषित पानी पर चिंता करना हर नागरिक का परम कर्तव्य बन चुका है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। जल स्रोतों के पास कृषि करने वाले किसानों को फसलों में पानी का उपयोग करने से पहले स्थानीय कृषि और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief