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प्रादेशिक

कोर्ट की सख्ती: अवैध रेव पार्टियाँ कराने के आरोप में तीन अधिकारी नपे

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू में अवैध रेव पार्टियाँ आयोजित होने के मामले में डिप्टी कमिश्नर और एसपी समेत तीन अफसरों के ट्रांसफर के आदेश दिए हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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शिमला, हिमाचल प्रदेश। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू जिले की पार्वती घाटी में इजरायलियों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर अवैध रेव पार्टियाँ आयोजित कराने में सहयोग करने वाले अधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और सब डिविजनल मजिस्ट्रेट को 1 सप्ताह के भीतर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने के आदेश भी दिए हैं। [1]

अदालत ने इस मामले की गहन जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज करने और एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन करने का आदेश दिया है। इस एसआईटी का नेतृत्व पुलिस उपमहानिरीक्षक यानी डीआईजी रैंक से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा। कुल्लू और मंडी जिलों में होने वाली अवैध रेव पार्टियाँ और मादक पदार्थों के दुरुपयोग पर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रहे और उन्होंने चेतावनी के बावजूद इन आयोजनों को सुगम बनाया।

गंभीर लापरवाही

यह पूरा मामला कसोल के पास ग्राहन में ग्रीन फॉरेस्ट 1 और ग्रीन फॉरेस्ट 2 में 7 जून से 11 जून 2026 तक आयोजित एक कार्यक्रम से संबंधित है जिसके लिए टिकट भी बेचे गए थे। स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में इजरायली पर्यटक शामिल हुए थे और कुछ इजरायली नागरिक ही इस आयोजन के मुख्य कर्ताधर्ताओं में शामिल थे जिसे उन्होंने बैक टू द माउंटेन फेस्टिवल का नाम दिया था। कोर्ट ने कहा कि इस बात की जांच जरूरी है कि क्या अधिकारियों द्वारा इसके लिए कोई मूक सहमति दी गई थी।

जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण यानी डीएलएसए द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार यह आयोजन स्थल एक अलग-थलग वन क्षेत्र में स्थित था जहां लगभग 50 कैंपिंग टेंट, निजी सुरक्षाकर्मी और हजारों लोगों को समायोजित करने में सक्षम बुनियादी ढांचा मौजूद था। अदालत ने गौर किया कि डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस यानी डीएसपी की 5 जून की रिपोर्ट में नशीले पदार्थों के सेवन और तस्करी की आशंका जताई गई थी और अनुमति देने से पहले इन चिंताओं पर विचार करने की सलाह दी गई थी।

प्रशासनिक साठगांठ

डीएसपी की प्रतिकूल रिपोर्ट मिलने के बावजूद जिसमें स्पष्ट रूप से अवैध रेव पार्टियाँ आयोजित होने की आशंका के कारण अनुमति न देने की सिफारिश की गई थी, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट द्वारा 6 जून को ध्वनि अनुमति जारी कर दी गई। कोर्ट के अनुसार 9 जून को हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ के हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस कार्यक्रम स्थल पर पहुंची और इसे रुकवाकर 2 प्राथमिकी दर्ज कीं। वहां भारी मात्रा में शराब की खाली बोतलें, सिगरेट के टुकड़े और रोलिंग पेपर बरामद हुए थे।

अदालत ने कहा कि यदि न्यायपालिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो यह पार्टी 7 जून से 11 जून तक लगातार चलती रहती। पुलिस ने आयोजन स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर भी जब्त कर लिया है। अधिकारियों की इस लापरवाही पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अपने आदेश में कहा:

"ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के अपने कर्तव्यों में विफल रहे और बल्कि उन्होंने बड़े पैमाने पर रेव पार्टियों के आयोजन को सुगम बनाया।" — खंडपीठ, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

इस प्रकार अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

अवैध गतिविधियां

डीएलएसए की रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कोकीन और एलएसडी के साथ 2 पर्यटकों को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा इस कार्यक्रम में डीजे के रूप में प्रस्तुति दे रही एक रूसी नागरिक कारिया कुजमिनिख की संदिग्ध ड्रग ओवरडोज के कारण मौत हो गई थी जिसके शव का पोस्टमार्टम कराने की सिफारिश की गई है। इस गंभीर घटना ने क्षेत्र में चल रहे अवैध नशीले पदार्थों के नेटवर्क और उसमें प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत को उजागर कर दिया है।

हाईकोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद अब हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में भारी हड़कंप मचा हुआ है। सरकार अब कोर्ट के निर्देशानुसार तय समयसीमा के भीतर नए अधिकारियों की नियुक्ति और जांच टीम के गठन की प्रक्रिया पूरी करने में जुट गई है। इस आदेश से भविष्य में पहाड़ी क्षेत्रों के संवेदनशील वन इलाकों में होने वाली अवैध रेव पार्टियाँ और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर लगाम लगाने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। किसी भी क्षेत्र में कानून व्यवस्था और नशीले पदार्थों से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन में शिकायत दर्ज कराएं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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