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पर्यावरण संरक्षण के लिए खेजड़ी के पौधे लगाने का उत्सव बनेगा जनआंदोलन

पर्यावरण संतुलित करने और खेजड़ी के पौधे लगाने का उत्सव मनाकर प्रकृति को बचाने के लिए ऐतिहासिक वृक्षारोपण अभियान की घोषणा की गई है।

By अजय त्यागी
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Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg पोस्टर का विमोचन

पोस्टर का विमोचन

बीकानेर, राजस्थान। जिले में लगातार कट रही खेजड़ी को बचाने की मुहिम को गति देने के उद्देश्य से बीकानेर वैचारिक जागरण मंच की ओर से आगामी दिनों में खेजड़ी के पौधे लगाने का उत्सव मनाने का एक बड़ा संकल्प लिया गया है। इसी महत्वपूर्ण कड़ी के तहत आगामी पांच जुलाई को गंगाशहर भीनासर गोचर भूमि में एक ही दिन के भीतर सुबह छह बजे से लेकर दस बजे तक रिकॉर्ड ग्यारह हजार खेजड़ी के पौधे रोपे जाएंगे।

पत्रकारों को विशेष जानकारी देते हुए बीकानेर वैचारिक जागरण मंच के अध्यक्ष एडवोकेट अजय कुमार पुरोहित ने बताया कि इस बड़े अभियान में अधिक से अधिक आमजन की सक्रिय सहभागिता हो, इसके लिए मंच द्वारा हर स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। पुरोहित ने जनता को आश्वस्त करते हुए साफ कहा कि गोचर में जो भी पौधे लगाएं जा रहे हैं, उन सभी की सुरक्षा और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी स्वयं मंच की रहेगी।

धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

इस विशेष मौके पर उपस्थित महंत सरजूदास जी महाराज ने कहा कि खेजड़ी एक देव वृक्ष है जो मरूस्थलीय प्रकृति चक्र की मुख्य धुरी है। यह वृक्ष रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र का मजबूत आधार स्तम्भ है। खेजड़ी का एक अपना समृद्ध जैविक संसार है जिसमें संपूर्ण वनस्पति चक्र, पक्षी, कीट-पतंगे और मृदा पारिस्थितिकी का सुक्ष्म जीवन चक्र पूरी तरह समाहित है। इसके बिना मरूस्थलीय प्रकृति चक्र को बचाना बेहद मुश्किल है।

महाराज श्री ने कहा कि यह पेड़ चारा, लकड़ी, सांगरी और भूजल संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी संरक्षण का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्त्रोत है। इसके बिना मरूस्थल का अस्तित्व नहीं रह सकता। उन्होंने आगे कहा कि खेजड़ी की महत्ता का एक पूरा वैज्ञानिक आधार है और हमारे धर्म शास्त्र में भी शमी वृक्ष के रूप में इसका सुंदर वर्णन मिलता है जो समाज में सदियों से खेजड़ी के पौधे लगाने का उत्सव मनाने की परंपरा को बताती है।

विभिन्न संगठनों की भागीदारी

खेजड़ी के पौधे लगाने का उत्सव जैसे इस पुण्य कार्य में जिला प्रशासन, नगर निगम, बीकानेर विकास प्राधिकरण के साथ पर्यावरण के क्षेत्र में पदमश्री से सम्मानित लक्ष्मण सिंह लोपडिया, श्याम सुन्दर पालीवाल और हिमताराम भाम्भू भी शामिल होंगे। इसके अलावा वन विभाग, एनसीसी, स्काउट-गाइड, रोटरी क्लब, लायन्स क्लब, महावीर इंटरनेशनल, बीकानेर के तीनों विश्वविद्यालयों जिनमें कृषि, वेटरनरी और एमजीएस यूनिवर्सिटी शामिल हैं, अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।

इनके साथ ही ब्रह्माकुमारी केन्द्र, भदौरिया ग्रुप, योग सेवा संस्थान, एकाउण्डटेट एसोसिएशन, माहेश्वरी सभा, महिला संगठन, बार एसोसिएशन, कर्मचारी संगठन और विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन समेत सभी राजनीतिक दल और जन प्रतिनिधि इस बड़े अभियान का हिस्सा बनेंगे। समाज के सभी वर्गों के जुड़ने से यह पर्यावरण अभियान अब एक बड़े उत्सव का रूप लेता जा रहा है।

संत समाज की सहभागिता

आयोजन से जुड़े पूर्व महापौर नारायण चोपड़ा ने बताया कि इस पूरे आयोजन में संत समाज की भी व्यापक सहभागिता रहेगी। जिसमें अधिष्ठाता स्वामी विर्मशानंद, रामेश्वरानंद, महंत सरजूदास महाराज, स्वामी सच्चिदानन्द महाराज, विश्नोई समाज के संत और जैन मुनि शामिल होंगे। साथ ही तेरापंथ युवक परिषद, महिला मंडल, विभिन्न स्कूल, कॉलेज, स्वयं सेवक, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान, ओवर फोर नेशन और खेल संगठनों के साथ खेजड़ी बचाव आन्दोलन के मुखिया परसाराम बिश्नोई भी शामिल होंगे।

इस महत्वपूर्ण घोषणा के दौरान आगामी कार्यक्रम से जुड़े विशेष पोस्टर का विमोचन भी किया गया। पोस्टर विमोचन के इस गरिमामयी अवसर पर महंत सरजूदास महाराज, डी पी पच्चीसिया, पूर्व महापौर नारायण चोपड़ा, विनोद जोशी, विजय कुमार आचार्य, वीरेन्द्र किराडू और हेम शर्मा सहित मंच के कई गणमान्य पदाधिकारी मौजूद रहे जिन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में लोगों से पहुंचने का आह्वान किया।

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। किसी भी बड़ें वृक्षारोपण अभियान या सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेने से पूर्व स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों, समय-सारणी और गोचर भूमि के नियमों की आधिकारिक पुष्टि अवश्य कर लें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief