मलबा हटाने के दौरान मिली स्वयंभू शिव परिवार की सुंदर आकृतियां
उत्तराखंड के कंडारा गांव में पहाड़ी से मलबा हटाने के दौरान एक विशाल शिला पर स्वयंभू शिव परिवार की दिव्य आकृतियां उभरकर सामने आई हैं।
स्वयंभू शिव परिवार की सुंदर आकृतियां
रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड। जनपद का कंडारा गांव इन दिनों अगाध आस्था और श्रद्धा का एक नया केंद्र बनकर उभरा है। यहाँ स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर के समीप पहाड़ी क्षेत्र से अचानक मलबा हटाने के दौरान एक अत्यंत विशाल शिला खंड पर स्वयंभू शिव परिवार की सुंदर आकृतियां प्रकट हुई हैं। इस अलौकिक दृश्य के सामने आने के बाद से पूरे क्षेत्र के स्थानीय निवासियों में जबरदस्त धार्मिक उत्साह का वातावरण बना हुआ है और दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। [1]
धार्मिक अनुष्ठान शुरू
इस अद्भुत घटना के बाद से प्रत्येक सोमवार को इस पवित्र स्थान पर श्रद्धालुओं द्वारा विशेष जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधिवत पूजा-अर्चना का आयोजन किया जा रहा है। हनुमान मंदिर में बीते कई वर्षों से कठिन तपस्या में लीन संत पंचम दास महाराज ने इस दिव्य घटना से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें लंबे समय से इस एकांत स्थान पर किसी अलौकिक और दिव्य शक्ति के विराजमान होने का निरंतर आभास होता रहता था।
संत पंचम दास महाराज का कहना है कि वे सालों तक नियमित रूप से बाबा केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए जाते रहे थे। हालांकि पिछले दो-तीन सालों से मुख्य यात्रा मार्गों में बढ़ती अत्यधिक भीड़, गंदगी और व्यापक अव्यवस्था के कारण उन्होंने मुख्य धाम जाना छोड़ दिया था। कंडारा स्थित इस प्रसिद्ध हनुमान मंदिर परिसर से संपूर्ण दिव्य केदारघाटी के बेहद सुंदर दर्शन होते हैं और वे रोजाना यहीं से बाबा केदारनाथ को प्रणाम करते थे।
"कुछ समय पहले हनुमान मंदिर से करीब 20 मीटर की दूरी पर हल्का भूस्खलन हुआ. जब वहां से मिट्टी और मलबा हटाया गया, तो शिला पर भगवान शिव, माता पार्वती, श्री गणेश, भगवान कार्तिकेय और नंदी महाराज समेत संपूर्ण शिव परिवार की आकृतियां स्वयंभू रूप में स्पष्ट दिखाई दीं।" — पंचम दास महाराज, संत

आध्यात्मिक ऊर्जा प्रवाह
संत ने बताया कि स्वयंभू शिव परिवार के इस अलौकिक दृश्य को देखकर वे स्वयं भी पूरी तरह भावविभोर और आश्चर्यचकित रह गए थे। वर्तमान समय में रोजाना इस स्वयंभू शिव परिवार का स्थानीय ग्रामीणों द्वारा विधिवत पूजन, जलाभिषेक, भव्य आरती और सामूहिक भजन-कीर्तन किया जा रहा है। यह पूरा कंडारा क्षेत्र घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है, जहां अब हर किसी को एक अद्भुत सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा अनुभव हो रहा है।
संत पंचम दास महाराज ने केदारनाथ यात्रा की बदलती परिस्थितियों और मर्यादाओं पर भी अपनी गहरी चिंता प्रकट की है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को केदारनाथ धाम की पवित्रता, स्वच्छता और प्राकृतिक सौंदर्य का पूरा सम्मान करना चाहिए। दिल्ली में जन्मे और राजस्थान के मूल निवासी संत पंचम दास पिछले करीब छह से सात सालों से इस कंडारा गांव के हनुमान मंदिर में रहकर सनातन धर्म की सेवा और साधना कर रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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