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पल्स पोलियो अभियान: गोलियों की गूँज कि जगह पहुंची दो बूँद ज़िंदगी की

सुकमा जिले के संवेदनशील एवं अंदरूनी माओवाद प्रभावित गांवों में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने 0-5 वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg सुकमा में पल्स पोलियो अभियान

सुकमा में पल्स पोलियो अभियान

सुकमा, छत्तीसगढ़। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पल्स पोलियो अभियान के तीसरे और अंतिम दिन सुकमा जिले के सभी संवेदनशील और अंदरूनी गांवों में पहुंचकर बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया है। जिन अंदरूनी क्षेत्रों में कभी बारूद और गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहां आज बच्चे शोर मचाते हुए ग्रामीणों को स्वास्थ्य कर्मियों के आगमन की सूचना दे रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत सुकमा के सुदूरवर्ती अंचलों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता बेखौफ होकर घर-घर दस्तक दे रहे हैं। [1]

बदलती बस्तर की तस्वीर

कभी माओवाद का सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले पूवर्ती गांव में आज व्यापक बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। जिस गांव का नाम कभी भीषण नक्सली घटनाओं और सुरक्षा चुनौतियों के कारण चर्चा में रहता था, वहां अब पल्स पोलियो अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मियों की पहुंच सुनिश्चित हो रही है। विकास की यह नई किरण उन सुदूर इलाकों तक भी निरंतर पहुंच रही है, जो कई दशकों तक भौगोलिक विषमताओं और विभिन्न विपरीत परिस्थितियों के कारण मुख्यधारा से पूरी तरह कटे रहे थे।

इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने भी पूरे उत्साह के साथ अपने बच्चों को पोलियो की खुराक दिलाई। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनकी टीम लगातार अंदरूनी और संवेदनशील गांवों में घर-घर जाकर पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिला रही है। पूवर्ती जैसे गांव में प्रशासन को ग्रामीणों का पूरा सहयोग मिल रहा है और अब तक अकेले इस गांव में 170 बच्चों को जीवनरक्षक दवा पिलाई जा चुकी है।

"जिले का एक भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे, यही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंचकर घर-घर बच्चों को पोलियो की दवा पिला रही है। पूवर्ती जैसे गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं का पहुंचना जिले में आ रहे सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।" — अमित कुमार, कलेक्टर

दुर्गम क्षेत्रों में पहुंच

कलेक्टर अमित कुमार के निर्देश पर जिले में इस विशेष पल्स पोलियो अभियान को गति दी जा रही है। इस योजना के तहत जिले के करीब 39 हजार बच्चों को चिन्हित कर पोलियो की जीवनरक्षक खुराक पिलाई जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और प्रशासन की पहुंच बढ़ने से इन दुर्गम गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। पूवर्ती जैसे संवेदनशील गांव में 170 बच्चों को दवा पिलाना उस मजबूत होते भरोसे का प्रतीक है, जो शासन और ग्रामीणों के बीच स्थापित हुआ है।

एक समय ऐसा था जब पूवर्ती का नाम सुनते ही लोगों के मन में भय का माहौल बन जाता था और सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती माना जाता था। लेकिन अब सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ नियमित स्वास्थ्य सेवाएं भी गांव तक पहुंचने लगी हैं। पोलियो अभियान के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने केवल बच्चों को दवा ही नहीं पिलाई, बल्कि ग्रामीणों को टीकाकरण, स्वच्छता और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक किया।

कन्हईगुड़ा में पहली बार

पल्स पोलियो अभियान के अंतिम दिन कोंटा विकासखंड के दुर्गम कन्हईगुड़ा गांव में भी ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। आजादी के दशकों बाद पहली बार स्वास्थ्य विभाग की टीम जंगलों, पहाड़ों और कठिन पगडंडियों को पार करते हुए इस दुर्गम गांव तक पहुंची और यहां के 18 मासूम बच्चों को जीवनरक्षक पोलियो की खुराक पिलाई। वर्षों तक माओवाद की दहशत और असुरक्षा के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर रहे इस इलाके में अब नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू होने लगी हैं।

दुर्गम गांव कन्हईगुड़ा तक पहुंचना आसान नहीं था और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा मितानिन ने इसके लिए लंबी दूरी तय की। उनका उद्देश्य सिर्फ एक था कि कोई भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रह जाए। एक समय इस इलाके में स्वास्थ्य कर्मियों का प्रवेश लगभग नामुमकिन था, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और प्रशासन की लगातार पहुंच बढ़ने से दुर्गम गांवों तक सरकारी योजनाएं पहुंचने लगी हैं और स्वास्थ्य विभाग भी अब उन इलाकों तक पहुंच रहा है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अपने क्षेत्र में पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को समय पर पल्स पोलियो अभियान के तहत जीवनरक्षक खुराक अवश्य दिलवाएं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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