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शैक्षणिक विकास में सहयोग के लिए हिंदुस्तान जिंक की छह इकाइयां सम्मानित

भामाशाह सम्मान समारोह में शैक्षणिक विकास में सहयोग देने के लिए हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को प्रतिष्ठित शिक्षा विभूषण पुरस्कार प्रदान किया गया।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को मिला प्रतिष्ठित शिक्षा विभूषण पुरस्कार

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को मिला प्रतिष्ठित शिक्षा विभूषण पुरस्कार

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक और शीर्ष चांदी उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को तीसवें भामाशाह सम्मान समारोह में विशेष रूप से नवाजा गया है। कंपनी की छह इकाइयों को शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक योगदान देने के लिए शिक्षा विभूषण प्रदान किया गया है। यह लगातार ग्यारहवां वर्ष है जब राजस्थान सरकार ने परिवर्तनकारी शैक्षिक पहलों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए हिंदुस्तान जिंक को सम्मानित किया है। शैक्षणिक विकास में सहयोग करने वाली इस कंपनी ने वर्ष 2017 से विभिन्न शिक्षा हस्तक्षेपों में 551 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा निवेश किया है जिससे सालाना दो लाख से अधिक बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।

यह प्रतिष्ठित पुरस्कार बिड़ला ऑडिटोरियम सभागार में आयोजित भव्य पुरस्कार समारोह में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। समारोह में उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर तथा अतिरिक्त शिक्षा सचिव राजेश यादव ने राज्यभर से चयनित 145 भामाशाहों एवं 99 प्रेरकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस विशेष मौके पर राजस्थान के मिड डे मिल आयुक्त विश्व मोहन शर्मा, समसा की राज्य परियोजना निदेशक डॉ रश्मि शर्मा, शिक्षा निदेशक सीता राम जाट और संयुक्त निदेशक महेन्द्र खींची भी मौजूद थे।

समारोह का आयोजन

इस गौरवपूर्ण सम्मान को हिंदुस्तान जिंक की विभिन्न इकाइयों के प्रमुखों, निदेशकों और सीएसआर टीम ने मंच पर स्वयं प्राप्त किया। विगत नौ वर्षों में कंपनी ने शिक्षा के क्षेत्र में सीएसआर के तहत शैक्षणिक विकास में सहयोग देते हुए सामाजिक विकास में 551 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इसमें बुनियादी ढांचे के उन्नयन पर 83 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं जिनमें मुख्य रूप से कक्षा कक्षों का निर्माण, शौचालय, खेल के मैदान, पीने के पानी की सुविधाएं और विद्युतीकरण शामिल हैं। इसके अलावा दीर्घकालिक शिक्षा प्रयासों के लिए 468 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया गया है।

कंपनी के इन प्रयासों के तहत आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक बचपन की देखभाल के लिए नंद घर, शिक्षा संबल और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा जीवन तरंग जैसी योजनाएं संचालित हैं। इसके साथ ही उच्च शिक्षा हेतु ऊंची उड़ान, ग्रामीण बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और कंपनी-संचालित स्कूलों के लिए सहयोग शामिल हैं। शैक्षणिक विकास में सहयोग कार्यक्रमों से प्रतिवर्ष दो लाख से अधिक बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं जिसका स्कूल नामांकन, विशेष रूप से किशोर बालिकाओं के विद्यालय से जुड़ाव और ग्रामीण क्षेत्रों में सीखने के परिणामों पर उल्लेखनीय प्रभाव हुआ है।

बदलाव के आंकड़े

राज्य में कक्षा दसवीं का उत्तीर्ण प्रतिशत वर्ष 2007 में 47 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2026 में 92.53 प्रतिशत हो गया है जिसमें बालिकाएं लगातार बालकों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। जहां पिछले दस वर्षों में राजस्थान का औसत परिणाम लगभग 67.66 प्रतिशत रहा वहीं शिक्षा संबल से जुड़े 37 स्कूलों ने शत-प्रतिशत परिणाम हासिल किया है। ग्रामीण राजस्थान में वंचित बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच में सुधार के लिए कंपनी ने राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग के साथ एक नए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें अगले पांच वर्षों में शैक्षणिक विकास में सहयोग हेतु 36 करोड़ रुपये का निवेश होगा।  

हिंदुस्तान जिंक के प्रयासों में शिक्षा के साथ ही ग्रामीण महिलाओं और किसानों का उत्थान, स्वास्थ्य सेवा, जल संरक्षण को बढ़ावा देकर, स्वच्छता, बुनियादी ढांचे में सुधार और स्थायी आजीविका के लिए भी कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। इन पहलों ने सामूहिक रूप से 4 हजार से अधिक गांवों में 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। शैक्षणिक विकास में सहयोग देने की प्रतिबद्धता के साथ कंपनी भविष्य में भी राजस्थान के सरकारी विद्यालयों के कायाकल्प और छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।  

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी सरकारी नीतियों एवं निजी सहभागिता की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों से की जा सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief