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अंतरराष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा अमेरिका में शरणार्थियों पर संकट

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के बाद टीपीएस संरक्षण समाप्त होने से अचानक वहां रहने वाले शरणार्थियों पर संकट खड़ा हो गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट

मियामी, अमेरिका। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन को हैती और सीरिया के नागरिकों के लिए अस्थायी संरक्षित स्थिति यानी टीपीएस को समाप्त करने की अनुमति देने के बाद देश में कानूनी उथल-पुथल मच गई है। इस बड़े न्यायिक निर्णय के कारण विभिन्न राज्यों में रहने वाले लाखों शरणार्थियों पर संकट उत्पन्न हो गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार टीपीएस के तहत रह रहे लोगों को अब किसी भी समय हिरासत में लिए जाने और निर्वासित किए जाने का डर सता रहा है। [1]

टीपीएस मुख्य रूप से उन लोगों को निर्वासन से राहत और वर्क परमिट प्रदान करता है जिनके गृह देश प्राकृतिक आपदाओं, सशस्त्र संघर्ष या अन्य असाधारण परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। इस सुरक्षा कवच के हटने से स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य, निर्माण और देखभाल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने वाले सैकड़ों-हजारों हैती वासियों के कानूनी अधिकार दांव पर लग गए हैं। इस निर्णय से प्रभावित समुदाय के लोगों में भारी निराशा और भय का माहौल देखा जा रहा है।

सामाजिक और कूटनीतिक प्रभाव

इस अदालती आदेश के बाद पूरे देश में फैले पीड़ित अब चर्चों, रिश्तेदारों और अपने कार्यस्थलों से समर्थन मांग रहे हैं। न्यूयॉर्क में रेस्तरां श्रृंखला के मालिक ज्यां मार्सेलिन ने बताया कि कानूनी स्थिति समाप्त होने के कारण अब आश्रय और भोजन प्रदान करने के लिए सामुदायिक मदद तथा चर्चों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इस अदालती रुख ने मानवीय दृष्टिकोण से भी सामाजिक व्यवस्था के सामने शरणार्थियों पर संकट को काफी संवेदनशील बना दिया है।

दूसरी ओर इस फैसले से कूटनीतिक और राजनीतिक मोर्चे पर भी तनाव बढ़ गया है। हैती अमेरिकी रिपब्लिकन कॉकस के अध्यक्ष रेवरेंड डैनियल युलिस ने बताया कि रिपब्लिकन प्रशासन का समर्थन करने वाले कई लोग इस निर्णय से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक रुख इस मामले में बेहद कड़ा है जिसके कारण आव्रजन वकीलों के पास अब कानूनी विकल्पों के लिए फोन कॉल्स की बाढ़ आ गई है जो इस उपजे शरणार्थियों पर संकट को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।

"यदि आपके पास अब इस देश में रहने का कोई वैध कानूनी दर्जा नहीं बचा है, तो नियमों के तहत आपको अनिवार्य रूप से निर्वासित किया जाना ही तय है।" — स्टीफन मिलर, व्हाइट हाउस नीति उप प्रमुख एवं गृहभूमि सुरक्षा सलाहकार

आव्रजन वकीलों की चुनौतियां

वाशिंगटन के प्रसिद्ध आव्रजन वकील एलन ऑर ने स्पष्ट किया है कि कई वर्षों से यहां रह रहे लोगों के लिए अब अचानक अपने गृह देश लौटने का नया डर साबित करने वाले दस्तावेज़ जुटाना बेहद जटिल कार्य हो गया है। इन नागरिकों को इस बात का भी गहरा डर है कि यदि खतरनाक स्थितियों के कारण उन्हें सीधे उनके देश नहीं भेजा गया, तो उन्हें किसी ऐसे अनजाने देश में निर्वासित किया जाना ही तय है जिससे उनका कोई संबंध नहीं है।

इस अनिश्चितता के बीच नॉर्थ मियामी की सिटी क्लर्क वेनेसा जोसेफ ने सीनेट में लंबित एक नए विधेयक का हवाला देते हुए उम्मीद की किरण जताई है जो हैती वासियों को कानूनन टीपीएस संरक्षण प्रदान कर सकता है। हालांकि इस कानून का भविष्य अभी पूरी तरह अनिश्चित है जिसके कारण प्रभावितों के जीवन में तनाव बना हुआ है। इस कानूनी लड़ाई के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखा शरणार्थियों पर संकट अब मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। आव्रजन नियमों, टीपीएस सुरक्षा और अदालती फैसलों की नवीनतम तथा सटीक जानकारी के लिए केवल गृहभूमि सुरक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत आव्रजन वकीलों की सलाह को ही आधार मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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