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भव्य स्वर्णिम जैन मंदिर में गूंजे विश्व शांति महायज्ञ के मंत्र

ऐतिहासिक स्वर्णिम जैन मंदिर में भव्य धार्मिक अनुष्ठान और प्रतिष्ठा महोत्सव का शनिवार को बेहद हर्षोल्लास के साथ भव्य शुभारंभ हो चुका है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg धार्मिक अनुष्ठान और प्रतिष्ठा महोत्सव प्रारंभ

धार्मिक अनुष्ठान और प्रतिष्ठा महोत्सव प्रारंभ

कुचामनसिटी, राजस्थान। पुरानी धान मंडी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक श्री दिगंबर जैन नागौरी मंदिर में शनिवार से श्रीमज्जिनेंद्र भव्य वेदी प्रतिष्ठा एवं विश्व शांति महायज्ञ महोत्सव का आधिकारिक शुभारंभ हो गया है। लगभग एक सौ दस वर्षों से भी अधिक प्राचीन और समृद्ध इतिहास समेटे इस स्वर्णिम जैन मंदिर के महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए देशभर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे हैं। अपनी भव्य स्वर्ण कारीगरी, बारीक नक्काशी और अद्वितीय स्थापत्य कला के कारण यह पवित्र स्थान पूरे प्रदेश के प्रमुख जैन मंदिरों में अपनी एक विशेष पहचान रखता है। [1]

इस प्राचीन मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी अधिकांश कलात्मक और बारीक कारीगरी कुचामन के ही स्थानीय शिल्पकारों द्वारा पूरी निष्ठा से की गई है, जो इस ऐतिहासिक शहर की पारंपरिक कला का सबसे उत्कृष्ट और जीवंत उदाहरण है। स्वर्णिम जैन मंदिर के भीतर प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को चारों तरफ एक अद्भुत सुनहरी आभा के दर्शन होते हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार इसका भव्य गुंबद ही केवल एक किलोग्राम से अधिक शुद्ध सोने से पूरी तरह अलंकृत किया गया है।

भव्य धार्मिक अनुष्ठान

महोत्सव के पहले दिन शनिवार को सुबह के समय श्रीजी का विशेष अभिषेक एवं परम पवित्र शांतिधारा संपन्न की गई जिसके बाद पुरानी धानमंडी से शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होते हुए एक भव्य रथयात्रा एवं घटयात्रा निकाली गई। यह भव्य रथयात्रा महावीर भवन परिसर में जाकर संपन्न हुई जिसमें शामिल हजारों श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ जयघोष कर रहे थे। इसके तुरंत बाद प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए पारंपरिक रूप से ध्वजारोहण और विशाल मंडप उद्घाटन का कार्यक्रम आयोजित हुआ।

पूरा धार्मिक आयोजन पूज्य संत क्षीरसागर महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न कराया जा रहा है जिसके तहत यागमंडल विधान, संगीतमय महाआरती और सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। दोपहर सवा चार बजे अष्टकुमारियों द्वारा विधि-विधान से वेदी शुद्धि की धार्मिक क्रिया भी संपन्न की गई। इस ऐतिहासिक महोत्सव में स्थानीय शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से भी बहुत बड़ी संख्या में समाज बंधु अपनी गहरी आस्था के साथ इस भव्य स्वर्णिम जैन मंदिर में सम्मिलित हुए हैं।

ऐतिहासिक स्वर्ण जड़ाई

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद झांझरी ने बताया कि राजा-महाराजाओं के प्राचीन जमाने का यह भव्य मंदिर अपनी बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। वर्तमान समय में मंदिर परिसर के भीतर चल रहे आधुनिक स्वर्ण जड़ाई कार्य में अब तक दो किलोग्राम से भी अधिक सोने का उपयोग किया जा चुका है और इस पूरी कलात्मक प्रक्रिया में करीब तीन करोड़ रुपए की राशि खर्च हो चुकी है। इस कार्य के पूर्ण होने से यह स्वर्णिम जैन मंदिर अपनी भव्यता से सबको आकर्षित कर रहा है।

यहाँ पिछले एक वर्ष से लगातार स्वर्ण जड़ाई का कार्य कर रहे स्थानीय कारीगर राजकुमार कुमावत और दर्शन के लिए आए श्रद्धालु अजित पहाड़िया ने बताया कि इस तरह की अद्भुत स्वर्ण जड़ाई और बारीक नक्काशी वाला भव्य मंदिर पूरे क्षेत्र में कहीं और दिखाई नहीं देता है। यह मंदिर अपनी अद्वितीय स्वर्णिम भव्यता, ऐतिहासिक महत्व और गहरी धार्मिक आस्था के कारण आज पूरे क्षेत्र की एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

विश्वशांति महायज्ञ आयोजन

महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को दैनिक अभिषेक एवं शांति धारा के मुख्य कार्यक्रम के पश्चात भव्य हवन एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद मंदिर परिसर में नवनिर्मित एवं मुख्य वेदियों में मूलनायक भगवान एवं श्रीजी विराजमान का मुख्य कार्यक्रम पूर्ण धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न होगा जिसे लेकर समाज जनों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस भव्य आयोजन को लेकर पूरे कस्बे को सजाया गया है जिससे इस स्वर्णिम जैन मंदिर की सुंदरता और बढ़ गई है।

स्थानीय श्रद्धालु वर्षा जैन ने बताया कि यह पवित्र स्थान केवल जैन समाज की ही नहीं, बल्कि सभी समुदायों की गहरी आस्था का एक प्रमुख केंद्र है जहाँ दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। महोत्सव के मीडिया प्रभारी अंकुर काला ने बताया कि इस दो दिवसीय भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए ट्रस्ट की ओर से सुरक्षा और आवास की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

"वर्तमान में चल रहे स्वर्ण जड़ाई कार्य में अब तक 2 किलो से ज्यादा सोना लग चुका है और करीब 3 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। मंदिर की अधिकांश कलात्मक कारीगरी कुचामन के स्थानीय शिल्पकारों द्वारा की गई है।" — विनोद झांझरी, अध्यक्ष श्री दिगंबर जैन नागौरी मंदिर ट्रस्ट

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक आयोजनों में स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा नियमों का पालन अवश्य करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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