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बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह में शुरू हुआ नया शैक्षणिक सत्र

भीलवाड़ा में संचालित सेवाश्रम बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह एवं विशेष विद्यालय में शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ प्रवेश उत्सव के रूप में उत्साह के साथ हुआ।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह में नए सत्र का आगाज

बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह में नए सत्र का आगाज

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को शिक्षा, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित सेवाश्रम बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह एवं विशेष विद्यालय में शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ उत्साह, उल्लास और आत्मीयता के वातावरण में हुआ। विद्यालय ने अपने तीसरे शैक्षणिक अध्याय की शुरुआत प्रवेश उत्सव के रूप में मनाते हुए विशेष बच्चों का पारंपरिक भारतीय संस्कृति के अनुरूप स्वागत किया। इस अवसर पर पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जहां बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के चेहरों पर नई उम्मीद साफ दिखाई दी।

पारंपरिक रूप से स्वागत

नए सत्र में विद्यालय ने बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह हॉस्टल में निवासरत पंद्रह बच्चों सहित कुल चौवन विशेष बच्चों के साथ अपनी शैक्षणिक गतिविधियों का शुभारंभ किया। पहले ही दिन विद्यालय पहुंचे सभी बच्चों का अध्यापकों ने कुमकुम का तिलक लगाकर, गुड़ खिलाकर तथा स्नेहपूर्वक स्वागत किया। बच्चों के हाथों में रंग-बिरंगे स्टेशनरी गिफ्ट पैकेट सौंपे गए, जिससे उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया। विद्यालय परिवार का उद्देश्य था कि बच्चों के मन में स्कूल के प्रति अपनापन विकसित हो।

प्रवेश उत्सव के दौरान संस्था की कोषाध्यक्ष प्रेमलता ओझा ने बच्चों व उनके अभिभावकों का मुंह मीठा करवाने के लिए आइसक्रीम और चॉकलेट वितरित की, जिससे बच्चों के चेहरे खिल उठे। स्कूल आने को लेकर जितना उत्साह बच्चों में था, उतना ही जोश अध्यापकों में भी नजर आया। विद्यालय प्रबंधन ने इस सत्र से अनुशासन और एकरूपता की नई मिसाल पेश करते हुए सभी अध्यापकों के लिए विशेष ड्रेस कोड अनिवार्य कर दिया है जिससे विद्यालय का माहौल और बेहतर नजर आने लगा है।

अनुशासन की मिसाल

प्रधानाचार्य आशा काबरा ने बताया कि विद्यालय की पूरी टीम नई सोच, नई योजना और नए लक्ष्यों के साथ इन विशेष बच्चों के पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वर्तमान में स्कूल और हॉस्टल में नए प्रवेश के लिए लगातार अभिभावक संपर्क कर रहे हैं। इस गरिमामयी प्रवेश उत्सव के अवसर पर प्रधानाचार्य आशा काबरा, कोषाध्यक्ष प्रेमलता ओझा, शिक्षिका निहारिका तोषनीवाल, विनीता चौधरी, दिव्या चौधरी, खुशी कुमारी, केयरटेकर अपर्णा सामंत, स्पीच थैरेपिस्ट लक्ष्मी पाल एवं जिम्नास्टिक कोच राहुल सुवालका सहित पूरा स्टाफ उपस्थित रहा।

यह सेवाश्रम बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह समाज के जरूरतमंद बच्चों को एक सुरक्षित और ज्ञानवर्धक माहौल प्रदान करने के लिए लगातार बेहतर प्रयास कर रहा है। नए सत्र के दौरान शिक्षकों ने खेलकूद और विशेष थेरेपी की नई रूपरेखा भी तैयार की है। विद्यालय प्रशासन का मानना है कि सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास से इन विशेष बच्चों के भीतर छुपी हुई अद्वितीय प्रतिभा को बाहर लाया जा सकता है, जिससे वे भविष्य में स्वावलंबी बनकर सम्मानजनक जीवन जी सकें।

नई योजनाएं तैयार

आगामी दिनों में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक और खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। इस विशेष विद्यालय और बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह के प्रति भीलवाड़ा शहर के दानदाताओं और जागरूक नागरिकों ने भी अपनी गहरी रुचि दिखाई है और वे लगातार संस्थान की गतिविधियों में अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं। अभिभावकों ने भी पहले दिन की सुंदर व्यवस्थाओं को देखकर विद्यालय प्रबंधन की सराहना की और आभार व्यक्त किया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। विशेष शिक्षण संस्थानों और आवासीय हॉस्टल में प्रवेश प्रक्रिया, नियमों तथा सुविधाओं के संबंध में सेवाश्रम बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह एवं विशेष विद्यालय प्रबंधन द्वारा जारी की गई आधिकारिक नियमावली ही अंतिम व सर्वमान्य होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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