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क्रिप्टो पर आरबीआई का रुख सख्त:  विदेशी एक्सचेंजों पर जताई चिंता 

क्रिप्टो पर आरबीआई का रुख साफ हो गया है और केंद्रीय बैंक ने प्रतिबंध का समर्थन किया है क्योंकि देश में टैक्स चोरी और वित्तीय स्थिरता का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, दिल्ली। क्रिप्टो पर आरबीआई का रुख एक बार फिर पूरी तरह साफ हो गया है जिससे बाजार में खलबली मच गई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने साफ तौर पर कहा है कि देश में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। केंद्रीय बैंक का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी के अनियंत्रित रहने से देश की मौद्रिक संप्रभुता और वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। सरकार अभी तक इस पर कोई अंतिम नीति नहीं बना पाई है। [1]

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार देश के भीतर कई प्रमुख एजेंसियां इन डिजिटल संपत्तियों पर सख्त नियंत्रण लगाने के पक्ष में खड़ी नजर आ रही हैं। साल दो हजार अठारह में अदालत द्वारा केंद्रीय बैंक के पुराने प्रतिबंध को हटाने के बाद से भारत में क्रिप्टोकरेंसी एक ग्रे जोन में काम कर रही है। हालांकि सरकार ने अभी तक इस पर कोई अंतिम नीति लागू करने वाला कोई नया कानून संसद में पेश नहीं किया है।

बढ़ता वित्तीय जोखिम

क्रिप्टो पर आरबीआई का रुख इसलिए सख्त है क्योंकि विदेशी एक्सचेंजों के माध्यम से होने वाले लेनदेन पर नजर रखना बेहद मुश्किल काम है। वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक दोनों ही इस बात से चिंतित हैं कि बिना किसी ठोस नियम के लगातार हो रहा यह व्यापार घरेलू बैंकिंग प्रणाली को भी नुकसान पहुँचा सकता है। केंद्रीय बैंक चाहता है कि सभी वित्तीय संस्थानों को इन संपत्तियों से दूर रखा जाए।

ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब उनतालीस मिलियन लोग डिजिटल संपत्तियों में व्यापार कर रहे हैं जिनके पास अरबों डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी मौजूद है। अधिकारियों का मानना है कि इस वैश्विक बाजार में आने वाले उतार चढ़ाव से भारतीय निवेशकों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। चीन जैसे देशों ने पहले ही इस तरह के सभी टोकन पर पूरी तरह रोक लगा रखी है।

टैक्स चोरी का खतरा

क्रिप्टो पर आरबीआई का रुख इस बात को लेकर भी कड़ा है कि बड़े पैमाने पर लोग अपनी कमाई को टैक्स रिटर्न में छुपा रहे हैं। आयकर विभाग की जांच में सामने आया है कि लाखों लोगों ने अपने लेनदेन की सही जानकारी सरकार को नहीं दी है। विदेशी वॉलेट और निजी माध्यमों से होने वाले व्यापार के कारण असली मालिकों की पहचान करना और टैक्स वसूलना मुश्किल हो गया है।

सरकार वर्तमान में इन संपत्तियों से होने वाले लाभ पर तीस प्रतिशत की दर से भारी टैक्स वसूलती है। इसके बावजूद मानक मूल्यांकन प्रक्रिया न होने से कर निर्धारण की प्रक्रिया बहुत पेचीदा बनी हुई है। कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय अब इन वर्चुअल संपत्तियों के लिए नए लेखांकन मानक तैयार करने पर विचार कर रहा है ताकि पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार अत्यधिक जोखिमों और सरकारी नीतियों के अधीन है इसलिए किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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