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एच-1बी वीजा प्रोग्राम के दुरुपयोग पर अब कसेगा शिकंजा

एच-1बी वीजा प्रोग्राम में धोखाधड़ी रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने विदेशी कंपनियों के खिलाफ दर्जनों जांच और समन जारी कर सख्त रुख अपनाया है।

By अजय त्यागी
1 min read
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

वाशिंगटन, अमेरिका। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी कंपनियों द्वारा स्थानीय कामगारों के हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच एच-1बी वीजा प्रोग्राम को लेकर एक बड़े अभियान की घोषणा की है। विस्कॉन्सिन के मिलवाकी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि श्रम विभाग ने इस व्यवस्था का दुरुपयोग करने वाली बाहरी संस्थाओं के खिलाफ दर्जनों समन जारी कर व्यापक जांच शुरू कर दी है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार अब इस रोजगार आधारित प्रणाली में होने वाले किसी भी फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं करेगी। [1]

नया अभियान

वेंस ने स्पष्ट किया कि वर्तमान अमेरिकी प्रशासन का यह नया कदम करदाताओं के पैसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ रोजगार प्रणालियों को पारदर्शी बनाने के बड़े प्रयासों का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि एच-1बी वीजा प्रोग्राम का मूल उद्देश्य दुनिया भर के बेहतरीन वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और डॉक्टरों को देश में काम करने का अवसर देना था। लेकिन वर्तमान समय में कई बड़ी कारपोरेट कंपनियां और विदेशी तत्व इस पूरी कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

विदेशी संस्थाएं इस वैध प्रणाली की कमियों का फायदा उठाकर कम वेतन पर कर्मियों की भर्ती कर रही हैं जिससे अमेरिकी कामगारों के वेतन और रोजगार के अवसरों पर सीधा बुरा असर पड़ रहा है। उपराष्ट्रपति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो भी कंपनियां या संगठन इस एच-1बी वीजा प्रोग्राम का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास करेंगे उन्हें देश में काम करने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। सरकार का यह सख्त रुख स्थानीय बाजार में रोजगार के समान अवसर बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

बढ़ता संकट

हालांकि इस नए प्रशासनिक आदेश में जांच के दायरे में आने वाली विशिष्ट कंपनियों, देशों या व्यक्तियों के नामों का कोई स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया है और न ही उन कानूनी आधारों की विस्तृत जानकारी दी गई है। यह एच-1बी वीजा प्रोग्राम अमेरिकी नियोक्ताओं को मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने की कानूनी अनुमति देता है। इस कार्रवाई का सीधा असर कई वैश्विक तकनीकी सेवा प्रदाताओं पर पड़ने की आशंका है।

वैश्विक स्तर पर भारत इस रोजगार प्रणाली का लाभ उठाने वाला अब तक का सबसे बड़ा स्रोत देश रहा है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों के अनुसार कुल स्वीकृत आवेदनों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही है जिसमें प्रमुख भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां और बड़े अमेरिकी तकनीकी संस्थान शामिल हैं। इस नए कड़े कदम से आने वाले समय में वैश्विक आईटी उद्योग की भर्ती प्रक्रियाओं और आउटसोर्सिंग मॉडल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

कड़ा रुख

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि देश के भीतर उपलब्ध रोजगार पर पहला अधिकार स्थानीय नागरिकों का होना चाहिए न कि अनुचित लाभ उठाने वाले बाहरी तत्वों का। अमेरिकी श्रम विभाग इस एच-1बी वीजा प्रोग्राम के तहत होने वाली धोखाधड़ी के खिलाफ पूरी ताकत से कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। सरकार इस बात की गहन समीक्षा कर रही है कि कंपनियां नियमों के तहत ही कुशल पेशेवरों की सेवा ले रही हैं या केवल कम लागत के लिए इस मार्ग को चुन रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई जांच के कारण आने वाले महीनों में वीजा संबंधी नियमों और पात्रता मानदंडों को और अधिक कड़ा किया जा सकता है। यह नीति उन कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी जो अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भर रहती हैं। ट्रंप प्रशासन के इस सख्त रुख से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुशल पेशेवरों के आवागमन और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अमेरिका में एच-1बी वीजा नियमों में किए गए बदलावों, श्रम विभाग की जांच और इसके वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए यह सामग्री प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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