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ईरान पर हमलों के बाद ट्रम्प की बड़ी चेतावनी, भुगतना होगा परिणाम

ईरान पर हमलों के तुरंत बाद ट्रम्प की बड़ी चेतावनी सामने आई है जिसमें उन्होंने कड़े लहजे में कहा है कि किसी भी नए दुस्साहस का अंजाम और बुरा होगा।

By अजय त्यागी
1 min read
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप

वाशिंगटन, अमेरिका। अमेरिकी हमलों के बाद ट्रम्प की बड़ी चेतावनी सामने आई है जिसके कारण खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच तनाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हवाई हमले किए हैं। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ये हमले खाड़ी क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन को सुरक्षित रखने और ईरान को उसकी आक्रामकता के लिए जिम्मेदार ठहराने के लिए किए गए हैं। [1]

सैन्य एक्शन

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह से नष्ट करना है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई कमांडर इन चीफ के सीधे निर्देशों के बाद शुरू की गई है। लगातार दूसरे दिन की गई इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद ट्रम्प की बड़ी चेतावनी सामने आई है जिससे दोनों देशों के बीच तनाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में संकट गहरा गया है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन हमलों ने ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित बंदर अब्बास, सिरीक और चाबहार जैसे कई प्रमुख सैन्य ठिकानों को बुरी तरह दहला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से आई ट्रम्प की बड़ी चेतावनी ने साफ कर दिया है कि यदि ईरान ने भविष्य में वाणिज्यिक जहाजों पर दोबारा हमला किया तो इसका अंजाम इससे भी ज्यादा बुरा होगा। उन्होंने वाशिंगटन लौटते समय संवाददाताओं से कहा कि ईरानी प्रशासन अब बेहद व्याकुलता से नया समझौता करना चाहता है।

आर्थिक चोट

यह ताजा सैन्य कार्रवाई पूर्व में किए गए अस्सी से अधिक अमेरिकी हवाई हमलों की तुलना में काफी व्यापक और आक्रामक बताई जा रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार इन हमलों में फारस की खाड़ी के आसपास बने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करने और ईरान की ताकत को कमजोर करने के लिए इस ऑपरेशन के तहत तटीय रडार सिस्टम को नष्ट किया गया है।

वाशिंगटन पोस्ट ने सेंट्रल कमांड के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के हवाई रक्षा तंत्र, कमांड नेटवर्क और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी साठ से अधिक छोटी नावों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की अनुमति देने वाले लाइसेंस को भी तुरंत रद्द कर दिया है। इसके बाद जारी हुई ट्रम्प की बड़ी चेतावनी ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

बाजार हलचल

दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है जिसके कारण वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में होने वाले किसी भी सैन्य गतिरोध या यातायात व्यवधान का सीधा असर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, जहाजों के परिवहन शुल्क और वैश्विक आपूर्ति पर पड़ता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए इस मार्ग पर बढ़ती सैन्य आक्रामकता आर्थिक रूप से बेहद चिंताजनक साबित हो सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने भरोसा जताया है कि यह नई सैन्य कार्रवाई बहुत जल्द समाप्त हो जाएगी और इससे व्यापारिक मार्ग पहले से अधिक सुरक्षित हो जाएंगे। हालांकि इस भीषण सैन्य कार्रवाई के बाद आई ट्रम्प की बड़ी चेतावनी पर ईरान ने अभी तक अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन खाड़ी देशों ने सुरक्षा बढ़ा दिया है। वैश्विक बाजार के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि यह टकराव जल्द शांत नहीं हुआ तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट और गंभीर मंदी का खतरा बढ़ जाएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। खाड़ी क्षेत्र में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव, हवाई हमलों तथा इसके वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों को समझने के लिए यह विश्लेषण प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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