भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर आईएमएफ ने लगाई मुहर
भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट संकट के बाद भी पूरी तरह मजबूत और गतिशील बनी रहेगी।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
वाशिंगटन, अमेरिका। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी ताजा रिपोर्ट में वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिरता की सराहना की है। आईएमएफ के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह मजबूत बनी हुई है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार संस्था ने वर्ष दो हजार छब्बीस के लिए देश की विकास दर का अनुमान मामूली रूप से घटाकर छह दशमलव चार प्रतिशत किया है लेकिन अगले वर्ष इसमें मजबूत वापसी की उम्मीद जताई है। [1]
आर्थिक वृद्धि
आईएमएफ ने अपने वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट में बताया कि घरेलू मांग में लगातार हो रही बढ़ोतरी और मजबूत आंतरिक व्यापारिक गतिविधियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिल रहा है। हालांकि चालू वर्ष में ऊर्जा संकट के कारण विकास की गति थोड़ी धीमी जरूर रह सकती है लेकिन वर्ष दो हजार सत्तावीस में इसमें शून्य दशमलव दो प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अधिकारियों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भी भारत ने अन्य देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है।
मुद्रा कोष के शोध विभाग के अनुसार वर्तमान में दो अलग विपरीत ताकतें वैश्विक बाजार को प्रभावित कर रही हैं। एक तरफ जहां हालिया आर्थिक आंकड़ों में भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी लचीलापन और मजबूती देखने को मिली है वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का दबाव भी साफ दिख रहा है। जुलाई अपडेट के आधार पर यह माना जा रहा है कि ईंधन की कीमतों में होने वाली यह वृद्धि चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की विकास दर को मामूली रूप से प्रभावित कर सकती है।
वैश्विक प्रभाव
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले वर्ष तक ऊर्जा क्षेत्र का यह दबाव पूरी तरह से कम हो जाएगा जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था साढे छह प्रतिशत की मध्यम अवधि की विकास दर को आसानी से हासिल कर लेगी। आईएमएफ ने वैश्विक विकास दर का अनुमान वर्ष दो हजार छब्बीस के लिए तीन प्रतिशत पर बरकरार रखा है। संस्था का कहना है कि दुनिया ने मिडिल ईस्ट के संकट का सामना उम्मीद से बेहतर तरीके से किया है जिससे वैश्विक स्तर पर बड़ी मंदी का खतरा फिलहाल टल गया है।
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक परिदृश्य इस समय तकनीकी निवेश और ऊर्जा संकट के प्रभाव के बीच झूल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में हो रहे भारी निवेश के कारण कई देशों को अपनी आर्थिक क्षति को कम करने में मदद मिल रही है। हालांकि आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यदि खाड़ी देशों में तनाव दोबारा बढ़ता है तो इससे कच्चे तेल की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाएगा।
तेल संकट
भारत अपनी जरूरत का अस्सी प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले किसी भी बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में होने वाले किसी भी व्यवधान से देश के भीतर माल ढुलाई की लागत और घरेलू ईंधन की कीमतें बढ़ जाती हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत लगातार अपनी आंतरिक विनिर्माण क्षमता और तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटा हुआ है।
आईएमएफ की उप निदेशक ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में आने वाले समय में एक बेहतर सुधार देखने को मिल सकता है। भारत जैसे बड़े विकासशील देश वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से अपनी स्थिति को मजबूत बनाए हुए हैं। भले ही निकट भविष्य में कुछ आर्थिक जोखिम बने हुए हैं लेकिन मजबूत बुनियादी सिद्धांतों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी प्रणालियों में अपनी स्थिति को सुरक्षित रखेगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्ट, भारतीय अर्थव्यवस्था की अनुमानित विकास दर और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के आर्थिक प्रभावों को समझने के लिए यह सामग्री प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।