महामारी के बीच हड़ताल की चेतावनी, इबोला का प्रकोप जारी
कांगो में घातक इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। महामारी के बीच अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों ने वेतन न मिलने पर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
हड़ताल की सांकेतिक चेतावनी
बूनिया, कांगो। लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के उत्तर-पूर्वी हिस्से में इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। इस भयानक स्वास्थ्य संकट के बीच अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों ने तीन प्रमुख उपचार केंद्रों के बाहर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का साफ कहना है कि उन्हें इस जोखिम भरे काम के लिए लंबे समय से पूरा बकाया वेतन नहीं दिया गया है। रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी आंकड़ों ने बताया है कि करीब दो महीने पहले घोषित हुए इस वायरस से अब तक 1759 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 600 मरीजों की मौत हो चुकी है। [1]
बढ़ता संकट
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि इबोला का प्रकोप फैलाने वाले इस दुर्लभ स्वरूप का संक्रमण लगातार जारी है। यह खतरनाक वायरस संक्रमित होने वाले 30 से 50 प्रतिशत मरीजों की जान ले लेता है और वर्तमान में इसका कोई टीका या पुख्ता इलाज उपलब्ध नहीं है। सबसे ज्यादा प्रभावित इतूरी प्रांत की राजधानी बूनिया में दर्जनों चिकित्सा दल उपचार केंद्रों के बाहर अपनी मांगों को लेकर जमा हुए। पुलिस ने इनमें से एक केंद्र के बाहर हो रहे उग्र प्रदर्शन को तितर-बितर कर दिया है।
स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर काम्बा ने पत्रकारों से बातचीत में स्वीकार किया है कि मानव संसाधन प्रबंधन और वेतन सूची को अपडेट करने में गंभीर तकनीकी समस्याएं आई हैं। इसके कारण ही स्वास्थ्य कर्मियों के भुगतान में देरी हो रही है। अफ्रीका की शीर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी अब कांगो प्रशासन के साथ मिलकर अग्रिम पंक्ति के कर्मियों को जल्द से जल्द भुगतान करने की कोशिशों में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि इस भीषण संकट में चिकित्सा कर्मियों का मनोबल बनाए रखना देश के लिए बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य कर्मियों की मांग
अफ्रीका सीडीसी ने कांगो को इबोला का प्रकोप रोकने के लिए लगभग बीस लाख डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य कर्मियों के इस रुके हुए वेतन का भुगतान करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि जो कर्मचारी वर्तमान में काम ठप कर हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं, उनके साथ गंभीर बातचीत चल रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि उपचार केंद्रों में अभी तक कोई बड़ी हड़ताल शुरू नहीं हुई है।
स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रांतीय गवर्नर को लिखे एक पत्र में शिकायत की है कि 15 मई को महामारी की शुरुआत के बाद से उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला है। इसके कारण उनके परिवारों को गंभीर सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का यह भी तर्क है कि इस महामारी के जोखिम और भारी काम के बोझ को देखते हुए मिलने वाला दैनिक भत्ता बहुत कम है। उन्होंने भत्ते को बढ़ाने और उस पर टैक्स कटौती को तुरंत खत्म करने की मांग की है।
महामारी का खतरा
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यदि स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर जाते हैं, तो देश में इबोला का प्रकोप पूरी तरह बेकाबू हो सकता है। बिना इलाज और देखभाल के मरीजों की मृत्यु दर में अचानक भारी उछाल आने की आशंका बढ़ जाएगी। बूनिया शहर के अस्पतालों में वर्तमान में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और संसाधन पहले से ही सीमित हैं। सरकार इस संवेदनशील समय में वित्तीय विवादों को सुलझाकर चिकित्सा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने का हर संभव प्रयास कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी कांगो के इस संकट पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और अतिरिक्त मदद भेजने की तैयारी कर रही हैं। आने वाले कुछ दिन कांगो के स्वास्थ्य ढांचे और इस महामारी के नियंत्रण के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। यदि अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो देश में एक बड़ी मानवीय त्रासदी खड़ी हो सकती है। प्रशासन इस आर्थिक और स्वास्थ्य संकट का एक सर्वमान्य समाधान निकालने के लिए लगातार बैठकें कर रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कांगो में फैले इबोला वायरस, स्वास्थ्य कर्मियों के विरोध प्रदर्शन और स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभावों को इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।