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किम जोंग उन का कड़ा रुख: परमाणु ताकत का विस्तार करने की तैयारी

उत्तर कोरिया ने सेना के आधुनिकीकरण के लिए परमाणु ताकत का विस्तार करने का निर्णय लिया है। किम जोंग उन ने इसे वास्तविक शांति के लिए जरूरी बताया है।

By अजय त्यागी
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किम जोंग उन का कड़ा रुख

किम जोंग उन का कड़ा रुख

सियोल, दक्षिण कोरिया। उत्तर कोरिया ने अपनी सेना के व्यापक आधुनिकीकरण के तहत अपनी परमाणु ताकत का विस्तार गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों रूपों में करने के लिए नए बड़े उपायों को लागू करने का कड़ा फैसला किया है। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने राष्ट्रीय सेना को पूरी तरह से अपग्रेड करने का एक बड़ा आह्वान किया है। रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वहां की सरकारी मीडिया केसीएनए ने शुक्रवार को इस बात की आधिकारिक घोषणा की है। इस रणनीतिक बैठक में देश की रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। [1]

किम का फैसला

केसीएनए के अनुसार देश के सैन्य आधुनिकीकरण के ये नए उपाय और किम जोंग उन की ये टिप्पणियां सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के केंद्रीय सैन्य आयोग की एक बड़ी बैठक के दौरान सामने आई हैं। यह विस्तारित बैठक गुरुवार को आयोजित की गई थी जिसमें रक्षा तंत्र से जुड़े तमाम शीर्ष अधिकारी शामिल हुए थे। किम जोंग उन ने बैठक में साफ शब्दों में कहा कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा और उसकी वास्तविक शांति केवल एक ऐसी शक्तिशाली सेना के निर्माण से ही सुनिश्चित की जा सकती है जो सभी बाहरी खतरों को नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम हो।

बैठक में युद्ध प्रणालियों के तकनीकी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से नवीनीकृत करने और देश के सभी सैन्य ठिकानों को मानकीकृत तथा विशिष्ट बनाने की योजनाएं तय की गई हैं। इसके साथ ही देश की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्तियों यानी परमाणु ताकत का विस्तार करने के लिए विशेष रोडमैप तैयार किया गया है। उत्तर कोरिया अब अपनी इस घातक क्षमता को और अधिक आधुनिक बनाने पर निवेश बढ़ा रहा है। इस फैसले के बाद से पड़ोसी देशों और पश्चिमी रक्षा विश्लेषकों के बीच चिंता की लहर तेजी से दौड़ गई है।

सैन्य आधुनिकीकरण

बैठक के दौरान उत्तर कोरिया की मुख्य सैन्य खुफिया एजेंसी यानी टोही सामान्य ब्यूरो की भूमिका को भी व्यापक रूप से बढ़ाने पर चर्चा की गई है। एजेंसी की टोही क्षमता और खुफिया जानकारी जुटाने की शक्तियों में सुधार करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। इसके अतिरिक्त आधुनिक नौसैनिक अड्डों के निर्माण और देश के शिपयार्डों की क्षमता को अपग्रेड करने के मुद्दों पर भी गंभीरता से ध्यान दिया गया है। सरकारी मीडिया ने इसे नौसेना की स्थिति और उसकी भूमिका में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक बदलाव बताया है।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस खुफिया और नौसैनिक अपग्रेडेशन का सीधा मतलब यह है कि देश अब अपनी आक्रमण और रक्षा दोनों क्षमताओं को बराबर मजबूत कर रहा है। खुफिया तंत्र के मजबूत होने से देश की रणनीतिक तैयारियों को एक नया आधार मिलेगा। किम जोंग उन स्वयं इन सभी बदलावों की जमीनी प्रगति की निगरानी कर रहे हैं। इस कारण सरकार रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा अब केवल और केवल परमाणु ताकत का विस्तार करने और सेना को नई तकनीक से लैस करने में लगा रही है।

वैश्विक तनाव

इस नए घटनाक्रम ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में भू राजनीतिक तनाव को पहले से कहीं अधिक बढ़ा दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सरकारें उत्तर कोरिया के इस नए रुख पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार परमाणु ताकत का विस्तार करने का यह खुला ऐलान वैश्विक परमाणु अप्रसार संधि के प्रयासों को एक बहुत बड़ा झटका दे सकता है। आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया का अपनी सेना को लगातार आधुनिक बनाना उसकी आक्रामक और अडिग वैश्विक नीति को साफ दर्शाता है।

आने वाले दिन इस क्षेत्र की सुरक्षा और शक्ति संतुलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील साबित होने वाले हैं। वैश्विक मंचों पर उत्तर कोरिया के इस नए सैन्य कदम की कड़े शब्दों में निंदा शुरू हो गई है। फिर भी कांगो और अन्य देशों की तरह उत्तर कोरिया अपनी आंतरिक सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए आगे बढ़ रहा है। परमाणु ताकत का विस्तार करने के इस बड़े फैसले के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य शक्तिशाली देश इस सैन्य चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। उत्तर कोरिया द्वारा किए गए सैन्य आधुनिकीकरण, परमाणु नीति में बदलाव और इसके अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावों को इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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