चार सौ साल पुरानी रसिकप्रिया की दुर्लभ पांडुलिपि पन्ना में मिली
मध्य प्रदेश के पन्ना में ज्ञान भारतम् अभियान के तहत आचार्य केशवदास रचित रसिकप्रिया की चार सौ वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि मिलने से हड़कंप है।
दुर्लभ पांडुलिपि पन्ना में मिली
पन्ना, मध्य प्रदेश। राज्य में चल रहे ज्ञान भारतम् अभियान के तहत पन्ना जिले से भारतीय इतिहास और हिंदी साहित्य से जुड़ी एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। जिले के प्रसिद्ध श्री राम जानकी मंदिर में महाकवि आचार्य केशवदास द्वारा वर्ष 1591 ईस्वी में रचित प्रसिद्ध ग्रंथ रसिकप्रिया की दुर्लभ पांडुलिपि मिली है। इसे हिंदी साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर माना जा रहा है। अभियान के दौरान सैकड़ों वर्ष पुरानी कई अन्य पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज भी सामने आए हैं। [1]
रसिकप्रिया की खोज
पन्ना के श्री राम जानकी मंदिर में महाकवि आचार्य केशवदास की वर्ष 1591 ईस्वी में लिखी गई प्रसिद्ध कृति रसिकप्रिया की हस्तलिखित प्रति मिली है। रसिकप्रिया हिंदी साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में गिनी जाती है जिसमें श्रृंगार रस और काव्य सौंदर्य का विस्तृत वर्णन मिलता है। चार सौ वर्ष से अधिक पुरानी इस अनमोल रचना का सुरक्षित मिलना भारतीय सांस्कृतिक इतिहास के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस दौरान घरों और मंदिरों सहित जिले के 64 अलग अलग स्थानों से व्यापक खोज की गई।
इस अभियान के तहत करीब 300 से 400 वर्ष पुरानी कई अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरें और दस्तावेज मिले हैं। इनमें लगभग 220 वर्ष पुरानी श्रीमद्भागवत महापुराण की हस्तलिखित प्रति प्राचीन विश्व मानचित्र और कई दुर्लभ धार्मिक व ऐतिहासिक ग्रंथ शामिल हैं। इसके अलावा प्रणामी संप्रदाय जैन समुदाय और हिंदू धर्म से जुड़े भागवत गीता सहित कई महत्वपूर्ण हस्तलिखित ग्रंथ भी मिले हैं। इसी अभियान के दौरान जिले के एक शास्त्री परिवार के संग्रह से वर्ष 1915 का बाजीराव पेशवा से जुड़ा हस्तलिखित पत्र भी मिला है।
विरासत का डिजिटाइजेशन
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजीराव पेशवा का यह पत्र उस दौर के सामाजिक और प्रशासनिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा तत्कालीन राजाओं रियासतों और विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े कई दुर्लभ दस्तावेज भी खोजे गए हैं। ज्ञान भारतम् अभियान केवल पुरानी पांडुलिपियों की खोज तक सीमित नहीं है बल्कि उनका वैज्ञानिक संरक्षण भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। पन्ना कलेक्टर ने इन सभी अमूल्य ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन के लिए एक पांच सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है।
यह नवगठित समिति सभी ऐतिहासिक पांडुलिपियों को एकत्र कर उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी ताकि आने वाली पीढ़ियां इस अमूल्य विरासत से आसानी से जुड़ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पन्ना में मिली इस दुर्लभ पांडुलिपि और अन्य प्राचीन ग्रंथों का वैज्ञानिक संरक्षण किया गया तो भारतीय इतिहास साहित्य संस्कृति और प्राचीन ज्ञान पर नए शोध के रास्ते खुलेंगे। यह अद्भुत खोज न केवल भारत की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई पहचान देगी बल्कि पन्ना की ऐतिहासिक धरोहर को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करेगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पन्ना में ज्ञान भारतम् अभियान के तहत मिली प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों और दुर्लभ पांडुलिपि के काल निर्धारण व संरक्षण का कार्य अभी विशेषज्ञ समिति के अधीन जारी है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।