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फ्री ट्रेड डील पर भारत और कनाडा के बीच तीसरे दौर की वार्ता सफल

भारत और कनाडा के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। ओटावा में आयोजित तीसरे दौर की व्यापक कूटनीतिक वार्ता सकारात्मक रही है।

By अजय त्यागी
1 min read
तीसरे दौर की बातचीत सफलतापूर्वक संपन्न

तीसरे दौर की बातचीत सफलतापूर्वक संपन्न

नई दिल्ली, भारत: भारत और कनाडा ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते के लिए तीसरे दौर की बातचीत को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। ओटावा में आयोजित इस पांच दिवसीय बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा देने पर गहन चर्चा हुई है। समाचार एजेंसी आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार वाणिज्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर इस कूटनीतिक प्रगति की पुष्टि की है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की दूरदृष्टि के अनुरूप वर्ष दो हजार छब्बीस में दोनों देशों के मध्य इस महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। [1]

सकारात्मक प्रगति

फ्री ट्रेड डील पर इस कूटनीतिक वार्ता के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति देखी गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने आपसी व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर अपनी सहमति व्यक्त की है। पिछले महीने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी सेवन शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच वर्षों से लंबित पड़े इस आर्थिक मसौदे को शीघ्र पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक बयान में संकेत दिया था कि वे इस वर्ष कनाडा का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी इस यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हो जाएंगे। भारतीय नेतृत्व ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि दोनों देश तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में एक दूसरे के बड़े भागीदार बन सकते हैं। इन रणनीतिक क्षेत्रों पर आगामी समय में दोनों देशों के बीच बड़े स्तर पर चर्चा जारी रहेगी।

सुधारों की शुरुआत

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस आर्थिक समझौते को लेकर अपने देश की उत्सुकता और सकारात्मक दृष्टिकोण को साझा किया है। उन्होंने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को संपन्न करने की दिशा में बहुत अच्छी प्रगति कर रहे हैं। फ्री ट्रेड डील पर इस वार्ता की सफलता को दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों के एक त्वरित विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। दोनों पक्षों के नेताओं ने इस व्यापारिक साझेदारी को लेकर अपनी मजबूत उम्मीदें जताई हैं।

कनाडाई नेतृत्व के अनुसार भारत के साथ यह आर्थिक समझौता उनके देश के श्रमिकों और व्यवसायों के लिए एक गेम चेंजर साबित होने वाला है। ओटावा में भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री ने एक सार्वजनिक संदेश में इस बात को दोहराया था। कनाडा सरकार का मानना है कि भारत के साथ इस रणनीतिक आर्थिक भागीदारी के माध्यम से उनके देश के लिए एक विशाल और नया बाजार खुल जाएगा जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को संबल मिलेगा।

बाजार का विस्तार

यह आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लिए वाणिज्यिक रूप से अत्यधिक फायदेमंद साबित होने वाली है। भारत जहां कनाडाई बाजार में अपनी तकनीकी सेवाओं और कुशल कार्यबल के लिए नए अवसर तलाश रहा है वहीं कनाडा भी भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है। विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण तकनीक और कृषि उत्पादों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात शुल्क में भारी कमी आएगी।

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार आगामी दौर की वार्ता में नियमों को और अधिक सरल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दोनों देश आपसी विश्वास और साझा आर्थिक हितों के आधार पर एक मजबूत ढांचा तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस रणनीतिक प्रगति से न केवल द्विपक्षीय व्यापार पड़ेगा बल्कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी एक नई आर्थिक स्थिरता आएगी। व्यापारिक मंचों के अनुसार आगामी महीनों में संपन्न होने वाली इस फ्री ट्रेड डील से वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक नया और महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भारत और कनाडा के बीच जारी इस द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते और ओटावा वार्ता के संबंध में नए आधिकारिक नीतिगत बदलाव संभव हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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