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वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों की मौत की पुष्टि, प्रशासन ने जताया शोक

वियतनाम के तट पर एक दर्दनाक स्पीडबोट दुर्घटना में पंद्रह भारतीयों की मौत हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने इस बड़ी त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

By अजय त्यागी
1 min read
वियतनाम नाव हादसा

वियतनाम नाव हादसा

नई दिल्ली, भारत: वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व ने भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव के दुर्घटनाग्रस्त होने पर भारत सरकार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। इस दर्दनाक हादसे में कई निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है जिससे दोनों देशों में शोक की लहर दौड़ गई है। समाचार एजेंसी आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय मीडिया ने इस कूटनीतिक संदेश की आधिकारिक पुष्टि की है। वियतनामी प्रशासन ने इस जलप्रपात में हुई पंद्रह भारतीयों की मौत पर गहरा दुख प्रकट करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति प्रकट की है। [1]

बचाव अभियान की शुरुआत

यह भीषण दुर्घटना उस समय हुई जब बत्तीस भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक तेज रफ्तार स्पीडबोट समुद्र की ऊंची लहरों और खराब मौसम के कारण अन गियांग प्रांत के तट के पास पलट गई। इस नाव पर पर्यटकों के अलावा एक स्थानीय वियतनामी टूर गाइड और चालक दल के तीन सदस्य भी सवार थे। अचानक मौसम बिगड़ने के कारण यह पूरी नाव असंतुलित होकर समुद्र में समा गई जिससे बीचों बीच हड़कंप मच गया। इस घटना के तुरंत बाद स्थानीय तटीय सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया था।

स्थानीय मीडिया आउटलेट वियतनाम न्यूज के अनुसार इस भीषण जलप्रपात में पंद्रह भारतीयों की मौत की खबर से दोनों देशों के कूटनीतिक हलकों में मायूसी छा गई है। राहत कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उन्नीस लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। वर्तमान में दो भारतीय नागरिकों की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है और उन्हें गहन चिकित्सा उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम और प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग ने इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

मुआवजा और वित्तीय सहायता

वियतनामी नेताओं ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अलग अलग शोक संदेश भेजे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि देश के संबंधित अधिकारी युद्ध स्तर पर खोजबीन और बचाव अभियान चला रहे हैं। घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार सुनिश्चित कराने के साथ पीड़ित परिवारों को प्रशासनिक सहायता दी जा रही है। इस संकट की घड़ी में वियतनाम की सभी जांच एजेंसियां भारतीय दूतावास के साथ निरंतर समन्वय बनाए हुए हैं ताकि कानूनी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जा सके।

वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग ने भी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक विशेष संदेश भेजकर इस त्रासदी पर अपनी संवेदना व्यक्त की है। दूसरी ओर फू क्वोक विशेष क्षेत्र की पीपुल्स कमेटी के अध्यक्ष ट्रान मिन्ह खोआ ने बताया कि नाव के मालिक ने प्रत्येक मृतक के परिवार को एक हजार अमेरिकी डॉलर और प्रत्येक घायल यात्री को पांच सौ डॉलर का मुआवजा देने पर अपनी सहमति व्यक्त की है। इस वैश्विक हादसे में कई निर्दोष भारतीयों की मौत के बाद स्थानीय प्रशासन सुरक्षा मानकों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपना रहा है।

राजनयिक स्तर पर समन्वय

इसके अतिरिक्त अन गियांग प्रांत और स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को लगभग छब्बीस मिलियन वियतनामी डोंग की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। पुलिस अधिकारी और चिकित्सा दल पीड़ितों की पहचान सत्यापित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस दुखद मोड़ पर किसी भी अन्य पर्यटक पोत का इस तरह दुर्घटनाग्रस्त होना वैश्विक पर्यटन सुरक्षा के लिए एक बड़ा सबक है जिसके चलते समुद्री नियमों को और अधिक कड़ा करने पर विचार किया जा रहा है।

प्रशासनिक अधिकारी वर्तमान में भारतीय राजनयिक प्रतिनिधियों और पीड़ितों के परिवारों के साथ मिलकर सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर रहे हैं। वियतनाम सरकार का कहना है कि वे इस हादसे में मारे गए भारतीयों की मौत के बाद शवों को सम्मानपूर्वक भारत वापस भेजने या उनके रिश्तेदारों की इच्छा के अनुसार अन्य वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी समुद्री दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। वियतनाम के अन गियांग प्रांत में हुए इस बोट हादसे, मुआवजे की घोषणा और भारतीय नागरिकों के शवों को वापस लाने के संबंध में नए विवरण संभव हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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