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धार्मिक कावड़ यात्रा के लिए गंगोत्री रवाना हुआ शिवभक्तों का जत्था

सुख शांति और वैश्विक सद्भाव की मंगल कामना के साथ शिवभक्तों का एक विशेष जत्था गोमुख से पावन गंगाजल लाने के लिए कावड़ यात्रा पर पैदल रवाना हो गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
शिवभक्तों का जत्था गंगोत्री के लिए रवाना

शिवभक्तों का जत्था गंगोत्री के लिए रवाना

सीकर, राजस्थान। पर्यावरण और वैश्विक कल्याण की भावना को समेटे राधाकिशनपुरा स्थित मोडी कोठी से सोमवार को बीस शिवभक्तों का एक विशेष जत्था गंगोत्री के लिए रवाना हुआ। इस वर्ष आयोजित हो रही इस धार्मिक कावड़ यात्रा के प्रमुख सुरेश कुमार सैनी अन्ना लगातार सोलहवीं बार गोमुख से पैदल कावड़ लेकर लौटेंगे। सभी श्रद्धालु करीब एक हजार किलोमीटर की बेहद कठिन और दुर्गम पदयात्रा पूरी कर पावन गंगाजल लेकर वापस लौटेंगे और हर्षनाथ पहाड़ स्थित प्रसिद्ध मंदिर में भगवान शिव का भव्य जलाभिषेक करेंगे। [1]

संतों का मंगल आशीर्वाद

पालवास बगीची के परम पूज्य महाराज भगवान दास और अमरदास ने सभी शिवभक्तों को पारंपरिक दुपट्टा पहनाकर पुष्पवर्षा की और मंगल आशीर्वाद देकर यात्रा के लिए विदा किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र हर हर महादेव और बोल बम के गगनभेदी जयघोष से पूरी तरह गूंज उठा। वहां उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं और परिजनों ने भी शिवभक्तों का उत्साह बढ़ाया और उनकी सुरक्षित यात्रा की मंगल कामना की। यह पूरी पदयात्रा लगभग एक महीने की लंबी अवधि में पूरी की जाएगी।

इस यात्रा के माध्यम से सभी श्रद्धालु समाज परिवार और पूरे विश्व में आपसी सुख शांति और सद्भाव की कामना कर रहे हैं। यात्रा में शामिल रतनलाल सैनी ने बताया कि यह धार्मिक कावड़ यात्रा शारीरिक रूप से कठिन जरूर है लेकिन भोलेनाथ की भक्ति हर कठिनाई को बेहद आसान बना देती है। रास्ते भर सभी भक्त पूरी तरह भजन कीर्तन सेवा और कड़े अनुशासन के साथ आगे बढ़ते हैं जिससे उन्हें एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक सोच मिलती है।

प्राचीन मंदिर में रुद्राभिषेक

गणेश मंदिर के संत अमरदास महाराज ने बताया कि जब एक महीने बाद सभी शिवभक्त गंगोत्री से पवित्र जल लेकर लौटेंगे तो पूरे शहर में गाजे बाजे के साथ उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके बाद सीकर के ऐतिहासिक हर्ष पर्वत पर मौजूद शिवलिंग का उसी गंगाजल से रुद्राभिषेक किया जाएगा। हर्ष पर्वत पर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर देश के सबसे दुर्लभ और ऐतिहासिक देव स्थलों में से एक माना जाता है जहां भगवान शिव की पांच मुख वाली मूर्ति विराजित है।

हर वर्ष की तरह इस बार भी इस पूरी परंपरा को लेकर स्थानीय जनता में भारी उत्साह देखा जा रहा है। संतों का कहना है कि जब कावड़िया शहर की सीमा में प्रवेश करते हैं तो पूरा वातावरण पूरी तरह से शिवमय हो जाता है। इस पावन और धार्मिक कावड़ यात्रा की सफलता के लिए स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने भी मार्ग में सुरक्षा तथा विश्राम की पुख्ता व्यवस्थाएं की हैं ताकि सभी भक्तों की यह आध्यात्मिक यात्रा निर्विघ्न संपन्न हो सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट स्थानीय संवाददाताओं और प्राथमिक स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रस्तुत समाचार सीकर से गंगोत्री के लिए रवाना हुई कावड़ यात्रा और हर्ष पर्वत पर होने वाले जलाभिषेक से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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