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प्रसूताओं की दुखद मौतों के बाद मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू

सरकारी अस्पताल में प्रसूताओं की दुखद मौतों के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और सरकार द्वारा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू करवाई गई है।

By अजय त्यागी
1 min read
अस्पताल में जांच करते स्वास्थ्य मंत्री

अस्पताल में जांच करते स्वास्थ्य मंत्री

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। कोटा के सरकारी अस्पताल में प्रसूताओं की मौतों के बाद राज्य सरकार ने भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में सामने आए गंभीर मामलों को भी संज्ञान में लिया है। लगातार बढ़ते भारी जनाक्रोश, विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और सर्व समाज के आंदोलन के बीच मंगलवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर खुद भीलवाड़ा पहुंचे। उन्होंने महात्मा गांधी चिकित्सालय की मातृ एवं शिशु इकाई का आकस्मिक निरीक्षण किया। सरकार द्वारा इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की प्रक्रिया को अब काफी तेज कर दिया गया है ताकि सच सामने आ सके।

चिकित्सालय का निरीक्षण

मंत्री के सर्किट हाउस पहुंचने पर पुलिस जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. पूजा गंगराडे और अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने उनका स्वागत किया। अस्पताल पहुंचने पर नर्सेज यूनियन के पदाधिकारियों ने उनका अभिनंदन किया। इस दौरान मंत्री ने परिसर में फ्लोरेंस नाइटिंगेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया। इसके बाद चिकित्सा मंत्री ने मातृ एवं शिशु विभाग का विस्तृत निरीक्षण करते हुए ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा दस्तावेज तलब किए।

निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि जयपुर से आई विशेषज्ञ टीम इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन थिएटर कब बंद किया गया, उसका कल्चर सैंपल कब लिया गया और उसके बाद वहां कोई डिलीवरी हुई या नहीं, इन सभी बिंदुओं की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि मामले की उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तथ्यों के आधार पर विस्तृत जानकारी जनसंपर्क विभाग के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी।

पत्रकारों के तीखे सवाल

हालांकि, इस बातचीत के दौरान जब वहां मौजूद पत्रकारों ने चिकित्सकीय लापरवाही और दोषियों के खिलाफ संभावित दंडात्मक कार्रवाई को लेकर बेहद तीखे सवाल पूछे, तो चिकित्सा मंत्री बिना कोई टिप्पणी किए ही अचानक वहां से रवाना हो गए। मंत्री की इस चुप्पी ने अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता और जनता के गुस्से को देखते हुए जिला प्रशासन ने अस्पताल और कलेक्ट्रेट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा छावनी बना दिया है।

विदित रहे कि अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई में पिछले दिनों 4 प्रसूताओं सहित 5 महिलाओं की हुई मौतों के मामले ने पूरे राजस्थान में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल को बहुत तेज कर दिया है। आमजन, विभिन्न सामाजिक संगठन और मृतकों के पीड़ित परिजन अब इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि सरकार दोषियों के खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई करती है। जनता को पूरी उम्मीद है कि इस गंभीर मामले की उच्चस्तरीय जांच से दोषियों को सजा जरूर मिलेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भीलवाड़ा महात्मा गांधी चिकित्सालय में हुई प्रसूताओं की मौतों, चिकित्सा मंत्री के निरीक्षण और पत्रकारों के सवालों पर उनकी चुप्पी के बाद जारी प्रशासनिक जांच प्रक्रियाओं को रेखांकित करने के लिए इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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