WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

रूढ़िवादिता पर प्रहार: बेटा विदेश में बेटियों ने की मां की अंतिम विदाई 

मकराना में बेटे की अनुपस्थिति में तीन बेटियों ने पुरानी रूढ़ीवादी सोच को तोड़कर मां की अंतिम विदाई पूरे सम्मान से की और समाज को नया संदेश दिया।

By अजय त्यागी
1 min read
बेटियों ने की अपनी मां की अंतिम विदाई 

बेटियों ने की अपनी मां की अंतिम विदाई 

डीडवाना कुचामन, राजस्थान। जिले के मकराना में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला जिसने समाज में बेटियों की भूमिका को लेकर चली आ रही कई पुरानी धारणाओं को सीधी चुनौती दी है। यहाँ तीन सगी बेटियों ने सामाजिक बेड़ियों को दरकिनार करते हुए अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और पूर्ण विधि विधान से अंतिम संस्कार संपन्न किया। इस साहसिक कदम के कारण क्षेत्र में एक नई जागृति आई है और लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि मां की अंतिम विदाई का हक हर संतान को समान रूप से है। [1]

अचानक हुआ निधन

मूल रूप से गंगानगर के निवासी और वर्तमान में मकराना क्षेत्र में रह रहे भीम सिंह मौसून की धर्मपत्नी आशा देवी सोनी का रविवार देर शाम को आकस्मिक निधन हो गया था। निधन की सूचना मिलते ही पूरे परिवार और स्थानीय समाज में गहरी शोक की लहर दौड़ गई। उनका इकलौता बेटा रवि सोनी वर्तमान में रोजगार के सिलसिले में विदेश में रह रहा है। सूचना मिलने के तुरंत बाद भी वह लंबी दूरी के कारण अंतिम संस्कार के नियत समय तक मकराना पहुंचने में पूरी तरह असमर्थ रहा था।

ऐसी विकट परिस्थिति में परिवार की तीनों बेटियां पूनम, पूजा और लक्ष्मी खुद आगे आईं और सामाजिक परंपराओं की परवाह किए बिना अपनी मां की अंतिम यात्रा की पूरी जिम्मेदारी अपने मजबूत कंधों पर उठाई। इस दौरान बेटियों ने न केवल अपनी संतान होने के कर्तव्य का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया बल्कि समाज को यह बड़ा संदेश भी दिया कि माता पिता के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी का कोई लिंग नहीं होता। तीनों बेटियों ने मिलकर मां की अंतिम विदाई को ऐतिहासिक बना दिया।

परंपरा में बदलाव

आमतौर पर हमारे समाज की अंतिम यात्रा में अर्थी को कंधा देने और मुखाग्नि देने की मुख्य जिम्मेदारी केवल बेटे या पुरुष परिजनों की ही मानी जाती रही है। लेकिन इस जुझारू परिवार में बेटियों ने इस पुरानी परंपरा को समूल बदलते हुए अपनी मृत मां की अर्थी को कंधा दिया। इस भावुक यात्रा में तीनों बेटियों के साथ उनके दामाद भी अंतिम यात्रा में शामिल रहे। जब तीनों बहादुर बेटियां अपनी मां की अर्थी लेकर श्मशान घाट की ओर बढ़ीं तो वहां मौजूद हर इंसान की आंखें नम हो गईं।

इस घटना ने केवल एक परिवार की संवेदनाओं को ही नहीं झकझोरा बल्कि पूरे समाज के सामने एक नई प्रोग्रेसिव सोच भी पेश की है। वहां उपस्थित प्रबुद्ध लोगों ने बेटियों के इस अदम्य साहस और संवेदनशीलता की भूरि भूरि सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बेटे की कमी बिल्कुल महसूस नहीं होने दी। बेटियों ने अपने व्यावहारिक आचरण से यह साबित कर दिया कि बेटियां हर जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह सक्षम हैं और मां की अंतिम विदाई सम्मानपूर्वक कर सकती हैं।

पुरानी सोच बदली

बहादुर बेटियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके माता पिता ने जीवन में कभी भी बेटा बेटी में कोई भेदभाव नहीं किया था। उन्हें समाज में समान शिक्षा, ऊंचे संस्कार और पूरा सम्मान दिया गया था। ऐसे में अंतिम समय में वे अपने नैतिक कर्तव्य से पीछे कैसे हट सकती थीं। उनका साफ कहना था कि यदि माता पिता ने जीवनभर बेटियों को बेटों के समान अधिकार दिए हैं तो अंतिम विदाई का अधिकार भी बेटियों को उतना ही मिलना चाहिए जितना किसी बेटे को मिलता है।

श्मशान घाट तक का यह सफर केवल कुछ किलोमीटर की दूरी का नहीं था बल्कि सामाजिक सोच में बड़े बदलाव की दिशा में उठाया गया एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम भी था। इस अंतिम यात्रा में मकराना स्वर्णकार समाज सहित विभिन्न समाजों के लोग बहुत बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने बेटियों के इस साहसिक निर्णय की सराहना की और इसे समाज के लिए एक बड़ा सकारात्मक संदेश बताया। इस प्रकार बेटियों द्वारा अपनी मां की अंतिम विदाई बिना किसी बाधा के संपन्न की गई।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मकराना में तीन बेटियों द्वारा अपनी दिवंगत मां की अर्थी को कंधा देने, अंतिम संस्कार करने और सामाजिक रूढ़िवादिता में बदलाव के इस प्रेरक प्रसंग को रेखांकित करने के लिए इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
Source Source