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पाकिस्तानी जासूस पर बड़ा खुलासा, सेना और रेलवे थी निशाने पर

पाकिस्तानी जासूस की गिरफ्तारी से खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक वह सेना, नौसेना और रेलवे की जानकारी जुटाने भारत आया था, नेटवर्क की जांच जारी है।

By अजय त्यागी
1 min read
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

हाबरा, पश्चिम बंगाल। पाकिस्तानी जासूस राना रऊफ उर्फ़ वाहाब आलम को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा इलाके से गिरफ्तार किया गया है। राज्य पुलिस की STF की पूछताछ में सामने आया कि वह पाकिस्तान की ISI के लिए भारतीय सेना, नौसेना और रेलवे से जुड़ी जानकारी जुटाने के काम में लगाया गया था। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, आलम ने पूछताछ में बताया कि वह 2012 में भारत नेपाल सीमा के रास्ते देश में दाखिल हुआ था और इसके बाद पश्चिम बंगाल के अलग अलग इलाकों में ठिकाने बदलकर रहा। [1]

जांच का खुलासा

पूछताछ में आलम के भारत में लंबे समय तक रहने और लगातार ठिकाने बदलने की जानकारी सामने आई है। STF ने उसके पास से आधार कार्ड, PAN कार्ड और EPIC कार्ड जैसे फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक इन दस्तावेजों का इंतजाम दूसरे व्यक्ति मुहम्मद इजाज के जरिए किया गया था। इजाज को भी STF ने कोलकाता के टॉपसिया इलाके से गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी सामने आया कि हाबरा जाने से पहले आलम टॉपसिया में इजाज के घर पर रह रहा था।

पुलिस के मुताबिक पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद आलम ने टॉपसिया छोड़ दिया था। STF को शक है कि वह आगे बांग्लादेश भागने की तैयारी में था। इसी वजह से उसने हाबरा को ठिकाना बनाया, जो भारत बांग्लादेश सीमा के अपेक्षाकृत करीब है। फिलहाल आलम और इजाज से लगातार पूछताछ चल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों के संपर्क में राज्य के और कौन लोग थे और उनके बीच किस तरह की गतिविधियां चल रही थीं।

फर्जी कागजों का जाल

जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना भी है कि आलम ने पाकिस्तान में अपने कथित हैंडलरों तक अब तक किस तरह की जानकारी पहुंचाई। पुलिस उससे उन सूचनाओं के बारे में पूछताछ कर रही है जो उसने सेना, नौसेना और रेलवे से जुड़ी गतिविधियों के संबंध में जुटाई होंगी। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि उसने कितनी और किस स्तर की जानकारी साझा की। STF अब उसके संपर्कों, भारत में बने नेटवर्क और इजाज से उसके संबंधों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

फर्जी पहचान दस्तावेज मिलने से जांच का दायरा भी बढ़ गया है। आधार, PAN और EPIC जैसे दस्तावेजों के जरिए किसी विदेशी नागरिक ने भारतीय पहचान कैसे हासिल की, इसे लेकर भी सवाल हैं। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि दस्तावेज तैयार कराने में सिर्फ इजाज की भूमिका थी या कोई और व्यक्ति भी मदद कर रहा था। जांचकर्ताओं की नजर उन लोगों पर भी है जिनके जरिए आलम ने अलग अलग जगहों पर रहने और अपनी पहचान छिपाने का इंतजाम किया।

सुरक्षा पर सवाल

राज्य पुलिस के अनुसार पाकिस्तानी जासूस आलम की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उसके कथित नेटवर्क का है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि वह अकेले काम कर रहा था या उसके साथ और लोग भी जुड़े थे। पुलिस यह भी समझना चाहती है कि भारत में रहने के दौरान उसने किन इलाकों में आवाजाही की और किस तरह संपर्क बनाए। इस बीच STF दोनों आरोपियों से पूछताछ कर संभावित सहयोगियों और पाकिस्तान तक सूचना पहुंचाने के रास्तों की जानकारी जुटा रही है।

मामले पर राज्य की नगर निकाय और शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखने पर स्थानीय पुलिस थाने से तुरंत संपर्क किया जाना चाहिए। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान ऐसे तत्वों को पश्चिम बंगाल में अपनी जड़ें मजबूत करने का मौका मिला। हालांकि यह राजनीतिक आरोप है। फिलहाल जांच का मुख्य फोकस आलम के कथित जासूसी नेटवर्क और उससे जुड़ी जानकारी पर है।

पाकिस्तानी जासूस की गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल में फर्जी पहचान, सीमा के करीब बदलते ठिकानों और सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर नए सवाल खड़े किए हैं। STF अब यह जानने में जुटी है कि आलम ने भारत में रहते हुए कौन सी जानकारी जुटाई और उसे कथित तौर पर पाकिस्तान तक कैसे पहुंचाया। साथ ही उसके सहयोगियों की तलाश भी जारी है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल पाकिस्तानी जासूस से पूछताछ जारी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट में जांच एजेंसियों और पुलिस से जुड़े सूत्रों के दावों को आरोप और जांच के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है और इन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief