ISI का नया प्लान सामने आया, आतंकियों की कमान बदली
ISI का नया प्लान- आतंकी संगठनों की कमान अपने हाथ में ली है। रिपोर्ट में LoC पर घुसपैठ और स्थानीय भर्ती की रणनीति में बदलाव का दावा किया गया है।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। पाकिस्तान से संचालित आतंकी नेटवर्क के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव सामने आया है। खुफिया अधिकारियों के मुताबिक लश्कर ए तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन और जैश ए मोहम्मद की गतिविधियों पर अब उनके पुराने नेतृत्व की सीधी पकड़ कम हुई है। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की ISI ने तीनों संगठनों के संचालन पर निगरानी बढ़ाई है। अधिकारियों का कहना है कि ISI का नया प्लान इन संगठनों के बीच ज्यादा तालमेल बनाकर गतिविधियां चलाने पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। [1]
कमांड में बड़ा बदलाव
खुफिया जानकारी के मुताबिक अब एक ब्रिगेडियर और एक कर्नल तीनों आतंकी संगठनों के अभियानों की निगरानी कर रहे हैं। रिपोर्ट में ब्रिगेडियर इकबाल और कर्नल ओवैज के नाम सामने आए हैं। पहले तीनों संगठनों के अलग कमांड सेंटर और अलग ऑपरेशनल प्रमुख होते थे। अब घुसपैठ से जुड़े फैसलों पर ऊपर से मंजूरी की व्यवस्था बताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक इस बदलाव का मकसद अलग अलग संगठनों के बीच तालमेल बढ़ाना और संचालन को एक केंद्रीय दिशा देना है।
रिपोर्ट के मुताबिक पहले एक साथ 5 से 6 आतंकियों के सीमा पार घुसने की कोशिश करने की बात सामने आती थी। अब एक समूह में अलग अलग संगठनों से जुड़े 3 लोगों को भेजने की रणनीति बताई गई है। अधिकारियों का कहना है कि ISI का नया प्लान किसी एक संगठन की पहचान को सामने आने से रोकना और गतिविधियों में तालमेल बनाए रखना है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार सीमा के दूसरी तरफ 500 से ज्यादा आतंकियों के भारत में घुसने की प्रतीक्षा में होने की जानकारी पहले भी सामने आती रही है।
रणनीति में क्यों बदलाव
विशेषज्ञों के मुताबिक आतंकी संगठन मौजूदा सुरक्षा हालात में अपनी रणनीति को फिर से व्यवस्थित कर रहे हैं। उसाना्स फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. अभिनव पंड्या का कहना है कि कई संगठन फिलहाल कम सक्रिय दिख रहे हैं और अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं। उनके मुताबिक ISI का नया प्लान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे आतंकी संगठनों के प्रमुखों की पहचान और उनकी सीधी भूमिका को पीछे रखने की कोशिश हो सकती है। इससे हमलों की जिम्मेदारी और स्रोत को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश का खतरा बढ़ता है।
डॉ. पंड्या के मुताबिक पाकिस्तान की कोशिश ऐसी गतिविधियों में अपनी सीधी भूमिका को सामने आने से रोकने की हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की सुरक्षा नीति में बदलाव के बाद किसी आतंकी कार्रवाई को केवल सीमा पार हमला मानने के बजाय युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के लिए किसी भी हमले से सीधा जुड़ाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसानदायक हो सकता है। इसी वजह से कथित तौर पर पर्दे के पीछे से संचालन की रणनीति पर जोर है।
स्थानीय भर्ती पर भी नजर
अधिकारियों के मुताबिक रणनीति केवल LoC तक सीमित नहीं है। ISI जम्मू कश्मीर में स्थानीय युवाओं तक पहुंच बनाने और भर्ती बढ़ाने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट में दावा है कि इसके लिए अफगानिस्तान और अफ्रीका में मौजूद धार्मिक नेटवर्क के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि भर्ती के बाद युवाओं को अलग तरह की आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख तथ्यों में नहीं है।
खुफिया अधिकारियों के अनुसार इस पूरी रणनीति का एक मकसद हमले की स्थिति में पाकिस्तान से सीधा संबंध सामने आने से रोकना भी हो सकता है। ISI का नया प्लान इसलिए सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है क्योंकि इसमें संगठनों के पारंपरिक ढांचे के बजाय ज्यादा केंद्रीकृत निगरानी की बात सामने आई है। एजेंसियां अब इस बदलाव के साथ संभावित घुसपैठ, स्थानीय नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बढ़ा रही हैं। आगे की तस्वीर जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर और साफ होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट में खुफिया अधिकारियों और विशेषज्ञों के दावों को उनके संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है और इन दावों को किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।