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स्वास्थ्य बीमा सुधार से बदलेगा इलाज का खेल, क्लेम पर कसेगी लगाम

भारत में स्वास्थ्य बीमा सुधार की तैयारी तेज है। इलाज की दरें तय करने, क्लेम पारदर्शी बनाने और साझा एक्सचेंज से मरीजों को राहत की उम्मीद है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

भारत में स्वास्थ्य बीमा सुधार की तैयारी तेज है। इलाज की बढ़ती कीमत और स्वास्थ्य बीमा के जटिल क्लेम सिस्टम को आसान बनाने के लिए इलाज की दरों का मानक तय करने और देशभर में साझा क्लेम एक्सचेंज लाने पर विचार हो रहा है। Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, मामले से जुड़े 2 सूत्रों ने बताया कि नियामकों, अस्पतालों और उद्योग प्रतिनिधियों की समिति साल के अंत तक अपनी सिफारिश दे सकती है। मकसद मरीजों और बीमा कंपनियों के बीच विवाद घटाना और खर्च में पारदर्शिता बढ़ाना है। [1]

इलाज का रेट तय

भारत में मेडिकल महंगाई करीब 12% से 14% सालाना बताई जा रही है। इसका सीधा असर परिवारों की जेब पर पड़ता है। प्रस्तावित व्यवस्था में बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच इलाज की दरों का एक मानक तय किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इससे अलग अलग अस्पतालों में इलाज के लिए वसूली जाने वाली रकम को लेकर विवाद कम हो सकते हैं। उद्योग के अनुमान के मुताबिक स्वास्थ्य बीमा के 10% से 15% दावे अनुचित या फर्जी हो सकते हैं।

प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा सुधार में एक साझा स्वास्थ्य बीमा उत्पाद लाने की योजना भी शामिल है। सभी बीमा कंपनियों को मौजूदा योजनाओं के साथ ऐसा उत्पाद पेश करने के लिए कहा जा सकता है। जिसमें कई बीमारियों और इलाज की प्रक्रियाओं के लिए कवरेज तथा दरों को एक समान रखने की कोशिश होगी। इसके साथ ही बीमा में शामिल किए जाने वाले इलाज की एक समान सूची बनाने पर भी विचार है। इससे ग्राहक पॉलिसी खरीदते समय शर्तों को ज्यादा आसानी से समझ सकेंगे और तुलना कर सकेंगे।

क्लेम होगा आसान

सुधारों का एक अहम हिस्सा National Health Claims Exchange का इस्तेमाल बढ़ाना है। यह स्वास्थ्य मंत्रालय और बीमा नियामक की ओर से विकसित प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए अस्पताल और बीमा कंपनियां क्लेम तथा बिल से जुड़ी जानकारी एक साझा प्रारूप में भेज सकेंगी। इससे दस्तावेजों की जांच तेज होने और भुगतान में लगने वाला समय घटने की उम्मीद है। अस्पताल से मरीज की छुट्टी के समय क्लेम निपटाने की प्रक्रिया भी ज्यादा आसान हो सकती है।

अभी अलग-अलग बीमा कंपनियों और अस्पतालों में इलाज की दरें तथा कवरेज काफी अलग हैं। इसी वजह से ग्राहक बेहतर शर्तों की तलाश में बार-बार पॉलिसी बदलते हैं। मानकीकृत दरों और स्पष्ट कवरेज से इस स्थिति में बदलाव की उम्मीद है। देश में 40 से ज्यादा बीमा कंपनियां स्वास्थ्य बीमा बाजार में सक्रिय हैं। वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र से करीब 1.17 ट्रिलियन रुपये का प्रीमियम आया। ऐसे में बाजार बढ़ने के साथ नियमों को सरल बनाना भी जरूरी हो गया है।

ग्राहकों को राहत

भारत में स्वास्थ्य बीमा पर खर्च सकल घरेलू उत्पाद के 4% से भी कम है, जबकि वैश्विक औसत 7% से ज्यादा है। सरकार चाहती है कि ज्यादा लोग बीमा सुरक्षा के दायरे में आएं। दूसरी ओर निजी अस्पतालों में इलाज सरकारी अस्पतालों की तुलना में काफी महंगा है। हाल की संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक निजी अस्पताल में भर्ती का औसत खर्च करीब 530 डॉलर रहा, जबकि सरकारी सुविधाओं में यह करीब 70 डॉलर था। ऐसे में खर्च पर नियंत्रण बड़ा मुद्दा है।

अगर स्वास्थ्य बीमा सुधार लागू होते हैं तो आम पॉलिसीधारकों के लिए इलाज और क्लेम से जुड़ी जानकारी ज्यादा साफ हो सकती है। इलाज की तय दरें अस्पताल के बिल को समझने में मदद करेंगी और साझा क्लेम व्यवस्था भुगतान की प्रक्रिया तेज कर सकती है। हालांकि प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं हैं। समिति की सिफारिश के बाद सरकार और नियामक इनके स्वरूप पर फैसला करेंगे। बीमा कंपनियों को भी नई व्यवस्था के मुताबिक अपने उत्पाद और प्रक्रियाएं बदलनी पड़ सकती हैं।

पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि स्वास्थ्य बीमा सुधार का असर सिर्फ कंपनियों पर नहीं बल्कि मरीजों और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है। अगर इलाज की दरें और कवरेज ज्यादा स्पष्ट हुए तो पॉलिसी खरीदने से लेकर अस्पताल में बिल चुकाने तक की प्रक्रिया आसान हो सकती है। साझा क्लेम एक्सचेंज से भुगतान में देरी घटाने की कोशिश होगी। हालांकि अंतिम नियम आने तक किसी भी बदलाव को तय व्यवस्था मानना जल्दबाजी होगी और ग्राहकों को आधिकारिक दिशा निर्देशों का इंतजार करना होगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रस्तावित बीमा सुधार अभी विचार और सिफारिश की प्रक्रिया में हैं और इनके अंतिम नियम तथा प्रावधान बदल सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief