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बेटियों के पैतृक संपत्ति में हक पर हाई कोर्ट ने दूर किया पुराना भ्रम

बेटियों के पैतृक संपत्ति में हक को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार, 2005 में पिता का जीवित होना जरूरी नहीं।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

शिमला, हिमाचल प्रदेश। बेटियों के पैतृक संपत्ति में हक को लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि पैतृक संपत्ति में बेटियों के अधिकार बेटों के बराबर हैं और यह अधिकार इस बात पर निर्भर नहीं करता कि 2005 में हिंदू उत्तराधिकार कानून में संशोधन के समय पिता जीवित थे या नहीं। ऊना जिले के एक संपत्ति विवाद की सुनवाई करते हुए जस्टिस राकेश कैन्थला ने कहा कि बेटी भी बेटे की तरह जन्म से ही पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सेदार बनती है। [1]

भ्रम हुआ दूर

मामला करतार चंद की संपत्ति से जुड़ा था जिनकी बिना वसीयत के मृत्यु हुई थी। उनके बेटे रोशन लाल ने कथित तौर पर राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मदद से जमीन का म्यूटेशन अपने नाम करा लिया। रोशन लाल का दावा था कि उनके पिता और भाइयों के बीच 1985 में मौखिक बंटवारा हो चुका था। हालांकि ऊना के जिला न्यायाधीश ने कथित मौखिक बंटवारे को वैध बंटवारा दस्तावेज मानने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने भी पहले तय हो चुके इसी विवाद को दोबारा सुनने से इनकार किया।

अपील के दौरान रोशन लाल के वकील ने तर्क दिया कि हिंदू उत्तराधिकार संशोधन कानून भविष्य के मामलों पर लागू होता है। इसी आधार पर बेटियों के पैतृक संपत्ति में हक का विरोध किया गया। हाई कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि बेटी भी बेटे की तरह जन्म से पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सेदार बनती है। यानी केवल यह कहकर उसका अधिकार खत्म नहीं किया जा सकता कि संपत्ति से जुड़े पारिवारिक घटनाक्रम 2005 के संशोधन से पहले के हैं।

संशोधन की स्पष्टता 

हाई कोर्ट ने फैसले में साफ किया कि 9 सितंबर 2005 को हिंदू उत्तराधिकार कानून में संशोधन के समय पिता का जीवित होना अनिवार्य नहीं था। अदालत के मुताबिक 2005 के संशोधन से पहले जन्मी बेटियां भी कानून के तहत अपने अधिकार का दावा कर सकती हैं। यह टिप्पणी खास तौर पर उन मामलों के लिए अहम है जहां पिता की मृत्यु की तारीख को बेटी के संपत्ति अधिकार से जोड़कर देखा जाता है। कोर्ट ने जन्म से मिलने वाली बराबर हिस्सेदारी को कानून के तहत महत्वपूर्ण माना और इसी आधार पर विरोधी दलील को खारिज किया।

अदालत ने राजस्व अधिकारियों की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया। कोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने पहले दिए गए न्यायिक आदेशों की अनदेखी करते हुए जमीन का म्यूटेशन मंजूर किया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने रोशन लाल की अपील खारिज कर दी और बेटियों के बराबर संपत्ति अधिकार को बरकरार रखा। फैसले से यह बात भी सामने आई कि केवल राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो जाने से किसी व्यक्ति का संपत्ति पर अंतिम कानूनी अधिकार तय नहीं हो जाता। ऐसे मामलों में पहले के न्यायिक आदेश और संबंधित दस्तावेज भी अहम भूमिका निभाते हैं।

फैसले का असर 

अदालत के फैसले से उन परिवारों के लिए स्थिति ज्यादा साफ होती है जहां बेटियों के पैतृक संपत्ति में हक को लेकर विवाद है। हालांकि किसी भी व्यक्तिगत मामले में अधिकार तय करते समय संपत्ति के दस्तावेज, पारिवारिक स्थिति और पहले के अदालती आदेश देखना जरूरी होगा। इस मामले में हाई कोर्ट ने कथित मौखिक बंटवारे के दावे और म्यूटेशन की कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि बेटी को केवल बेटी होने के कारण पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी से वंचित नहीं किया जा सकता।

कुल मिलाकर पैतृक संपत्ति में हक को लेकर इस फैसले ने बेटियों के अधिकार से जुड़े एक अहम सवाल को स्पष्ट किया है। अदालत ने माना कि बेटी को बेटे के समान अधिकार जन्म से मिलता है और 2005 में कानून में संशोधन के समय पिता का जीवित होना जरूरी नहीं था। साथ ही अदालत ने गलत तरीके से किए गए म्यूटेशन को भी बरकरार नहीं रखा। हालांकि किसी व्यक्तिगत संपत्ति विवाद में अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों, तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े अधिकार मामले के तथ्यों, दस्तावेजों और लागू कानून के आधार पर अलग हो सकते हैं। किसी व्यक्तिगत संपत्ति विवाद में कानूनी कदम उठाने से पहले संबंधित दस्तावेजों और लागू कानून की स्वतंत्र कानूनी सलाह से जांच कराना उचित होगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief