WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

सरकारी कर्मचारी से मारपीट, 10 साल बाद आरोपी दोषमुक्त, मिली राहत

10 साल बाद आरोपी दोषमुक्त। सरकारी कर्मचारी से मारपीट और राजकार्य में बाधा डालने के 10 साल पुराने मामले में कोर्ट ने दिया संदेह का लाभ।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

बीकानेर, राजस्थान। राजकार्य में बाधा और सरकारी कर्मचारी से मारपीट के करीब 10 साल पुराने मामले में न्यायालय अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट पीसीपीएनडीटी मामलात की पीठासीन अधिकारी यासमीन खान ने लक्ष्मण हर्ष को संदेह का लाभ देते हुए आरोपी दोषमुक्त कर दिया। आज 13 अगस्त को सुनाए गए फैसले से आरोपी को मामले में राहत मिली। अभियोजन की ओर से आरोप साबित करने के लिए 7 गवाहों के बयान कराए गए थे, लेकिन अदालत के सामने आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। इसी आधार पर आरोपी दोषमुक्त हुआ।

पुराने मामले की पूरी कहानी

प्रकरण के अनुसार 22 मार्च 2016 को जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कनिष्ठ अभियंता मोहित भारती की रिपोर्ट पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर संख्या 50/2016 दर्ज की गई थी। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 332, 353 और 34 के तहत कार्रवाई शुरू हुई। पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और जांच पूरी होने के बाद 31 मई 2016 को लक्ष्मण हर्ष के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। इसके बाद मामला अदालत में चला और दोनों पक्षों की ओर से अपने अपने तर्क तथा साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।

अभियोजन ने मामले में आरोपों को साबित करने के लिए कुल 7 गवाहों के साक्ष्य न्यायालय के सामने रखे। सरकारी कर्मचारी के साथ मारपीट और राजकार्य में बाधा से जुड़े आरोपों को साबित करने के लिए पेश किए गए इन साक्ष्यों पर अदालत ने विस्तार से विचार किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से रखे गए तथ्यों और दलीलों की भी समीक्षा हुई। हालांकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। अदालत ने इसी स्थिति को फैसले में महत्वपूर्ण माना।

बचाव पक्ष ने रखी कमियां

आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल लाल हर्ष और अधिवक्ता निमिषा शर्मा ने पैरवी की। बचाव पक्ष ने अभियोजन के मामले में मौजूद कमियों और उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि प्रस्तुत सामग्री के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोपों को निश्चित रूप से साबित नहीं माना जा सकता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। इसके बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अभियोजन आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।

फैसले के बाद करीब 10 साल पुराने इस मामले में लक्ष्मण हर्ष को कानूनी राहत मिली। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी नहीं पाया और उसे संदेह का लाभ दिया। आरोपी दोषमुक्त होने के साथ ही इस प्रकरण में उसके खिलाफ चली कार्यवाही पर विराम लगा। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से उठाई गई साक्ष्यों से जुड़ी कमियां भी फैसले में महत्वपूर्ण रहीं। अदालत का निर्णय प्रस्तुत रिकॉर्ड और मामले में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर रहा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। न्यायालय के निर्णय और मामले से जुड़े तथ्य उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड तथा दिए गए विवरण के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। किसी पक्ष के आरोप या दलील को न्यायालय द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief