भारत वियतनाम संबंध पर बड़ा संदेश, चुनौतियों को अवसर बनाया
भारत वियतनाम संबंध को नई मजबूती मिलेगी। राजदूत शेरपा ने भरोसे, सम्मान और साथ बढ़ने पर जोर दिया, साथ ही आसियान और हिंद प्रशांत में सहयोग की बात कही।
प्रतीकात्मक फोटो
हनोई, वियतनाम। भारत वियतनाम संबंध को नई ऊंचाई देने पर जोर देते हुए वियतनाम में भारत के राजदूत त्शेरिंग डब्ल्यू शेरपा ने दोनों देशों को प्रगतिशील और आगे की सोच रखने वाला साझेदार बताया है। उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम ने चुनौतियों को अवसर में बदला है और एक दूसरे से सीखते हुए अपनी ताकत को जोड़ा है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, शेरपा ने भरोसे, आपसी सम्मान और लोगों को रिश्तों के केंद्र में रखने को साझेदारी की बड़ी ताकत बताया। [1]
भरोसे की मजबूत नींव
शेरपा ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की असली ताकत लोगों के बीच बनी सद्भावना और भरोसा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का भी जिक्र किया जिसमें साथ चलने, साथ बढ़ने और साथ जीतने की बात कही गई है। भारत वियतनाम संबंध को लेकर उन्होंने साफ किया कि यह साझेदारी सिर्फ पुराने रिश्तों तक सीमित नहीं है। बदलती दुनिया में दोनों देश एक दूसरे के अनुभवों से सीखकर नए मौके तलाश रहे हैं। उनके मुताबिक आपसी सम्मान इस रिश्ते को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा।
भारतीय राजदूत ने वियतनाम को भारत की एक्ट ईस्ट नीति और विजन महासागर का अहम स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि भारत आसियान की केंद्रीय भूमिका को लेकर प्रतिबद्ध है। वियतनाम का हिंद प्रशांत महासागर पहल में शामिल होना भी दोनों देशों की साझा सोच को मजबूत करता है। शेरपा के मुताबिक इसका मकसद क्षेत्र में कानून के शासन, शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है। भारत वियतनाम संबंध अब द्विपक्षीय रिश्तों के साथ क्षेत्रीय सहयोग के नजरिए से भी अहम होता जा रहा है।
साझा इतिहास की ताकत
शेरपा ने भारत और वियतनाम के रिश्तों को साझा सभ्यतागत संबंधों, बौद्ध धर्म, इतिहास और संस्कृति से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने औपनिवेशिक दौर की मुश्किलों के बीच एक दूसरे के राष्ट्रीय आंदोलनों से प्रेरणा ली। वियतनाम को सितंबर 1945 में और भारत को अगस्त 1947 में आजादी मिली। उन्होंने विकसित भारत 2047 और वियतनाम 2045 के लक्ष्यों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक दोनों देशों की यह आगे की सोच संयोग नहीं है, बल्कि भविष्य को लेकर साझा महत्वाकांक्षा को दिखाती है।
भारत की विकास सोच का जिक्र करते हुए शेरपा ने कहा कि देश का प्रयास अपने लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के साथ दुनिया की समृद्धि में भी योगदान देना है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की सोच का उल्लेख करते हुए भारत को ग्लोबल साउथ की आवाज बताया। साथ ही रणनीतिक स्वायत्तता की राह पर आगे बढ़ने की बात कही। उनका कहना था कि भारत अपनी जरूरतों और हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रहा है, लेकिन दुनिया के साथ सहयोग और विकास की जिम्मेदारी से भी पीछे नहीं हट रहा है।
साझा सफर आगे
भारत वियतनाम संबंध को लेकर शेरपा का संदेश ऐसे समय आया है जब दोनों देश अपने पुराने रिश्तों को नए क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दे इस साझेदारी को और व्यापक बना सकते हैं। साझा इतिहास दोनों देशों को एक मजबूत आधार देता है, जबकि बदलती वैश्विक परिस्थितियां सहयोग के नए मौके पैदा कर रही हैं। शेरपा के बयान से संकेत मिलता है कि भारत वियतनाम संबंध को आने वाले समय में रणनीतिक और क्षेत्रीय स्तर पर और मजबूत करने की कोशिश जारी रहेगी।
अपने संदेश के अंत में शेरपा ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने वाले भारतीयों और भारत के मित्रों को स्वास्थ्य, खुशी और समृद्धि की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने वियतनाम के लोगों को भी 2 सितंबर को आने वाले उनके 81वें स्वतंत्रता दिवस के लिए बधाई दी। दोनों देशों के स्वतंत्रता संघर्ष, साझा इतिहास और सांस्कृतिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए उन्होंने भरोसे और सहयोग को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। भारत वियतनाम संबंध की यही साझा नींव आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच दोस्ती और क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा दे सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। दोनों देशों की विदेश नीति और रणनीतिक प्राथमिकताओं में समय के साथ बदलाव संभव है, इसलिए रिपोर्ट में बताए गए भविष्य के सहयोग को संभावित दिशा के रूप में देखा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।