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अनूपगढ़ जिला बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन, पुलिस से भिड़े कार्यकर्ता

मुख्यमंत्री के दौरे में अनूपगढ़ जिला बहाली की मांग पर प्रदर्शन हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और 5 अधिवक्ताओं को हिरासत में लिया गया।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg अनूपगढ़ जिला बहाली की मांग

अनूपगढ़ जिला बहाली की मांग

श्रीगंगानगर, राजस्थान। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दौरे के दौरान अनूपगढ़ को पुनः जिला बनाने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और बार संघ के अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्यमंत्री की सभा स्थल की ओर मार्च कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने परशुराम चौक के पास रोक लिया। कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। वहीं बार संघ के 5 अधिवक्ताओं को भी प्रशासन ने डिटेन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। [1]

मार्च रोका तो बढ़ा तनाव

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सचिव रामदेवी बावरी के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता शहर के मुख्य बाजार में एकत्र हुए। उन्होंने अनूपगढ़ को पुनः जिला बनाने, नहरों में पानी देने और उजाड़े गए घरों को बसाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। कार्यकर्ता पैदल मुख्यमंत्री की सभा स्थल की ओर बढ़े तो बीकानेर रोड स्थित परशुराम चौक के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों से अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

रामदेवी बावरी ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और सरकार जनता की आवाज दबाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिला बहाली की मांग सहित क्षेत्र के दूसरे मुद्दों को लेकर कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान सुखविंदर सिंह जोशन, सुरेंद्र पाल सिंह बराड़, भैराराम चौहान, विजयपाल बिश्नोई, परमजीत कौर सहित कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

वकीलों ने भी जताया विरोध

बार संघ के अनुसार, 13 अगस्त को मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के लिए स्थानीय भाजपा नेताओं के माध्यम से समय लेने का प्रयास किया गया था, लेकिन मुलाकात का समय नहीं मिल सका। शुक्रवार को मुख्यमंत्री की सभा के दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी मांगें रखने की कोशिश की। इसी दौरान प्रशासन ने बार संघ अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह सेखों, सुरेश बिश्नोई, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद अत्री, मदन सिंह शेखावत और सचिव नरेन्द्र चुघ को डिटेन कर लिया। इसकी जानकारी मिलने पर अन्य अधिवक्ता भी सभा स्थल के पास पहुंचे।

बार संघ के अन्य अधिवक्ताओं ने सभा स्थल के पास नारेबाजी कर रोष जताया। अधिवक्ताओं ने कहा कि अनूपगढ़ को पुनः जिला बहाली की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसके अलावा कामरेड श्योपत मेघवाल, सत्यप्रकाश सिहाग और व्यापार मंडल अध्यक्ष सुनील गोदारा के प्रतिनिधिमंडल ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग रखी थी। श्योपत मेघवाल के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल को प्रशासन की ओर से बुलाया गया, लेकिन बाद में सदस्यों को अलग अलग स्थानों पर रोक दिया गया और मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी।

एक दिन पहले भी आमना सामना

मुख्यमंत्री के दौरे से एक दिन पहले भी कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। कांग्रेस के कुछ पदाधिकारियों को विरोध प्रदर्शन को लेकर बातचीत के लिए थाने बुलाया गया था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें वार्ता के नाम पर हिरासत में रखा गया। सूचना मिलने पर विधायक कार्यकर्ताओं के साथ थाने पहुंचीं। पुलिस ने मुख्य द्वार बंद कर दिया। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक जयप्रकाश बेनीवाल ने विधायक से बाहर आकर बातचीत की। करीब 1 घंटे की गहमागहमी के बाद कांग्रेस पदाधिकारी थाने से चले गए।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राज्य सरकार द्वारा अनूपगढ़ जिले को निरस्त किए जाने के बाद पहली बार क्षेत्र में पहुंचे थे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर भाजपा की ओर से स्वागत की तैयारियां की गई थीं, जबकि कांग्रेस ने पहले ही जिला बहाली की मांग को लेकर विरोध की चेतावनी दी थी। शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी और प्रदर्शनकारियों को सभा स्थल की ओर बढ़ने से रोक दिया। पूरे घटनाक्रम में जिला बहाली की मांग प्रमुख मुद्दा बनी रही और कांग्रेस तथा बार संघ ने संघर्ष जारी रखने की बात कही।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रदर्शन, हिरासत और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े आरोप संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित हैं तथा मामले की अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief