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E20 पेट्रोल माइलेज पर सरकार का जवाब, सिर्फ ईंधन जिम्मेदार नहीं

E20 पेट्रोल माइलेज को लेकर जारी बहस के बीच सरकार ने कहा कि केवल E20 ईंधन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। ड्राइविंग, ट्रैफिक और वाहन की हालत भी असर डालती है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, भारत। E20 पेट्रोल माइलेज को लेकर वाहन चालकों की चिंता के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने कहा कि वाहन का वास्तविक माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता। ड्राइविंग का तरीका, ट्रैफिक की स्थिति, वाहन का रखरखाव, टायरों में हवा का दबाव और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। सरकार ने यह भी कहा कि E20 का प्रमुख वाहन मानकों पर व्यापक परीक्षण और सत्यापन किया गया है। [1]

माइलेज पर कई असर

मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि वास्तविक परिस्थितियों में मिलने वाला माइलेज वाहन और ड्राइविंग की पूरी स्थिति पर निर्भर करता है। सरकार के मुताबिक एक ही वाहन को अलग अलग ट्रैफिक, सड़क, ड्राइविंग शैली और रखरखाव की स्थिति में चलाने पर ईंधन खपत बदल सकती है। इसी वजह से E20 पेट्रोल माइलेज में बदलाव को केवल पेट्रोल की वजह से हुआ बदलाव मानना सही नहीं होगा। टायरों का दबाव कम होना और लगातार एयर कंडीशनर चलाना भी ईंधन खपत बढ़ा सकता है।

सरकार ने बताया कि E20 का इंजन की टिकाऊ क्षमता, वाहन चलाने की क्षमता, स्टार्ट होने की क्षमता, अलग अलग सामग्री के साथ अनुकूलता और जंग से बचाव जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर व्यापक परीक्षण किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इन परीक्षणों और सत्यापन से E20 के साथ वाहनों की अनुकूलता और प्रदर्शन को लेकर भरोसा बढ़ता है। सरकार ने उपभोक्ताओं को ईंधन के साथ वाहन की वास्तविक उपयोग परिस्थितियों को भी ध्यान में रखने की बात कही है।

3 से 5 प्रतिशत कमी का संदर्भ

E20 को लेकर मोटर चालकों की चिंता केवल मौजूदा स्पष्टीकरण तक सीमित नहीं है। सरकार पहले यह स्वीकार कर चुकी है कि कुछ वाहनों में E20 इस्तेमाल होने पर ईंधन अर्थव्यवस्था यानी फ्यूल इकॉनमी में 3 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि सरकार का मौजूदा तर्क यह है कि वास्तविक सड़क परिस्थितियों में मिलने वाला माइलेज कई दूसरे कारणों से भी प्रभावित होता है। इसलिए E20 पेट्रोल माइलेज में संभावित बदलाव को समझने के लिए वाहन, ईंधन और इस्तेमाल की परिस्थितियों को साथ देखना जरूरी है।

मंत्रालय का ताजा स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब E20 में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण को लेकर वाहन चालकों के बीच माइलेज, वाहन प्रदर्शन और अनुकूलता से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। सरकार ने E20 को साफ परिवहन की दिशा में एक कदम बताते हुए इसके परीक्षण का हवाला दिया है। मंत्रालय का कहना है कि वाहन चालकों को ईंधन के साथ अपनी ड्राइविंग शैली, वाहन की स्थिति और नियमित रखरखाव पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे वास्तविक ईंधन खपत को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

मिलावट पर भी सफाई

सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने E20 में कथित बड़े पैमाने पर मिलावट से जुड़े दावों पर भी जवाब दिया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने कहा कि देशभर में की गई जांच में E20 पेट्रोल में ज्यादा क्लोराइड या नमी की व्यापक समस्या के दावों की पुष्टि नहीं हुई। रिफाइनरियों से लिए गए 100 से अधिक पेट्रोल नमूनों में क्लोराइड का स्तर 1 पार्ट प्रति मिलियन या उससे कम पाया गया। तय सीमा 3 पीपीएम बताई गई है।

तेल कंपनियों के मुताबिक 80 डिस्टिलरी से लिए गए एथेनॉल नमूनों और डिपो तथा टर्मिनल से लिए गए 80 से अधिक E20 नमूनों में भी क्लोराइड का स्तर निर्धारित सीमा से कम रहा। इसके अलावा करीब 90000 पेट्रोल पंपों के भूमिगत भंडारण टैंकों की जांच में पानी के प्रवेश का कोई मामला नहीं मिला। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा है कि तेल कंपनियों ने खुदरा केंद्रों पर कड़ी जांच की और केवल कुछ मामलों में मिलावट या संदूषण पाया गया।

माइलेज समझने का सही तरीका

इन आंकड़ों के बीच E20 पेट्रोल माइलेज को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि वाहन की वास्तविक ईंधन खपत एक ही कारण से तय नहीं होती। वाहन का मॉडल, इंजन की स्थिति, टायरों का दबाव, ट्रैफिक, सड़क, ड्राइविंग शैली और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल सभी असर डाल सकते हैं। इसलिए किसी एक वाहन में माइलेज घटने को देखकर सभी वाहनों के लिए एक जैसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सरकार का कहना है कि E20 का व्यापक परीक्षण किया गया है और इसके इस्तेमाल को लेकर निर्धारित वाहन मानकों पर सत्यापन हुआ है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। E20 के कारण वास्तविक माइलेज में बदलाव वाहन के मॉडल, इस्तेमाल और परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है तथा व्यक्तिगत वाहन की स्थिति के आधार पर अलग परिणाम मिल सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief