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तारापीठ में आग का खौफ, शीशा तोड़कर परिवार ने बचाई अपनी जान

तारापीठ में आग,  बाथरूम में फंसा परिवार। पानी चलाकर और शीशा तोड़कर धुएं से बचने की कोशिश की। घटना में 7 लोगों की मौत भी हुई।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg तारापीठ में इस होटल में लगी आग

तारापीठ में इस होटल में लगी आग

बीरभूम, पश्चिम बंगाल। तारापीठ में सोमवार तड़के एक निजी होटल में लगी आग ने वहां ठहरे श्रद्धालुओं के बीच अफरातफरी पैदा कर दी। शुरुआती जानकारी के अनुसार आग होटल की निचली मंजिल में लगी और देखते ही देखते धुआं कमरों तक पहुंच गया। इसी दौरान एक परिवार अपने 2 बच्चों के साथ कमरे में फंस गया। बाहर निकलने का रास्ता सुरक्षित नहीं रहने पर परिवार ने बाथरूम को अस्थायी बचाव स्थल बनाया। उधर, शुरुआती सूचना में तारापीठ में आग की घटना में 7 लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की बात सामने आई है। [विडियो]

परिवार की जंग

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित परिवार होटल की निचली मंजिल पर रिसेप्शन के पास वाले कमरे में ठहरा था। परिवार में एक व्यक्ति, उसकी पत्नी, 10 साल के 2 बच्चे और उसकी बहन मौजूद थी। उसकी मां तथा दूसरी बहन होटल के दूसरे कमरे में थीं। सुबह आग फैलने के बाद परिवार ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन कमरे में धुआं तेजी से भर गया और आग की लपटें भी अंदर तक पहुंचने लगीं। ऐसे हालात में परिवार ने बच्चों को साथ लेकर बाथरूम में जाने का फैसला किया। वहां कुछ समय के लिए उन्हें बाहर की आग से राहत मिली। [1]

तारापीठ में आग के बीच बाथरूम में पहुंचने के बाद परिवार ने बचने के लिए तुरंत पानी खोल दिया। कमरे के भीतर धुआं लगातार बढ़ रहा था और सांस लेना मुश्किल हो रहा था। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि बाहर निकलने का रास्ता कैसे बनाया जाए। इसी दौरान बाथरूम का शीशा तोड़ दिया गया, ताकि अंदर हवा आ सके और धुएं का असर कुछ कम हो। बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बनी हुई थी। परिवार ने इसी उपाय के सहारे बचाव दल के पहुंचने तक स्थिति संभालने की कोशिश की।

बचाव की कोशिश

तारापीठ में आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची और राहत तथा आग बुझाने का अभियान शुरू किया। फायर डिपार्टमेंट के अनुसार, आग तालाब के किनारे स्थित बिदिशिनी होटल के ग्राउंड फ्लोर में लगी थी। दमकल कर्मियों ने आग पर नियंत्रण पाने के साथ होटल के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम किया। हादसे में कई लोगों के घायल होने की जानकारी है, जिन्हें उपचार के लिए रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया। आग पर काबू पाने के बाद भी घटनास्थल पर जरूरी कार्रवाई जारी रही।

शुरुआती जांच में आग लगने की संभावित वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि, इसे अभी अंतिम कारण नहीं माना गया है। दमकल विभाग और पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। ताजा जानकारी में 7 लोगों की मौत का भी उल्लेख किया गया है, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है। मृतकों और घायलों से जुड़ी अंतिम स्थिति संबंधित अधिकारियों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी। आग से होटल की संपत्ति को हुए नुकसान का भी आकलन जांच के बाद सामने आ सकता है।

पुलिस की जांच

तारापीठ में आग की घटना की जानकारी मिलने के बाद तारापीठ और रामपुरहाट पुलिस स्टेशनों की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर हादसे से जुड़े तथ्यों को जुटाना शुरू किया। फिलहाल शॉर्ट सर्किट को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन आग कैसे शुरू हुई और कितनी तेजी से फैली, इसकी पूरी तस्वीर जांच के बाद सामने आएगी। पुलिस होटल में मौजूद लोगों, आग के समय की परिस्थितियों और बचाव अभियान से जुड़े पहलुओं की भी जानकारी जुटा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

तारापीठ में आग ऐसे समय लगी, जब श्रावण का आखिरी सोमवार होने के कारण धार्मिक नगरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। बड़ी संख्या में लोग मां तारा के दर्शन और पूजा के लिए यहां पहुंचे थे। तारापीठ मंदिर में मां तारा की पूजा होती है, जबकि भगवान शिव की आराधना चंद्रचूड़ के रूप में की जाती है। भीड़ वाले दिन होटल में हुए इस हादसे ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी। फिलहाल पुलिस और दमकल विभाग की कार्रवाई के साथ आग के कारण तथा हादसे में हुए नुकसान से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और फायर डिपार्टमेंट की प्रारंभिक जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मृतकों और घायलों की संख्या, आग के कारण तथा संपत्ति के नुकसान से जुड़े अंतिम आंकड़ों की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जांच के बाद ही मानी जानी चाहिए। आग जैसी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने और बचाव दल के निर्देशों का पालन करना चाहिए। अंतिम जिम्मेदारी संबंधित आधिकारिक जांच और पुष्टि पर निर्भर करेगी।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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