चमोली सुरंग हादसा: खतरे के संकेत पहले से थे, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
चमोली सुरंग हादसा सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। कमजोर चट्टान, पानी और शियर जोन की चुनौतियां पहले से दर्ज थीं।
चमोली सुरंग हादसा
चमोली, उत्तराखंड। चमोली सुरंग हादसा पांचवें दिन भी राहत और बचाव के केंद्र में है। 13 अगस्त को निर्माणाधीन THDC सुरंग में हादसा होने के बाद अभियान शुरू हुआ था। अब तक 20 लोगों को सुरंग से बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें 8 लोगों की मौत हो गई है और 2 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। NDRF, SDRF, ITBP, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें लगातार तलाश अभियान चला रही हैं। इसी बीच THDC की मार्च 2025 की रिपोर्ट ने सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। [1]
रिपोर्ट का सच
चमोली सुरंग हादसा सामने आने के बाद विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग को लेकर THDC की मार्च 2025 की रिपोर्ट में कई जगह कमजोर चट्टान दर्ज की गई थी। टेल रेस टनल करीब 3.04 किलोमीटर लंबी है और अलग अलग हिस्सों में RMR के आधार पर चट्टान की गुणवत्ता दर्ज की गई। कई स्थानों पर RMR 33 से 37 तक मिला, जिसे क्लास 4 यानी कमजोर चट्टान की श्रेणी में रखा गया। रिपोर्ट में कुछ हिस्सों में ड्रिपिंग, वेट और फ्लोइंग पानी की स्थिति भी दर्ज थी।
रिपोर्ट के अनुसार TRT के डाउनस्ट्रीम हिस्से में RD 796 से 799 मीटर पर RMR 33 के साथ फ्लोइंग पानी दर्ज हुआ। RD 799 से 811 मीटर में RMR 37 और ड्रिपिंग पानी मिला। RD 811 से 831 मीटर में फिर RMR 33 और फ्लोइंग पानी दर्ज हुआ। RD 831 से 851 मीटर में RMR 37 और ड्रिपिंग की स्थिति रही। RD 851 से 859 मीटर में चट्टान क्लास 4 की रही और पानी की स्थिति वेट दर्ज हुई। ये आंकड़े सुरंग की चुनौती को साफ दिखाते हैं।
चट्टान और पानी
रिपोर्ट में TRT के डाउनस्ट्रीम हिस्से में शियर जोन दर्ज किए गए हैं। RD 504 से 535 मीटर के बीच करीब 31 मीटर और RD 642 से 662 मीटर के बीच करीब 20 मीटर क्षेत्र में शियर जोन का उल्लेख है। इन जगहों पर क्ले फिलिंग यानी दरारों में कमजोर मिट्टी जैसा पदार्थ भरे होने की बात कही गई है। TRT आउटलेट में RD 90 से 102 मीटर के बीच भी शियर जोन दर्ज हुआ। ऐसी कमजोर पट्टियों में पानी पहुंचने पर चट्टान का व्यवहार और जटिल हो सकता है।
चमोली सुरंग हादसा सामने आने के बाद परियोजना क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना भी जटिल बताई गई है। तकनीकी अध्ययन के अनुसार यह क्षेत्र पीपलकोटी विंडो में आता है, जहां स्लेट, डोलोमाइटिक चूना पत्थर के साथ कई फाल्ट और थ्रस्ट संरचनाएं मौजूद हैं। जैसल फाल्ट, टापोन थ्रस्ट, बेमरू और हाट फाल्ट का उल्लेख है। हिमालय युवा और सक्रिय पर्वत तंत्र है, इसलिए खुदाई के दौरान चट्टान की गुणवत्ता बदल सकती है। ऐसे क्षेत्र में फेस मैपिंग और लगातार भू तकनीकी निगरानी सुरक्षा के लिए अहम है।
सुरक्षा पर सवाल
मार्च 2025 के अध्ययन में 2021 के तकनीकी अध्ययन का भी उल्लेख है। इसके अनुसार TBM एडिट के शुरुआती हिस्से में मलबे और ढलान सामग्री के बीच भूजल की स्थिति नम से संतृप्त तक मिली थी। मानसून के दौरान करीब 200 लीटर प्रति मिनट तक पानी रिसने की बात दर्ज की गई थी। यानी भूमिगत पानी की चुनौती नई नहीं थी। रिपोर्ट में क्लास 4 की कमजोर चट्टान के लिए रॉक बोल्ट, करीब 300 मिलीमीटर शॉटक्रीट, 2 परत वायर मेश और लैटिस गर्डर जैसे सपोर्ट का प्राविधान बताया गया था।
चमोली सुरंग हादसा अब केवल बचाव का मामला नहीं रह गया है। कमजोर चट्टान, पानी, शियर जोन और जटिल भूगर्भीय संरचनाओं की जानकारी पहले की तकनीकी रिपोर्ट में दर्ज थी। कमजोर हिस्सों के लिए सपोर्ट सिस्टम का प्राविधान भी बताया गया था, फिर भी 13 अगस्त की घटना में 8 लोगों की मौत हो गई और 2 लोग लापता हैं। इसलिए हादसे की जांच में यह सवाल अहम रहेगा कि दर्ज जोखिमों के बावजूद सुरक्षा उपाय कितने प्रभावी रहे। अंतिम जिम्मेदारी तय करना जांच का विषय है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भूगर्भीय जोखिम और तकनीकी रिपोर्ट से जुड़े निष्कर्ष उपलब्ध दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं और इन्हें अंतिम जांच निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।