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वार्ड आरक्षण: मेयर बनने की तैयारी थी, पार्षद का चुनाव भी गया

वार्ड आरक्षण की लॉटरी ने निगम का चुनावी गणित बदल दिया है। मेयर बनने की तैयारी कर रहे कई नेताओं के सामने पार्षद का चुनाव लड़ने का संकट खड़ा हो गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg जोधपुर नगर निगम ऑफिस

जोधपुर नगर निगम ऑफिस

जोधपुर, राजस्थान। वार्ड आरक्षण की लॉटरी के बाद शहर के नए नगर निगम चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। परिसीमन के बाद पहली बार 2 पुराने नगर निगमों की जगह 100 वार्डों वाला एक निगम गठित हुआ है। सोमवार 17 अगस्त को वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया पूरी होते ही कई ऐसे नेताओं के समीकरण बिगड़ गए, जो महापौर की कुर्सी पर नजर लगाए बैठे थे। जिनका वार्ड आरक्षित श्रेणी में चला गया, उनके सामने अब पार्षद का चुनाव लड़ने का रास्ता भी बंद हो सकता है। [1] [2]

आरक्षण से बदला खेल

वार्ड आरक्षण के तहत कुल 100 वार्डों में 65 सामान्य वर्ग, 13 अनुसूचित जाति, 2 अनुसूचित जनजाति और 20 ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित बताए गए हैं। यानी वर्गवार कुल आंकड़ा 100 वार्डों का पूरा होता है। अनुसूचित जाति की 13 सीटों में 4 महिलाओं के लिए, अनुसूचित जनजाति की 2 सीटों में 1 महिला के लिए और ओबीसी की 20 सीटों में 7 महिलाओं के लिए आरक्षण बताया गया है। सामान्य वर्ग के महिला पुरुष आंकड़ों में दिए गए तथ्यों के भीतर अंतर है, इसलिए अंतिम सूची से उसका मिलान जरूरी है।

इस वार्ड आरक्षण का सबसे बड़ा असर उन नेताओं पर पड़ सकता है, जो पहले से महापौर पद की तैयारी कर रहे थे। अगर उनका मौजूदा या पसंदीदा वार्ड ऐसी श्रेणी में चला गया, जिसमें वे चुनाव नहीं लड़ सकते, तो उन्हें नया वार्ड तलाशना होगा। इससे राजनीतिक दलों के टिकट वितरण का गणित भी बदल सकता है। सामान्य वार्डों में पुराने पार्षदों की दावेदारी मजबूत रहेगी, जबकि आरक्षित वार्डों में नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना बढ़ेगी। इस बदलाव से एकीकृत नगर निगम का पहला चुनाव और ज्यादा दिलचस्प हो गया है।

यह वार्ड हुए आरक्षित 

अनुसूचित जाति के लिए: वार्ड संख्या-  1, 26, 34, 35, 39, 83, 86, 87, 88.   

अनुसूचित महिला वर्ग के लिए: वार्ड संख्या- 2, 32, 76, 91.

ओबीसी के लिए: वार्ड संख्या- 8, 10, 19, 20, 21, 36, 50, 53, 62, 65, 70, 74, 92.

ओबीसी महिला के लिए: वार्ड संख्या- 29, 30, 41, 60, 61, 89, 90.

सामान्य वर्ग के 65 वार्ड है। इनमें महिला के लिए कुल 22 वार्ड आरक्षित किए गए हैं। 13, 52, 56, 59, 57, 33, 3, 97, 68, 14, 11, 85, 51, 44, 12 71, 78, 24, 46, 99, 95, 48 शेष वार्ड पूरी तरह से सामान्य, जिसमें पुरुष महिला कोई भी चुनाव लड़ सकता है।

43 वार्ड जो पूरी तरह से सामान्य: 5, 7, 9, 15, 16, 17, 18, 22, 23, 25, 27, 28, 31, 37, 38, 40, 42, 43, 45, 47, 49, 54, 55, 58, 63, 64, 66, 67, 69, 72, 73, 75, 77, 79, 80, 81, 82, 84, 93, 94, 96, 98, 100. 

गहलोत शेखावत की प्रतिष्ठा

जोधपुर का चुनाव राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जिला है। दूसरी ओर केंद्रीय पर्यटन संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के लिए भी यह चुनाव अहम माना जा रहा है। दोनों प्रमुख नेताओं के बीच कई मौकों पर राजनीतिक कटाक्ष देखने को मिले हैं। अब 2 नगर निगमों की जगह एक ही नगर निगम बनने के बाद दोनों नेताओं के राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा भी इसी चुनाव में होगी। वार्ड आरक्षण के बाद टिकट और उम्मीदवारों का चयन दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती बन गया है।

पहले जोधपुर में 2 नगर निगम थे और दोनों के राजनीतिक समीकरण अलग थे। एक निगम में भाजपा का बोर्ड था, जबकि दूसरे में कांग्रेस का बोर्ड रहा। अब परिसीमन के बाद एक निगम और 100 वार्ड होने से मुकाबले का दायरा बदल गया है। महापौर पद पर नजर रखने वाले नेताओं के लिए सबसे पहले पार्षद बनना जरूरी होगा और आरक्षण ने इसी पहली सीढ़ी पर कई दावेदारों को रोक दिया है। अब राजनीतिक दलों को नए चेहरे तलाशने के साथ पुराने नेताओं के लिए भी नई भूमिका तय करनी होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। दिए गए आरक्षण आंकड़ों में सामान्य वर्ग की पुरुष और महिला सीटों का योग कुल सामान्य सीटों से मेल नहीं खाता, इसलिए अंतिम पुष्टि प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूची से की जानी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief