ईमानदारी की मिसाल बने गैनण, प्रतिष्ठित सम्मान से बढ़ा मान
ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए एसीबी के हरिसिंह गैनण को प्रतिष्ठित सम्मान मिला, किसान परिवार से निकले गैनण की सोच आमजन की परेशानी से जुड़ी है।
गैनण को मिला प्रतिष्ठित सम्मान
जयपुर, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। एसीबी जयपुर में पदस्थ हरिसिंह गैनण को विभाग में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से किए गए कार्यों के लिए प्रतिष्ठित सम्मान मिला है। नीमकाथाना तहसील के सिरोही गांव निवासी गैनण साधारण किसान परिवार से आते हैं। विद्यार्थी जीवन से ही उन्होंने सरकारी दफ्तरों में आम लोगों को अपने जायज काम के लिए होने वाली परेशानियां देखीं। इसी अनुभव ने उन्हें ऐसी व्यवस्था के लिए काम करने की प्रेरणा दी, जहां नागरिक को रिश्वत या सिफारिश की जरूरत न पड़े। गैनण को सम्मान उनकी इसी कार्यशैली का उल्लेखनीय परिणाम माना जा रहा है।
ईमानदारी बनी पहचान
गैनण एसीबी की कई बड़ी ट्रेप कार्रवाइयों के साथ आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की कार्रवाई में भी शामिल रहे हैं। विभाग में मेहनत, लगन, कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी से काम करने के लिए उन्हें पहले भी नगद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र मिल चुके हैं। उनके काम का केंद्र केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम नागरिक को सरकारी व्यवस्था में बिना दबाव और बिना अनुचित भुगतान के अपना वैध काम कराने की सोच भी रही है। यही सोच उनकी कार्यशैली की खास पहचान बनी है।
परिवार और साथियों को श्रेय
हरिसिंह गैनण ने प्रतिष्ठित सम्मान की इस उपलब्धि का श्रेय अपने वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों और परिवार को दिया है। उनके अनुसार किसी भी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाने के पीछे टीम और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण होता है। साधारण किसान परिवार से निकलकर सरकारी सेवा में इस मुकाम तक पहुंचने वाली उनकी यात्रा उन युवाओं के लिए भी प्रेरक मानी जा सकती है, जो व्यवस्था में बदलाव की इच्छा रखते हैं। गैनण को सम्मान उनकी लंबे समय से जारी मेहनत और कर्तव्यनिष्ठ सेवा की सार्वजनिक सराहना के तौर पर देखा जा रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट उपलब्ध तथ्यों और संबंधित स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सम्मान की प्रकृति और उससे जुड़े आधिकारिक विवरण की पुष्टि संबंधित विभागीय अभिलेखों से की जानी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।