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तेरापंथी सम्मेलन में मंथन, संगठन से सेवा तक बनी नई कार्ययोजना

तेरापंथी सम्मेलन में संगठन, संस्कार और सेवा पर मंथन हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने युवाओं, महिलाओं और जनसेवा को स्थानीय स्तर पर गति देने का संकल्प लिया।

By अजय त्यागी
1 min read
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8 सदस्यीय दल ने संभाली जिम्मेदारी

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। तेरापंथी समाज के संगठनात्मक सशक्तीकरण और सेवा संस्कार की भावी कार्ययोजना तय करने के उद्देश्य से लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में तीन दिवसीय प्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित हुआ। आचार्यश्री महाश्रमण के पावन सानिध्य में हुए इस आयोजन में तेरापंथी सभा संस्था भीलवाड़ा के 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सक्रिय सहभागिता निभाई। विभिन्न सत्रों में प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे और सम्मेलन से मिली प्रेरणा को स्थानीय स्तर पर जनोपयोगी गतिविधियों के रूप में लागू करने का संकल्प लिया।

संगठन को मिलेगी मजबूती

सम्मेलन में संगठन के सुदृढ़ीकरण, आध्यात्मिक उन्नयन और सेवा कार्यों के प्रभावी संचालन पर व्यापक मंथन किया गया। ज्ञानशाला, उपासक श्रेणी, तेरापंथ नेटवर्क, महासभा आपके द्वार, संस्कार निर्माण, बेटी तेरापंथ की, वरिष्ठ नागरिक तथा कला एवं संस्कृति जैसे प्रकल्पों को और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। सभा अध्यक्ष अशोक सिंघवी ने बताया कि तेरापंथी सम्मेलन में सामने आए विचारों से संगठन को नई दिशा देने का प्रयास किया गया। समाज की विभिन्न गतिविधियों को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

सभा मंत्री सुनील दक ने कहा कि सम्मेलन से प्राप्त दिशा निर्देश और सुझावों को भीलवाड़ा में कार्यरूप दिया जाएगा। समाजहित में रचनात्मक और परिणामपरक गतिविधियों को नई गति देने की योजना है। प्रत्येक परिवार तक संगठन की पहुंच बढ़ाने के साथ युवाओं और महिलाओं की सहभागिता मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सेवा कार्यों को भी योजनाबद्ध तरीके से संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है। तेरापंथी सम्मेलन से मिली कार्यदिशा को स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू करने के लिए प्रतिनिधिमंडल ने संकल्प व्यक्त किया।

8 सदस्यीय दल ने संभाली जिम्मेदारी

प्रवक्ता गौतम दुगड़ ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में सभा अध्यक्ष अशोक सिंघवी, मंत्री सुनील दक, उपाध्यक्ष दिनेश हिंगड और दिनेश कांठेड़, सहमंत्री महावीर भलावत और गौतम दुगड़, कोषाध्यक्ष प्रकाश कावड़िया तथा संगठन मंत्री लक्ष्मीलाल झाबक शामिल रहे। सभी प्रतिनिधियों ने सम्मेलन के विभिन्न विषयगत सत्रों में सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने समाज से जुड़े विषयों पर अपने विचार और सुझाव साझा किए तथा भविष्य की कार्ययोजना को लेकर चर्चा में योगदान दिया।

तीन दिवसीय तेरापंथी सम्मेलन समाज में संगठन, संस्कार, सेवा और समर्पण की भावना को नई दिशा देने वाला सिद्ध हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने सम्मेलन के दौरान सामने आए सुझावों और योजनाओं को स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की बात कही। इसके साथ ही युवाओं और महिलाओं को अधिक सक्रिय रूप से जोड़ने, प्रत्येक परिवार तक संगठन की पहुंच बढ़ाने और सेवा गतिविधियों को परिणामपरक बनाने का संकल्प लिया गया। प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन से मिली प्रेरणा और स्पष्ट कार्यदिशा के साथ भीलवाड़ा लौटा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सम्मेलन और उससे जुड़े आगामी कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराए गए आयोजकीय तथ्यों पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief