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डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी, पुलिस ने जारी की बड़ी चेतावनी

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी बढ़ रही है। राजस्थान पुलिस ने फर्जी वारंट, वीडियो कॉल और रकम ट्रांसफर के जाल से बचने की आमजन को स्पष्ट चेतावनी दी है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

जयपुर, राजस्थान। राजस्थान में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ती साइबर ठगी के बीच पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल या वाट्सएप के जरिए नोटिस या वारंट जारी नहीं करती। ठग सीबीआई, ईडी, कस्टम या एटीएस अधिकारी बनकर डराते हैं और फर्जी दस्तावेज भेजते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसी कॉल पर घबराने के बजाय तुरंत सतर्क हों और संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को दें। [1]

वारंट का जाल

साइबर अपराध शाखा के अनुसार ठग पहले फोन, वाट्सएप या वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करते हैं। वे कहते हैं कि आधार कार्ड, बैंक खाते या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला, नशीले पदार्थों की तस्करी या गैरकानूनी पार्सल में हुआ है। इसके बाद पुलिस स्टेशन या जांच एजेंसी जैसा माहौल बनाकर वीडियो कॉल की जाती है। फर्जी गिरफ्तारी वारंट और नोटिस दिखाकर पीड़ित को डराया जाता है तथा मामला गोपनीय रखने का दबाव बनाया जाता है। इसी डर का फायदा उठाकर ठग बैंक संबंधी जानकारी मांगते हैं।

पुलिस ने बताया कि ठग सत्यापन के नाम पर पीड़ित की जमा पूंजी ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं। उन्हें कहा जाता है कि खाते, एफडी या दूसरी रकम अपराध से जुड़ी हो सकती है और जांच के बाद पैसा वापस मिलेगा। पुलिस के मुताबिक ऐसी बातों पर भरोसा करना खतरनाक है। किसी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल से गिरफ्तारी नहीं की जाती। संदिग्ध नोटिस या वारंट मिलने पर सीबीआई के अभय पोर्टल पर उसकी सत्यता जांची जा सकती है। डिजिटल अरेस्ट कानून में मान्य प्रक्रिया नहीं है।

ठगी से बचाव

पुलिस ने लोगों से कहा है कि किसी धमकी या संदिग्ध कॉल पर घबराएं नहीं और आधार, पैन, बैंक खाते तथा ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। किसी दस्तावेज की सत्यता जांचे बिना कोई रकम ट्रांसफर भी न करें। संदिग्ध नोटिस या वारंट का सत्यापन अभय पोर्टल के जरिए किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाए तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करे। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

राजस्थान पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी की शिकायत के लिए हेल्पलाइन 1930 का इस्तेमाल किया जा सकता है। पुलिस मुख्यालय के साइबर हेल्प डेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। आमजन को सलाह है कि डर पैदा करने वाली कॉल, फर्जी नोटिस और अचानक रकम जमा कराने के दबाव को गंभीर संकेत मानें। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर चल रहे जाल में फंसने से बचने का सुरक्षित तरीका है कि दबाव में पैसा न भेजें और तुरंत आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। साइबर ठगी से बचाव के लिए किसी भी संदिग्ध कॉल, नोटिस या वारंट की पुष्टि आधिकारिक माध्यम से ही करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief