SIT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट
SIT रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिली, दान मामले की जांच में बड़ा मोड़ आया है और अब ट्रस्ट की अगली कार्रवाई पर नजर टिकी है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
अयोध्या, उत्तर प्रदेश। राम मंदिर में दान की रकम से जुड़ी कथित चोरी के मामले में SIT रिपोर्ट ने पूरे विवाद की दिशा बदल दी है। जांच दल ने पूर्व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दी है। दोनों पर दान प्रबंधन में कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठे थे। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सौंप दी है। [1]
जांच का मोड़
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने 27 जून को अपने पद छोड़ दिए थे। इसके बाद दोनों से जांच टीम ने पूछताछ की। राय ने कथित अनियमितताओं में किसी भी भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि संदिग्ध चोरी की शिकायत उन्होंने खुद दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक शिकायत के बाद आरोपित लोगों को गिरफ्तार किया गया। राय ने यह भी कहा कि दान संग्रह में पारदर्शिता बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी थी और गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कार्रवाई की। SIT रिपोर्ट में अब क्लीन चिट मिलने से उन पर लगे आरोपों की तस्वीर बदल गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय SIT गठित की थी। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत इसके प्रमुख थे। पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार टीम में शामिल थे। जांच दल ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को दी थी। इस रिपोर्ट में कई सिफारिशें की गई थीं। बाद में ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर 25 जून को श्री राम जन्मभूमि थाने में FIR दर्ज की गई।
FIR की कहानी
FIR में 8 नामजद लोगों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था। नामजद आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। सभी नामजद आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत कार्रवाई की गई है। शुरुआती जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे FIR और गिरफ्तारियों की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
मामले में अब सबसे अहम बात यह है कि SIT रिपोर्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच के स्तर पर खारिज कर दिया है। हालांकि दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर दर्ज FIR और गिरफ्तार आरोपियों की कानूनी प्रक्रिया इससे खत्म नहीं होती। अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपे जाने के बाद अब आगे का फैसला संबंधित स्तर पर होना है। इस मामले में नजर इस बात पर रहेगी कि ट्रस्ट अंतिम निष्कर्षों के आधार पर क्या कदम उठाता है और आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं और जांच में सामने आए निष्कर्षों को संबंधित जांच प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए ना कि निर्णय। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।