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बेरोजगारी दर घटी, जुलाई में 5.1% पर पहुंचा आंकड़ा, गांवों में राहत

बेरोजगारी दर घटकर जुलाई में 5.1% पर आ गई। गांवों में राहत मिली, महिलाओं की कामकाजी भागीदारी बढ़ी, लेकिन शहरों में दर बढ़ी और रोजगार अनुपात भी चढ़ा।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली। जुलाई के दौरान बेरोजगारी के मोर्चे पर राहत की खबर आई है। 15 साल और उससे ऊपर की आबादी के लिए बेरोजगारी दर 5.1% पर आ गई, जो 4 महीने के निचले स्तर के बराबर है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून में यह दर 5.5% थी और जुलाई के लिए रॉयटर्स के सर्वे में 5.4% का अनुमान लगाया गया था। मार्च में भी बेरोजगारी दर 5.1% रही थी। [1]

गांवों में राहत

ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी की स्थिति जुलाई में बेहतर हुई। यहां दर जून के 5.0% से घटकर 4.5% रह गई। इसके उलट शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर 6.6% से थोड़ा बढ़कर 6.7% हो गई। यानी गांवों में रोजगार की स्थिति सुधरी है, लेकिन शहरों में नौकरी तलाशने वालों के सामने चुनौती बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि पुरुषों में बेरोजगारी दर 5.3% से घटकर 5.0% और महिलाओं में 5.9% से घटकर 5.4% हो गई।

रोजगार से जुड़े दूसरे आंकड़े भी जुलाई में सकारात्मक रहे। श्रम बल भागीदारी दर 54.4% से बढ़कर 55.4% हो गई। इसका मतलब है कि काम कर रहे या काम तलाश रहे लोगों की हिस्सेदारी बढ़ी। इसी तरह कामगार आबादी अनुपात 51.4% से बढ़कर 52.5% पहुंच गया। इन दोनों आंकड़ों को रोजगार बाजार में सक्रियता बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। यानी ज्यादा लोग कामकाजी गतिविधियों से जुड़ रहे हैं और रोजगार पाने वाले लोगों का अनुपात भी बढ़ा है।

महिलाओं की भागीदारी

जुलाई के आंकड़ों में महिलाओं की कामकाजी भागीदारी खास तौर पर उभरकर सामने आई। महिला श्रम बल भागीदारी दर जून के 32.7% से बढ़कर 34.4% हो गई। ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी में और तेज सुधार दिखा, जहां यह दर 36.6% से बढ़कर 38.8% पहुंची। इसका मतलब है कि ज्यादा महिलाएं काम कर रही हैं या रोजगार की तलाश में श्रम बाजार का हिस्सा बन रही हैं। हालांकि केवल भागीदारी बढ़ना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि स्थायी और बेहतर आय वाले रोजगार की उपलब्धता भी उतनी ही अहम है।

सरकारी आंकड़े नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के जुलाई बुलेटिन से आए हैं। ये आंकड़े करंट वीकली स्टेटस के आधार पर तैयार किए गए हैं और देशभर में 371021 लोगों को शामिल करते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 211411 और शहरी क्षेत्रों के 159610 लोग शामिल हैं। आंकड़ों से तस्वीर यह बनती है कि जुलाई में रोजगार बाजार की कुछ प्रमुख दरों में सुधार हुआ है। फिर भी शहरों में बढ़ी बेरोजगारी पर नजर रखना जरूरी होगा। बेरोजगारी दर घटी है, लेकिन आगे रोजगार की गुणवत्ता और स्थिरता अहम सवाल रहेंगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। रोजगार के आंकड़े सर्वेक्षण आधारित होते हैं और इनसे किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत नौकरी की स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief