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ट्रांसजेंडर कार्ड पर राहत, नए कानून के बाद भी पुराने कार्ड मान्य

ट्रांसजेंडर कार्ड को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि नए कानून से पहले जारी कार्ड फिलहाल मान्य रहेंगे। मामले की अंतिम सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि Transgender Persons Protection of Rights Amendment Act 2026 लागू होने से पहले जारी किए गए ट्रांसजेंडर कार्ड नए कानून से प्रभावित नहीं होंगे। यानी पुराने कार्ड फिलहाल मान्य बने रहेंगे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी मोहना की पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पुराने कार्ड याचिकाओं के नतीजे के अधीन जारी रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद तय की गई है। [1]

कार्ड की वैधता

ट्रांसजेंडर पहचान कार्ड किसी व्यक्ति की स्वयं पहचानी गई लैंगिक पहचान को आधिकारिक मान्यता देने में मदद करता है। इस कार्ड के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में नाम और जेंडर से जुड़े बदलाव कराने में भी सहायता मिल सकती है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में साफ किया कि 2026 के संशोधन से पहले जारी कार्ड फिलहाल चलते रहेंगे। हालांकि अदालत में इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। इसलिए पुराने कार्डों की वैधता को लेकर सामने आया सरकारी बयान मौजूदा स्थिति बताता है, अंतिम न्यायिक फैसला नहीं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कुछ दूसरी मांगें भी उठाई गईं। वरिष्ठ अधिवक्ता जैन्या कोठारी ने पहले रद्द किए जा चुके कार्ड बहाल करने की मांग की। उन्होंने उन लोगों के लिए भी सुरक्षा की बात कही जो आवेदन करने के बाद कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि इन मुद्दों पर केंद्र के जवाबी हलफनामे का इंतजार किया जाएगा। इससे साफ है कि अदालत फिलहाल अलग अलग दावों और 2026 के संशोधन के संभावित असर को केंद्र के जवाब के साथ देख रही है।

सरकार देगी जवाब

याचिकाओं में 2019 के कानून और उससे मिले अधिकारों को लेकर भी अहम सवाल उठाए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अरुंधति काटजू ने कहा कि 2019 का कानून जेंडर की स्वयं पहचान के सिद्धांत पर आधारित था। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि कुछ राज्यों ने 2014 के NALSA फैसले के आधार पर भी ट्रांसजेंडर कार्ड जारी किए थे। वकीलों ने यह चिंता भी जताई कि नए संशोधन के कारण इलाज करा रहे कुछ लोगों को सेवाओं में परेशानी और कल्याणकारी योजनाओं में व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि संशोधन से पहले व्यक्तियों को मिल चुके अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता। हालांकि अदालत ने इस स्तर पर 2026 के कानून की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अब केंद्र अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दाखिल करेगा और उसके बाद याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई आगे बढ़ेगी। ऐसे में ट्रांसजेंडर कार्ड से जुड़े पुराने अधिकारों की स्थिति फिलहाल केंद्र के बयान से स्पष्ट हुई है, लेकिन व्यापक कानूनी विवाद का अंतिम समाधान अदालत की अगली सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पुराने ट्रांसजेंडर कार्ड की वैधता को लेकर केंद्र का बयान याचिकाओं के अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन है और संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला अभी बाकी है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief