चमोली सुरंग में रेस्क्यू पूरा, मृतकों की संख्या 10, सुरक्षा पर सवाल
चमोली सुरंग में रेस्क्यू पूरा हो गया है और मृतकों की संख्या 10 पहुंच गई। कुल 22 मजदूर फंसे थे। अब सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
चमोली सुरंग हादसा
चमोली, उत्तराखंड, चमोली सुरंग में मंगलवार को बचाव अभियान पूरा कर लिया गया। बचाव दलों ने 2 और मजदूरों के शव बाहर निकाले, जिसके बाद हादसे में मृतकों की संख्या 10 हो गई। इस घटना के बाद सुरंग के भीतर फंसे या लापता सभी मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है। टीमों ने पानी निकालने, मलबा हटाने और मशीनरी हटाने के लिए लगातार काम किया। कठिन परिस्थितियों में चले इस अभियान के दौरान प्रभावित मजदूरों को जरूरी चिकित्सा सहायता भी दी गई। [1]
बचाव अभियान पूरा
चमोली सुरंग में बचाव दलों ने संभावित जगहों पर गहन तलाशी अभियान चलाया। सुरंग के अंदर जमा पानी निकालने के लिए सक्शन पंप और दूसरे आधुनिक उपकरण इस्तेमाल किए गए। मलबा हटाने के साथ खोज में बाधा बन रही मशीनरी को भी बाहर निकाला गया। जिला मजिस्ट्रेट गौरव कुमार ने अभियान की लगातार निगरानी की और अलग अलग टीमों के बीच समन्वय बनाए रखा। जिन मजदूरों को इलाज की जरूरत थी, उन्हें अस्पताल भेजा गया। प्रशासन ने प्रभावित लोगों की सेहत और दूसरी जरूरी जरूरतों पर भी लगातार नजर रखी।
इस बचाव अभियान में ITBP जोशीमठ, ITBP गौचर, सेना की जोशीमठ इकाई, NDRF, SDRF, DDRF, पुलिस, राजस्व विभाग और CISF की टीमें शामिल रहीं। सभी एजेंसियों ने मुश्किल परिस्थितियों में मिलकर काम किया और सुरंग के अंदर तक पहुंच बनाने की कोशिश जारी रखी। पानी और मलबे के बीच तलाशी का काम आसान नहीं था, लेकिन अभियान तब तक जारी रखा गया जब तक सभी फंसे या लापता मजदूरों का पता नहीं चल गया। जिला प्रशासन ने बचाव एजेंसियों, सुरक्षाबलों और संबंधित विभागों के कर्मचारियों के प्रयासों के लिए आभार जताया।
हादसे की पूरी तस्वीर
चमोली सुरंग विष्णुगाड पिपलकोटी परियोजना का हिस्सा है। 13 अगस्त को मजदूर सुरंग के भीतर काम कर रहे थे, तभी ऊपर से मलबा गिरा और 22 मजदूर अंदर फंस गए। हादसे के बाद राहत और बचाव दल तुरंत सक्रिय हुए। शुरुआती कार्रवाई में 12 घायल मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया था। इसके बाद बाकी मजदूरों की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाया गया। सुरंग के भीतर पानी, मलबे और मशीनरी के कारण बचाव दलों के सामने कई मुश्किलें आईं। इसके बावजूद तलाशी और निकासी का काम लगातार जारी रखा गया।
हादसे में जान गंवाने वाले 10 मजदूरों की पहचान प्रदीप पंवार, मुकेश सिंह, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर, भुवनेश्वर, लुकास टोपनो, चेतन पोयाम और देवनाथ के रूप में हुई है। मृतकों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड से जुड़े मजदूर शामिल हैं। बचाव अभियान पूरा होने के बाद अब प्रभावित परिवारों की मदद और घायलों के इलाज पर ध्यान है। प्रशासन की ओर से प्रभावित मजदूरों और उनके परिवारों की जरूरतों पर नजर रखी जा रही है। हादसे की परिस्थितियां जांच के बाद और स्पष्ट होंगी।
घायलों का इलाज जारी
घायलों में बिहार के 20 वर्षीय रोहित पांडेय का इलाज श्रीनगर के बेस अस्पताल में चल रहा है। पश्चिम बंगाल के गोविंदो मंडल को जिला अस्पताल गोपेश्वर में इलाज दिया जा रहा है। अन्य घायल मजदूर छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से हैं। इनमें सुनील दीवान, हरबिल गुड़िया, निस्तार भिंगरा, विनोद रावणा, दीना बेगरा, खेला राम बिसरा, सुबेक सिंह, तिलकराज, चंदन कुमार और पेन सिंह शामिल हैं। प्रशासन के मुताबिक सभी प्रभावित लोगों को जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता दी जा रही है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
चमोली सुरंग में रेस्क्यू पूरा होने के बाद अब हादसे की परिस्थितियों और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उपलब्ध तथ्यों में अभी किसी विभाग, एजेंसी या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि मलबा गिरने की तकनीकी वजह क्या थी और काम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी या नहीं। इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच के बाद ही मिल सकेगा। फिलहाल इतना साफ है कि 13 अगस्त की घटना में 22 मजदूर फंसे और 10 लोगों की जान चली गई।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। हादसे की तकनीकी वजह, सुरक्षा व्यवस्था और किसी संभावित जिम्मेदारी पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।