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होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका ईरान फिर आमने सामने, तेल महंगा

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान के दावे आमने सामने हैं। ट्रंप ने रास्ता खुला बताया, जबकि ईरान ने शर्तें पूरी होने तक इसे बंद रखने की बात कही है।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg होर्मुज जलडमरूमध्य में खड़े जहाज

होर्मुज जलडमरूमध्य में खड़े जहाज

दुबई वॉशिंगटन। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव फिर गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है और न ही कोई वार्ता तय है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और चालू बताया, जबकि ईरान का कहना है कि यह जलमार्ग तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते की शर्तें पूरी नहीं करता। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस टकराव ने तेल और वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। [1]

वार्ता पर बड़ा गतिरोध

ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ फिलहाल कोई बातचीत या बातचीत की योजना नहीं है। इसके एक दिन पहले उनके दामाद और विशेष दूत जारेड कुशनर ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है और यह पहले से ज्यादा सक्रिय हो सकती है। सोमवार को अस्थायी संघर्ष विराम भी खत्म हो गया। इसके बाद ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि कूटनीतिक गतिरोध के कारण देश पूरी तरह आक्रामक सैन्य रुख की ओर बढ़ रहा है। हालांकि मंगलवार को किसी नए हमले की सूचना नहीं मिली।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख भी सख्त है। शीर्ष ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा कि अमेरिका की ओर से बंदरगाह नाकाबंदी खत्म करने, तेल प्रतिबंध हटाने, जमे हुए ईरानी धन को जारी करने और सैन्य कार्रवाई रोकने जैसी शर्तें पूरी होने तक जलमार्ग बंद रहेगा। जून में हुए समझौते में व्यापक परमाणु समझौते और अमेरिकी प्रतिबंधों पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय हुआ था। वह समय सोमवार को खत्म हो गया और ट्रंप ने इसे बढ़ाने की योजना से इनकार किया है।

जहाजों पर बढ़ा खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य को ट्रंप भले ही खुला बता रहे हों, लेकिन समुद्री यातायात सामान्य नहीं दिख रहा है। मंगलवार को यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने बताया कि एक जहाज को जलमार्ग से बाहर निकलते समय अज्ञात वस्तु से नुकसान पहुंचा। उसके इंजन कक्ष को क्षति हुई और चालक दल का एक सदस्य प्रभावित हुआ। ओमान तटरक्षक बाकी चालक दल की सहायता कर रहा था। उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सोमवार को इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही एकल अंकों में रही, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरान से दागी गई 2 बैलिस्टिक मिसाइलों का पता चलने की जानकारी दी। उसके रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइलें समुद्री यातायात को निशाना बना रही थीं और दोनों समुद्र में गिर गईं। ईरान ने इन आरोपों को निराधार बताया। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के साथ व्यापार गतिविधियां, लेनदेन और वित्तीय आदान प्रदान अगले आदेश तक रोकने की घोषणा की। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। रॉयटर्स के अनुसार, दुबई के जेबेल अली बंदरगाह से दोनों देशों के बीच सीधी माल ढुलाई जून के आखिर में फिर शुरू हुई थी।

तेल और बाजार पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव का असर तेल बाजार पर भी दिखा। ब्रेंट कच्चा तेल संघर्ष के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है, जो युद्ध से पहले के स्तर से करीब 75 प्रतिशत अधिक था। मंगलवार को ब्रेंट 20 सेंट बढ़कर 91 डॉलर से थोड़ा ऊपर बंद हुआ। रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका ईरान के बीच समझौते की उम्मीद कमजोर होने से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी और शेयर बाजारों पर दबाव आया। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की उधारी लागत भी कई दशकों के ऊंचे स्तर तक पहुंची।

ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका से बातचीत के लिए पूरी तरह दरवाजा बंद नहीं कर रहा, लेकिन बातचीत को आत्मसमर्पण नहीं माना जा सकता। सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मुखबेर ने कहा कि सैन्य दबाव और प्रतिबंध ईरान के रुख को नहीं बदलेंगे। इस बीच अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर आगे और दबाव डालने की चेतावनी दी है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की राह साफ नहीं है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जारी विवाद से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजारों पर दबाव बने रहने की आशंका है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और अमेरिका ईरान के दावों में अंतर बना हुआ है, इसलिए घटनाक्रम को बदलती परिस्थितियों के संदर्भ में समझना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief