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सरकारी कैंसर दवा ब्लैक मार्केट में, बीकानेर से दिल्ली तक जांच

सरकारी कैंसर दवा के 4 वॉयल दिल्ली के ब्लैक मार्केट में मिले। बीकानेर से गई सरकारी सप्लाई ने दवा वितरण और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

बीकानेर, राजस्थान। आचार्य तुलसी रीजनल रिसर्च कैंसर इंस्टीट्यूट में गंभीर मरीजों के लिए निशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली महंगी सरकारी कैंसर दवा दिल्ली के ब्लैक मार्केट में मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने कालाबाजारी के एक गिरोह का खुलासा करते हुए 22 वॉयल जब्त किए हैं। इनमें 4 वॉयल बीकानेर के कैंसर अस्पताल को सरकारी सप्लाई के तहत भेजे गए थे। मामले ने सरकारी दवाओं की निगरानी और वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। [1]

सप्लाई पर सवाल

दिल्ली में मिली सरकारी कैंसर दवा में BAVENCIO, DARZALEX, IMFINZI, ERBITUX, ADCETRIS और KEYTRUDA जैसे महंगे इंजेक्शन शामिल बताए गए हैं। इनमें कई दवाओं की कीमत एक वॉयल के लिए 1 लाख रुपए या उससे अधिक बताई जा रही है। सरकारी अस्पतालों में पात्र मरीजों को ऐसी दवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में इनका ब्लैक मार्केट तक पहुंचना बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और सरकारी सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीकानेर भेजी गई सरकारी कैंसर दवा दिल्ली तक कैसे पहुंची। प्रारंभिक जांच में बताया गया है कि बरामद कुछ इंजेक्शनों की सप्लाई केवल सरकारी माध्यम से की गई थी। 22 वॉयल में से 4 वॉयल आचार्य तुलसी रीजनल रिसर्च कैंसर इंस्टीट्यूट को भेजे गए थे। अब यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि संबंधित बैच RMSCL से किस संस्थान को भेजा गया, उसे किसने रिसीव किया और मरीजों के लिए उसका वितरण किस प्रक्रिया से हुआ।

जांच का दायरा

दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच में राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड से सरकारी सप्लाई के दस्तावेज, बैच और वितरण संबंधी जानकारी मांगी है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि अस्पताल में स्टॉक किस अधिकारी या कर्मचारी ने प्राप्त किया और उसके बाद दवाओं का रिकॉर्ड कैसे दर्ज हुआ। बरामद इंजेक्शनों पर सरकारी सप्लाई से जुड़ी पहचान और विवरण मिटाने का प्रयास भी सामने आया है। इससे आशंका बढ़ी है कि दवाओं को ब्लैक मार्केट में पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्थित नेटवर्क सक्रिय था।

मामले की जांच राजस्थान, दिल्ली और मुंबई तक फैले संभावित नेटवर्क की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। पुलिस के अनुसार कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके कब्जे से 27.19 लाख रुपए की नकदी भी बरामद हुई है। आरोपियों की पहचान अभिषेक, शुभम, सूरज, शांतनु और आयुष कर्ण सहित अन्य के रूप में बताई गई है। हालांकि, सरकारी कैंसर दवा अस्पताल से बाहर निकालने में कौन शामिल था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

बीकानेर में अब स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड की जांच अहम मानी जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि RMSCL से संबंधित बैच की कितनी दवाएं भेजी गईं, स्टॉक किस संस्थान को आवंटित हुआ और अस्पताल में खेप किसने रिसीव की। इसके साथ मरीजों को दवा देने का रिकॉर्ड भी मिलाया जा सकता है। सबसे अहम सवाल 4 वॉयल को लेकर है कि वे अस्पताल की व्यवस्था से बाहर कैसे पहुंचे और दिल्ली के ब्लैक मार्केट तक किस रास्ते से पहुंचे।

मंत्री का रुख

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने जयपुर में कहा कि सरकारी अस्पतालों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली महंगी जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी या अनधिकृत बिक्री किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पूरी सप्लाई चेन, स्टॉक रजिस्टर, इंडेंट, डिस्पैच और अस्पताल स्तर पर वितरण रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि महंगी सरकारी कैंसर दवा की सप्लाई में अनियमितता, लापरवाही या मिलीभगत मिलने पर जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की ओर से कहा गया है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं की उपलब्धता और सुरक्षित उपयोग की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। दूसरी ओर, दिल्ली की कार्रवाई के बाद सरकारी सप्लाई की पूरी चेन की जांच का दायरा बढ़ सकता है। यदि बीकानेर के 4 वॉयल का संबंध सरकारी स्टॉक से पुष्ट होता है तो अस्पताल स्तर से लेकर वितरण तंत्र तक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में जांच आगे बढ़ेगी।

आगे की जांच

फिलहाल सरकारी कैंसर दवा के दिल्ली के ब्लैक मार्केट तक पहुंचने की पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दवाएं अस्पताल से बाहर किस स्तर पर निकलीं, सरकारी पहचान मिटाने का प्रयास किसने किया और नेटवर्क में राजस्थान के अलावा कौन लोग जुड़े हैं। मंत्री के सख्त रुख के बीच सरकारी रिकॉर्ड और जब्त दवाओं का मिलान अहम होगा। इसी से पता चलेगा कि सरकारी कैंसर दवा की सप्लाई में वास्तविक चूक कहां हुई।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मामले में आरोप, जांच और जिम्मेदारी से जुड़े निष्कर्ष संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief