WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

दूध संकलन बढ़ा, पशुपालकों की बढ़ती भागीदारी ने बदली तस्वीर

दूध संकलन बढ़ा जिससे 18 अगस्त को 4.41 लाख लीटर प्रतिदिन का नया रिकॉर्ड बना। पशुपालकों की भागीदारी से डेयरी ने अब 5.50 लाख लीटर का लक्ष्य तय किया।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

भीलवाड़ा राजस्थान। भीलवाड़ा डेयरी ने दूध संकलन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाया है। 18 अगस्त 2026 को डेयरी ने 4.41 लाख लीटर प्रतिदिन दूध संकलन दर्ज किया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 2.96 लाख लीटर प्रतिदिन था। इस तरह इस वर्ष संकलन में 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। दूध संकलन बढ़ा तो डेयरी प्रबंधन ने इसे पशुपालकों, दुग्ध समितियों और कर्मचारियों के साझा प्रयासों की बड़ी सफलता बताया है।

रिकॉर्ड कैसे बना

इस बढ़ोतरी के पीछे पशुपालकों की बढ़ती भागीदारी और दुग्ध समितियों की सक्रियता अहम मानी जा रही है। प्रबंध संचालक त्रिभुवन पाटीदार ने कहा कि यह उपलब्धि पशुपालकों के भरोसे और लगातार मेहनत का नतीजा है। डेयरी से अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रबंधन का मानना है कि दूध संकलन बढ़ने से गांवों में दुग्ध कारोबार को सहारा मिलेगा और समितियों का नेटवर्क मजबूत होगा। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की कोशिशों को भी गति मिल सकती है।

डेयरी प्रबंधन के अनुसार, मौजूदा रिकॉर्ड को आगे बढ़ाने के लिए अब 5.50 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दूध संकलन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए क्षेत्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों को लगातार प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। हर दुग्ध सहकारी समिति के जरिए ज्यादा से ज्यादा पशुपालकों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना है। दूध संकलन बढ़ा है, इसलिए अब मकसद केवल आंकड़ा बढ़ाना नहीं, बल्कि दुग्ध व्यवसाय का दायरा बढ़ाकर अधिक ग्रामीण परिवारों को इससे जोड़ना भी है।

अब अगला बड़ा लक्ष्य

पशुपालकों को डेयरी से जोड़ने की यह मुहिम जिले के दुग्ध सहकारी आंदोलन को मजबूत कर सकती है। ज्यादा सदस्य जुड़ने से समितियों की गतिविधियां बढ़ेंगी और दूध की नियमित आपूर्ति का आधार भी मजबूत होगा। प्रबंधन ने अधिकारियों, कर्मचारियों, समितियों और पशुपालकों के सहयोग की सराहना की है। डेयरी का कहना है कि आगे भी सामूहिक प्रयास जारी रखे जाएंगे, ताकि दुग्ध कारोबार को नई ऊंचाई मिले और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद हो। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल सकता है।

18 अगस्त का 4.41 लाख लीटर प्रतिदिन का आंकड़ा भीलवाड़ा में दुग्ध व्यवसाय की बढ़ती संभावनाओं का संकेत देता है। दूध संकलन बढ़ा तो उसके साथ पशुपालकों की भागीदारी, समितियों की सक्रियता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। अब सबसे बड़ी चुनौती इस रफ्तार को कायम रखते हुए 5.50 लाख किलोग्राम प्रतिदिन के लक्ष्य तक पहुंचने की होगी। डेयरी प्रबंधन का फोकस साफ है कि ज्यादा पशुपालक जुड़ें और इस क्षेत्र का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट उपलब्ध तथ्यों और संबंधित स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। दूध संकलन और डेयरी से जुड़े आंकड़े संबंधित प्रबंधन द्वारा बताए गए तथ्यों पर आधारित हैं और इनमें भविष्य में बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief