इजरायली कार्रवाई पर सीरिया का पलटवार, कहा सैन्य मौजूदगी की योजना नहीं
इजरायली कार्रवाई पर सीरिया ने तुर्की बेस की बात नकारी, बातचीत का रास्ता खुला, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
प्रतीकात्मक फोटो
दमिश्क, सीरिया। इजरायली कार्रवाई के बाद सीरिया और इजरायल के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। सीरियाई विदेश मंत्री असद अल शैबानी ने कहा कि अबू अल दूहुर एयरबेस पर तुर्की का सैन्य अड्डा बनाने की कोई योजना नहीं थी। उनके मुताबिक वहां तुर्की के सैन्य अधिकारी प्रशिक्षण और व्यापक सैन्य सहयोग के लिए पहुंचे थे। बेस काफी हद तक खाली था और अभी संचालन के लिए तैयार नहीं हुआ था। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया ने हमले को बिना वैध आधार वाला कदम बताया। [1]
बेस पर सीरिया की सफाई
असद अल शैबानी ने कहा कि इजरायल को साफ बताया गया था कि एयरबेस पर तुर्की की स्थायी सैन्य मौजूदगी बनाने की कोई योजना नहीं थी। उन्होंने तुर्की सैनिकों की तैनाती या स्थायी सैन्य व्यवस्था की संभावना से भी इनकार किया। उनके मुताबिक तुर्की के अधिकारी वहां प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग के लिए आए थे। एयरबेस अभी पूरी तरह तैयार नहीं था और वहां बड़े स्तर पर कोई सैन्य जमावड़ा नहीं था। इस बयान के जरिए सीरिया ने इजरायल की सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को सीधे खारिज करने की कोशिश की है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसके उलट कहा कि उनके देश ने हमले से पहले सीरिया को चेतावनी दी थी। उनका दावा था कि संदेश बिल्कुल साफ था और सीरिया से बेस पर तुर्की की मौजूदगी रोकने को कहा गया था। नेतन्याहू के बयान से संकेत मिला कि इजरायल तुर्की की संभावित सैन्य भूमिका को गंभीर सुरक्षा खतरे के तौर पर देखता है। दूसरी तरफ सीरिया का कहना है कि एयरबेस को तुर्की के स्थायी सैन्य ठिकाने में बदलने की कोई योजना ही नहीं थी।
बातचीत से हल की उम्मीद
असद अल शैबानी ने कहा कि सीरिया अभी भी इजरायल के साथ तनाव कम करने के लिए बातचीत के लिए तैयार है। उनके मुताबिक अमेरिका की मध्यस्थता में करीब 1 साल तक चली वार्ता के दौरान दोनों देशों ने सुरक्षा समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की थी। बाद में इजरायल अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गया और समझौता लागू नहीं हो पाया। सीरिया चाहता है कि भविष्य के किसी भी समझौते में दोनों पक्षों की सुरक्षा चिंताओं को जगह मिले और उसकी संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाए।
सीरियाई विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर इजरायली कार्रवाई के तहत सैन्य गतिविधियां जारी रहीं तो क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है। उनके बयान से साफ है कि दमिश्क सैन्य टकराव बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक रास्ते को खुला रखना चाहता है। हालांकि सीरिया अपनी संप्रभुता को लेकर समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहा। दूसरी ओर इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्रमुख आधार मान रहा है। यही विरोधाभास दोनों देशों के बीच किसी नए समझौते की राह में सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
क्षेत्रीय तनाव का असर
इजरायली कार्रवाई के बाद विवाद केवल सीरिया और इजरायल तक सीमित नहीं रहा है। इसमें तुर्की की सैन्य भूमिका और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा भी जुड़ गई है। सीरिया का कहना है कि तुर्की के अधिकारी प्रशिक्षण के लिए एयरबेस पहुंचे थे, जबकि इजरायल वहां संभावित तुर्की सैन्य मौजूदगी को लेकर चिंतित है। अगर दोनों पक्ष अपने अपने दावों पर कायम रहते हैं तो तनाव कम करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे माहौल में अमेरिका की मध्यस्थता से बातचीत फिर शुरू होना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम माना जाएगा।
अब निगाह इस बात पर है कि सीरिया और इजरायल सुरक्षा तथा संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किस तरह आगे बढ़ते हैं। सीरिया बातचीत की पेशकश कर रहा है, लेकिन लगातार सैन्य कार्रवाइयों को क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए खतरा बता रहा है। इजरायल की तरफ से तुर्की की संभावित मौजूदगी को लेकर सुरक्षा चिंता बनी हुई है। ऐसे में आगे की कूटनीतिक बातचीत बेहद महत्वपूर्ण होगी। इजरायली कार्रवाई से पैदा हुए तनाव को अगर बातचीत के जरिए नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। संघर्ष और कूटनीतिक घटनाक्रम से जुड़े दावे संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित हैं और स्थिति बदलने के साथ इनमें नए तथ्य जुड़ सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।