रुपये में तेजी की उम्मीद, डॉलर 3 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा
रुपये में तेजी की उम्मीद है, लेकिन महंगा कच्चा तेल बढ़त रोक सकता है। डॉलर 3 महीने के निचले स्तर पर पहुंचने से बाजार को शुरुआती राहत मिली है।
प्रतीकात्मक फोटो
मुंबई, महाराष्ट्र। भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुल सकता है। अमेरिकी डॉलर के 3 महीने के निचले स्तर पर जाने से रुपये को शुरुआती सहारा मिला है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कारोबारियों को उम्मीद है कि रुपया 95.62 से 95.66 प्रति डॉलर के दायरे में खुल सकता है। बुधवार को रुपया 95.7525 पर बंद हुआ था। हालांकि महंगा कच्चा तेल और एशियाई मुद्रा के कमजोर निकट अवधि के रुझान के कारण रुपये में तेजी सीमित रहने की आशंका है। [1]
डॉलर का दबाव
डॉलर इंडेक्स बुधवार को 0.88% गिरा और मार्च के मध्य के बाद उसकी सबसे बड़ी दैनिक गिरावट दर्ज हुई। अमेरिकी ट्रेजरी ने लंबी अवधि के बॉन्ड के लिए तरलता समर्थन अभियान का आकार दोगुना करने की योजना बताई है। इस कदम के बाद बाजार में डॉलर पर दबाव बढ़ा। अमेरिकी ट्रेजरी का मकसद लंबी अवधि के बॉन्ड बाजार पर बढ़ रहे दबाव को कम करना है। इससे रुपये में तेजी को शुरुआती राहत मिल सकती है, लेकिन कारोबारियों का मानना है कि यह असर लंबे समय तक टिकना मुश्किल होगा।
अमेरिकी ट्रेजरी की घोषणा ऐसे समय आई है जब लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड में बिकवाली तेज हुई थी। महंगाई को लेकर चिंता और निवेशकों की अधिक टर्म प्रीमियम मांग ने 30 साल की यील्ड को 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंचा दिया। इसके बाद 30 साल की यील्ड 5.18% और 10 साल की यील्ड 4.64% पर आ गई। ING Bank ने कहा कि यह कदम क्वांटिटेटिव ईजिंग नहीं है। बैंक के मुताबिक लंबी अवधि के बॉन्ड की खरीद छोटी अवधि का कर्ज जारी करके वित्तपोषित होगी।
बॉन्ड बाजार
तेल बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की दिशा तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर नजर रख रहा है। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो डॉलर की कमजोरी से मिलने वाली राहत सीमित हो सकती है। इसी वजह से कारोबारियों को लगता है कि रुपये में तेजी का असर शुरुआती कारोबार के आगे बहुत ज्यादा नहीं टिकेगा।
एक बैंक के मुद्रा कारोबारी ने कहा कि डॉलर की व्यापक कमजोरी रुपये को बहुत ज्यादा फायदा नहीं देगी। उनके मुताबिक डॉलर और रुपया खुलने के बाद शुरुआती गिरावट में खरीदार सक्रिय हो सकते हैं। इसका मतलब है कि विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग अचानक लौट सकती है। एशियाई मुद्राओं का निकट अवधि का रुझान भी कमजोर बताया जा रहा है। ऐसे में भारतीय मुद्रा को अमेरिकी डॉलर की नरमी से राहत तो मिल सकती है, लेकिन उसके मुकाबले लगातार मजबूती बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
तेल की चुनौती
बाजार की अगली दिशा तय करने में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमत अहम रहेंगी। ING Bank ने चेतावनी दी है कि 10 साल की अमेरिकी यील्ड अगर 5% के ऊपर जाती है या वहां पहुंचने का गंभीर खतरा बनता है तो अमेरिकी ट्रेजरी उस स्तर का सक्रिय रूप से विरोध कर सकता है। इस संकेत से वैश्विक बाजार को कुछ भरोसा मिला है। फिर भी निवेशक महंगाई, ब्याज दरों और अमेरिकी वित्तीय बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे।
फिलहाल भारतीय मुद्रा के लिए तस्वीर मिली जुली है। डॉलर की कमजोरी शुरुआती कारोबार में सहारा दे रही है, लेकिन महंगा तेल और एशियाई मुद्राओं का कमजोर रुझान जोखिम बढ़ा रहा है। रुपया 95.62 से 95.66 के आसपास खुल सकता है और शुरुआती बढ़त दर्ज कर सकता है। हालांकि कारोबारियों को लगता है कि डॉलर में गिरावट के बावजूद खरीदार जल्द सक्रिय होंगे। इसलिए रुपये में तेजी की गुंजाइश बनी रहने के साथ उसकी रफ्तार सीमित रहने की संभावना है। बाजार का आगे का रुख तेल और वैश्विक बाजार की चाल तय करेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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