WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

कच्चे तेल से रुपये पर दबाव, RBI का सहारा, 95.78 तक खुलने के आसार

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आयातकों की डॉलर मांग से रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है, हालांकि RBI के हस्तक्षेप से गिरावट सीमित रह सकती है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

मुंबई, महाराष्ट्र। भारतीय रुपये पर शुक्रवार को रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और आयातकों की ओर से डॉलर की लगातार मांग है। ट्रेडर्स के मुताबिक रुपया 95.74 से 95.78 के दायरे में खुल सकता है, जबकि गुरुवार को यह 95.7050 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में RBI लगातार बाजार में दखल देकर रुपये की गिरावट को थामता रहा है। कमजोर डॉलर भी घरेलू मुद्रा के लिए कुछ राहत दे रहा है। [1]

RBI के सहारे टिकेगा रुपया

ट्रेडर्स का कहना है कि इस हफ्ते रुपये की चाल काफी सीमित रही है। अब तक इसकी कारोबारी सीमा करीब 30 पैसे की रही है और यह पिछले हफ्ते के पैटर्न जैसा ही है। रोजाना कारोबार में कच्चे तेल और आयातकों की हेजिंग से रुपये पर दबाव आता है, लेकिन RBI के हस्तक्षेप के बाद गिरावट थमती दिखती है। बाजार में यह उम्मीद बनी हुई है कि केंद्रीय बैंक आगे भी जरूरत पड़ने पर डॉलर बेचकर रुपये को सहारा दे सकता है और इसकी कमजोरी को सीमित रख सकता है।

एक बैंक के करेंसी ट्रेडर के मुताबिक हाल के दिनों के घटनाक्रम को देखते हुए यह मानना उचित होगा कि RBI फिर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। इससे रुपया एक सीमित दायरे में रह सकता है, हालांकि जोखिम फिलहाल कमजोरी की तरफ ज्यादा है। RBI के हस्तक्षेप से दिन के भीतर होने वाली तेज हलचल भी सीमित रहने की उम्मीद है। ट्रेडर्स का यह भी मानना है कि केंद्रीय बैंक की मौजूदगी के कारण सट्टेबाजी वाले प्रवाह कमजोर रह सकते हैं और रुपये की चाल काफी हद तक नियंत्रित दायरे में रह सकती है।

डॉलर और तेल का असर

अमेरिकी डॉलर शुक्रवार को भी दबाव में रहा और उसके साप्ताहिक नुकसान में रहने की संभावना थी। अमेरिकी Treasury की ओर से लंबी अवधि के बॉन्ड को सहारा देने के कदम से डॉलर को कुछ राहत मिली थी, लेकिन बाजार इसे फिलहाल सीमित और अस्थायी उपाय मान रहा है। गुरुवार को लंबी अवधि के अमेरिकी Treasury में फिर बिकवाली शुरू हो गई। इस वजह से पहले आई राहत तेजी कमजोर पड़ गई। डॉलर की कमजोरी हालांकि भारतीय रुपये के लिए फिलहाल सकारात्मक संकेत बनी हुई है।

दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमत रुपये के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। शुक्रवार को Brent crude 94 डॉलर प्रति बैरल के ठीक नीचे कारोबार कर रहा था। इससे पहले पिछले सत्र में इसमें 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई थी। पिछले 2 हफ्तों में Brent की कीमत करीब 12 फीसदी बढ़ चुकी है। अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ जंग के नतीजे को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल आपूर्ति पर चिंता बनी हुई है। ऐसे माहौल में रुपये पर दबाव बना रह सकता है, हालांकि RBI का हस्तक्षेप और कमजोर डॉलर गिरावट को सीमित कर सकते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। विदेशी मुद्रा और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के कारण बाजार की दिशा तेजी से बदल सकती है और किसी भी निवेश या मुद्रा संबंधी निर्णय से पहले स्वतंत्र वित्तीय सलाह लेना उचित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief