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RGHS में गड़बड़ी! 479 प्रकरणों ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता

RGHS में गड़बड़ी की आशंका ने चिंता बढ़ाई है। 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरणों में मरीजों को एक बीमारी पर कई बार बुलाने की जांच हो रही है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

जयपुर, राजस्थान। RGHS में गड़बड़ी की आशंका से जुड़ा मामला सामने आया है। एक माह के डेटा विश्लेषण में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण मिले हैं। इनमें एक ही बीमारी के लिए मरीजों को 3 से 4 बार अस्पताल बुलाकर अलग अलग जांच कराने की बात सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार 2000 रुपए से अधिक लागत वाली जांचों के लिए लागू प्री ऑथराइजेशन व्यवस्था से बचने की आशंका की जांच हो रही है। करीब 50 अस्पतालों और 60 चिकित्सकों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। [1]

जांच में क्या सामने आया

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ के अनुसार निजी अस्पतालों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां एक ही बीमारी के लिए मरीजों को 3 से 4 बार बुलाकर अलग अलग जांचें कराई गईं। प्रारंभिक तौर पर आशंका है कि 2000 रुपए से अधिक लागत वाली जांचों के लिए जरूरी प्री ऑथराइजेशन से बचने के लिए जांचों और दावों को अलग अलग किया गया हो सकता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन मामलों की जांच अभी जारी है और फिलहाल किसी अस्पताल या चिकित्सक को दोषी नहीं ठहराया गया है।

आरजीएचएस की परियोजना अधिकारी डॉ निधि पटेल के अनुसार जांचों को अलग अलग कराने के कारण कुछ मरीजों को अनावश्यक रूप से कई बार अस्पताल जाना पड़ा। इनमें महिलाएं और बुजुर्ग मरीज भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे मरीजों को परेशानी हुई और योजना की व्यवस्था के संभावित दुरुपयोग की आशंका पैदा हुई। RGHS की आधिकारिक व्यवस्था में जांच की सुविधा सरकारी और सूचीबद्ध डायग्नोस्टिक केंद्रों के जरिए दी जाती है। योजना में प्री ऑथराइजेशन और ऑनलाइन क्लेम प्रक्रिया भी शामिल है।

कहां मिले ज्यादा मामले

एक माह के विश्लेषण में RGHS में गड़बड़ी की आशंका वाले 479 प्रकरणों में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और अलवर में ऐसे मामले सबसे ज्यादा बताए गए हैं। करीब 50 अस्पतालों और 60 चिकित्सकों की भूमिका जांच के दायरे में आने के बाद संबंधित रिकॉर्ड और दावों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक प्रारंभिक जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या एक ही बीमारी से जुड़ी जांचों को अलग अलग कराने के पीछे कोई सुनियोजित वजह थी। फिलहाल सामने आए आंकड़े जांच का आधार हैं, अंतिम निष्कर्ष नहीं।

सरकार के अनुसार सभी मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अस्पताल या चिकित्सक द्वारा अधिक क्लेम प्राप्त करने अथवा प्री ऑथराइजेशन से बचने के लिए जानबूझकर जांचों या दावों को अलग करना साबित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। RGHS की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार योजना पूरी तरह ऑनलाइन और ऑटोमेटेड व्यवस्था पर आधारित है तथा इसमें अस्पताल स्तर पर प्री ऑथराइजेशन और ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया शामिल है। ऐसे में RGHS में गड़बड़ी की आशंका वाले इन मामलों की जांच योजना की पारदर्शिता के लिहाज से अहम है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इसमें उल्लिखित अस्पतालों और चिकित्सकों की भूमिका फिलहाल जांच के दायरे में है और किसी को दोषी ठहराने का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief