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जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन, भाई बहन के रिश्ते में घुले संस्कार

जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन कार्यशाला में भाई बहन के प्रेम के साथ संस्कार, संयम और आत्मानुशासन का संदेश दिया गया। ज्ञानार्थियों ने प्रत्याख्यान भी ग्रहण किए।

By अजय त्यागी
1 min read
जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन

जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन

मुंबई, महाराष्ट्र। जैन संस्कार विधि के माध्यम से रक्षाबंधन कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई की ओर से किया गया। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में शासन श्री साध्वी श्री कंचनप्रभाजी, शासन श्री साध्वी श्री मंजुरेखाजी और साध्वीवृंद का पावन सान्निध्य रहा। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थी और प्रशिक्षिकाएं भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं। कार्यशाला का उद्देश्य रक्षाबंधन के पारंपरिक उत्सव को आध्यात्मिक चेतना, पारिवारिक प्रेम और संस्कारों के साथ जोड़ना रहा। कार्यक्रम में सभी ने उत्साह से भाग लिया।

रक्षा सूत्र का भाव

कार्यक्रम की शुरुआत संस्कारक अशोक बरलोटा ने नमस्कार महामंत्र के सामूहिक उच्चारण से कराई। इसके बाद जैन संस्कार विधि के अनुरूप मंत्रोच्चार और मंगल भावों के साथ रक्षाबंधन की रस्म पूरी की गई। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर स्नेह और पारस्परिक प्रेम का भाव व्यक्त किया। भाइयों ने भी अपनी बहनों को शुभकामनाओं और स्नेह के प्रतीक के रूप में भेंट दी। इस दौरान वातावरण में पारिवारिक अपनापन और धार्मिक आस्था का सुंदर मेल दिखाई दिया।

कार्यक्रम में परिषद मंत्री श्रेयांश मुनोत की बहन पूजा सुराणा ने अपने भाई को राखी बांधी। इससे आयोजन की आत्मीयता और बढ़ गई। वहीं प्रशिक्षिका सौरभ बरमेचा को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दी गईं। जैन संस्कार विधि के अनुसार हुए इस आयोजन में भाई बहन के रिश्ते को केवल उपहार और रस्म तक सीमित रखने के बजाय उसमें प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी का भाव जोड़ने की कोशिश की गई। उपस्थित ज्ञानार्थियों और प्रशिक्षिकाओं ने पूरे कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लिया और धार्मिक वातावरण को जीवंत बनाए रखा।

संस्कार और आत्मानुशासन

कार्यशाला के दौरान ज्ञानार्थियों ने विभिन्न प्रत्याख्यान ग्रहण किए और संस्कार तथा आत्मानुशासन का संकल्प लिया। तेयुप दक्षिण मुंबई अध्यक्ष सुमित सुराणा ने अपने प्रेरणादायी वक्तव्य में जैन संस्कार विधि की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल परंपराओं को निभाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनमें संस्कार, स्नेह, संयम और पारिवारिक मूल्यों का सुंदर समन्वय होता है। उनके संबोधन ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को पर्व के आध्यात्मिक और सामाजिक पक्ष से जोड़ने का काम किया।

आयोजन में रक्षाबंधन को आत्मीय रिश्तों के साथ संस्कारों से जोड़ने पर जोर रहा। जैन संस्कार विधि के माध्यम से किए गए मंत्रोच्चार और संकल्पों ने कार्यक्रम को धार्मिक स्वरूप दिया। ज्ञानार्थियों के लिए यह अवसर केवल राखी बांधने और उपहार देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें अनुशासन और सद्भाव के महत्व को समझने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम के अंत में रौनक धाकड़ ने सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। मंगल पाठ के साथ कार्यशाला का सफल समापन हुआ।

रिश्तों में घुला सद्भाव

जैन संस्कार विधि से आयोजित यह रक्षाबंधन कार्यशाला भाई बहन के रिश्ते में प्रेम के साथ सद्भाव, संयम और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देने वाली रही। आयोजन में शामिल ज्ञानार्थियों, प्रशिक्षिकाओं और परिवारजनों के लिए यह अवसर परंपरा को नए अर्थों के साथ समझने का माध्यम बना। तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई ने इस आयोजन के जरिए पर्व की आत्मीयता को संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया। कार्यक्रम की जानकारी तेयुप दक्षिण मुंबई उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया ने दी। उपस्थितजनों के लिए यह आयोजन एक मंगलमय और यादगार अनुभव रहा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कार्यक्रम से संबंधित नाम, पद और विवरण आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief